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कैट ने ई-कॉमर्स में अनियमितताओं पर सुरेश प्रभु को लिखा पत्र

कैट ने ई-कॉमर्स में अनियमितताओं पर सुरेश प्रभु को लिखा पत्र

नई दिल्ली। कॉन्फेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने देश में ई-कॉमर्स में अनियमितता के मुद्दे को लेकर सोमवार को केंद्रीय वाणिज्य मंत्री सुरेश प्रभु को पत्र लिखा है। कैट का आरोप है कि सरकार स्थानीय व्यापार के स्थान पर विदेशी कंपनियों को ज्यादा तरजीह दे रही है जिससे वह भारत के रिटेल व्यापार पर ई-कॉमर्स एवं एफडीआई के माध्यम से कब्जा कर सकें।

सुरेश प्रभु को भेजे पत्र में कैट ने ई-कॉमर्स कंपनियों पर आरोप लगाते हुए कहा कि यह कंपनियां सरकार की एफडीआई पालिसी का खुला उल्लंघन करते हुए सीधे उपभोक्ताओं को सामान बेच रही हैं| पालिसी के अनुसार यह कंपनियां केवल बिजनेस टू बिज़नेस ही व्यापार कर सकती हैं। अपने पोर्टल पर यह कंपनियां भारी मात्रा में छूट एवं अन्य स्कीम देकर कीमत को प्रभावित करती हैं जो पालिसी के अनुसार अवैध है। कैट की शिकायतों पर कार्रवाई करना तो दूर इस विषय पर अभी तक एक भी कदम नहीं उठाया गया।

कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी.सी.भरतिया एवं राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खण्डेलवाल ने कहा कि मीडिया में बड़े पैमाने पर विज्ञापन देना सीधे तौर पर उपभोक्ता और उत्पाद की कीमतों को प्रभावित करना है| साथ ही बाजार पर अपना एकाधिकार स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि ई-कॉमर्स कम्पनियों को विदेशी निवेश प्राप्त हुआ है| इसलिए ये कंपनियां केवल बिजनेस टू बिजनेस तक ही ई कॉमर्स गतिविधियां कर सकती हैं और सीधे तौर पर उपभोक्ता को माल नहीं बेच सकती। उपभोक्ताओं को सीधे माल खरीदने के लिए आमंत्रित करना एफडीआई नीति का खुला उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि इन कंपनियों के पोर्टल पर बिकने वाले उत्पाद का स्वामित्व इन कंपनियों के पास नहीं है| ऐसे में किस प्रकार ये कंपनियां उस उत्पाद की कीमत तय कर सकती हैं जिसकी मालिक ये हैं ही नहीं।

भरतिया एवं खण्डेलवाल ने कहा की ये कंपनियां अपने को मार्केटप्लेस मॉडल होने का दावा करती हैं| इस नाते ये केवल तकनीकी प्लेटफार्म ही चला सकती हैं| जिस पर केवल विक्रेता पंजीकृत होकर इनके प्लेटफार्म के माध्यम से ई कॉमर्स द्वारा अपना सामान बेच सकता है। जब ये कंपनियां अपने पोर्टल पर बिकने वाले सामान की मालिक ही नहीं हैं तो किस प्रकार ये अपने पोर्टल पर सेल लगा सकती हैं| फिर भी ये कंपनियां अपने पोर्टल पर सेल का खुला आमंत्रण दे रही हैं जो सीधे ही एफडीआई नीति का उल्लंघन है।

Updated : 2018-03-06T05:30:00+05:30
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