घर के कचरे से बनाएं जैविक खाद और बायो गैस

घर के कचरे से बनाएं जैविक खाद और बायो गैस
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-औरंगाबाद के सभी थानों में हैं गार्डन, जैविक खाद बनाने से मिल रहा है रोजगार

-शारदा बाल ग्राम में बन रही जैविक खाद, बायो गैस पर बनता है भोजन

ग्वालियर, न.सं.। घरों से निकलने वाले कचरे से भी जैविक खाद बनाई जा सकती है। इस खाद का उपयोग खेती और बाग-बगीचों में करके फसल की पैदावार बढ़ाने के साथ पर्यावरण को भी सुरक्षित रखा जा सकता है। इतना ही नही, घरों व होटलों से निकलने वाले वेस्ट से बिजली और बायो गैस भी बनाई जा सकती है। यह कहना है पुणे से आए विवम सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर गिरीश कांडलगांवकर का।

शारदा बाल ग्राम में पहुंचे श्री कांडलगांवकर ने स्वदेश से चर्चा के दौरान बताया कि उनकी पत्नी निर्मला कांडलगांवकर समाजसेवी हैं और विवम नाम से एक संस्था चलाती हैं। कुछ साल पहले जब वह महाराष्ट्र के गांवों में गर्इं तो उन्होंने गांव की महिलाओं को बताया कि किस प्रकार वह कचरे को एकत्र कर उसका उपयोग जैविक खाद बनाने में कर सकती हैं। वहांं की महिलाओं ने जब इस कार्र्य को किया तो उन्हें खेती के लिए खाद के साथ रोजगार भी मिलने लगा। श्री कांडलगांवकर ने बताया कि बाद में उन्होंने घरों तथा होटलो से निकलने वाले कचरे से बिजली बनाने के प्लांट लगाए। आज महाराष्ट्र के 35 गांवों में इसी तकनीकी से बिजली व खाद तैयार की जा रही है। इतना ही नहीं, औरंगाबाद के सभी थानों में गार्डन हैं और उनसे निकलने वाले कचरे से बनी खाद को वहीं उपयोग किया जा रहा है।

तीन साल पहले आए थे शारदा बालग्राम

श्री कांडलगांवकर ने बताया कि वह तीन साल पहले वर्ष 2015 में शारदा बाल ग्राम में आए थे। तब उन्होंने स्वामी सुप्रदीप्तानंद जी को अपने प्रोजक्ट के बारे में बताया था। उसके बाद शारदा बाल ग्राम में जैविक खाद बनाने के साथ बायो गैस प्लांट भी लगाया गया, जिससे यहां भोजन बनाया जाता है, साथ ही जैविक खाद का उपयोग पेड़-पौधों में किए जाने के साथ ही खाद को दूसरी जगह भी भेजा जा रहा है।

केंचुए कराते हैं लाखों की कमाई

श्री कांडलगांवकर ने बताया कि जैविक खाद बनाने के लिए केंचुए की आवश्यकता होती है। ये केंचुए हजारों का नहीं लाखों का फायदा देते हैं। केचुए की मदद से ही जैविक खाद तैयार की जाती है। उन्होंने बताया कि फूड वेस्ट कॉर्नर से 24 घण्टे में भी खाद तैयार होती है।

बायो गैस से पूरे गांव को कर दिया रोशन

चर्चा के दौरान श्री कांडलगांवकर ने बताया कि रत्नागिरी के चिपलून तहसील के पास मडहाल गांव में बिजली की काफी समस्या थी। इसके बाद गांव की मदद करते हुए उनके द्वारा वहां बायो गैस का प्लांट लगाया गया और पूरे गांव में बायो गैस से बिजली की आपूर्ति शुरू की गई। उन्होंने बताया कि नागपुर के पास चंदापुर, पंडरपुर में भी बायो गैस के प्लांट लगाए गए हैं।

घर की छत से शुरू हुआ खाद बनाना

गिरीश कांडलगांवकर ने बताया कि उन्होंने 50000 रुपए लगाकर विवम एग्रोटेक की शुरूआत की। उन्होंने सबसे पहले अपने घर की छत पर केंचुए से खाद बनाने की इकाई लगाई। शुरू में उन्होंने घर में बनी खाद गांव की महिलाओं को टेस्ट करने के लिए दी। जैविक खाद की गुणवत्ता के लिए उन्होंने देश भर के कृषि विश्विद्यालयों में अच्छी खाद बनाने के लिए जानकारी ली।

एमआईटीएम के गार्डन में तैयार होगी जैविक खाद

श्री कांडलगांवकर ने बताया कि इस बार वह ग्वालियर के एमआईटीएम महाविद्यालय में जाएंगे। उन्होंने बताया कि एमआईटीएम में तैयार गार्डन से निकलने वाले कचरे से जैविक खाद तैयार की जाएगी। इसके लिए पूरी तैयारी की जा चुकी है।

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