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सिर्फ नाम का बनकर रह गया है आकस्मिक विभाग

सिर्फ नाम का बनकर रह गया है आकस्मिक विभाग
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नहीं शुरू हुआ आॅक्सीजन सिस्टम मरीज हो रहे परेशान
ग्वालियर|
जयारोग्य चिकित्सालय में प्रतिदिन हजारों की संख्या में मरीज उपचार के लिए आते हैं, जिनमें कई मरीज ऐसे भी होते हैं, जो गंभीर अवस्था में पहुंचते हैं, जिन्हें तत्काल उपचार की आवश्यकता होती है, लेकिन अस्पताल में व्याप्त अव्यवस्थाओं के चलते गंभीर स्थिति में पहुंचने वाले मरीजों को तत्काल उपचार उपलब्ध नहीं हो पाता है, जिसके चलते उन्हें निजी अस्पताल में जाना पड़ता है। एक्सीडेंट या अन्य दुघर्टना में घायल व्यक्ति सबसे पहले जयारोग्य अस्पताल के आकस्मिक उपचार विभाग में पहुंचता है, लेकिन अस्पताल का आकस्मिक उपचार विभाग सिर्फ नाम का ही आकस्मिक विभाग बनकर रह गया है। इस विभाग में गंभीर मरीजों के उपचार के लिए ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है, जिसे देखकर कहा जा सके कि यह अस्पताल का आकस्मिक विभाग है। आकस्मिक विभाग में पहुंचने वाले मरीजों में से कई मरीजों को आॅक्सीजन की जरूरत पड़ती है, लेकिन विभाग का आॅक्सीजन सिस्टम लम्बे समय से चालू ही नहीं हो सका है, जबकि आकस्मिक उपचार विभाग में आॅक्सीजन सबसे महत्वपूर्ण भाग होता है, लेकिन आॅक्सीजन न होने के कारण यहां कई बार मरीज की जान तक आफत में पड़ जाती है।

प्रमुख सचिव के निरीक्षण के दौरान किया था शुरू
जयारोग्य अस्पताल में चिकित्सा शिक्षा विभाग के पूर्व प्रमुख सचिव प्रभांशु कमल निरीक्षण के लिए पहुंचते थे। इस दौरान अस्पताल प्रबंधन द्वारा अपनी अव्यवस्थाआें को छुपाने के लिए आॅक्सीजन सिस्टम चालू कर दिया गया था और प्रमुख सचिव से कहा गया था कि आॅक्सीजन सिस्टम सही है, लेकिन निरीक्षण के बाद से ही आॅक्सीजन सिस्टम बंद कर दिया गया और आज तक शुरू नहीं हो सका है।

राज्य महिला आयोग भी उठा चुका है सवाल
आकस्मिक उपचार विभाग में आॅक्सीजन न मिलने पर विगत दो वर्ष पहले एक महिला की मृत्यु हो गई थी, जिसकी शिकायत उसके पति द्वारा राज्य महिला आयोग से की गई थी। महिला आयोग ने इस मामले की जांच कर अस्पताल प्रबंधन पर सवाल खड़े करते हुए कहा था कि महिला को आकस्मिक उपचार विभाग में आॅक्सीजन क्यों नहीं दिया गया। इससे साफ है कि अस्पताल में व्याप्त अव्यवस्थाओं के कारण ही महिला की मृत्यु हुई थी।

Updated : 2018-03-26T05:30:00+05:30
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