स्नेह सरिता के धनी थे गुप्तेजी : अरुण जी

स्व.गुप्ते जी को दी श्रद्धांजलि
ग्वालियर| नई सड़क स्थित विवेकानंद सभागार में आज स्वर्गीय चंद्रशेखर गुप्ते जी को श्रद्धासुमन अर्पित किए गए। इस अवसर पर उपस्थित स्व्यंसेवकों ने गुप्ते जी के साथ बिताए पलों को याद करते हुए संस्मरण भी सुनाए।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह प्रचारक प्रमुख श्री अरुण जी जैन ने संस्मरण सुनाते हुए कहा कि गुप्ते जी का जीवन सरलता का आदर्श था। वे अपने लिए बहुत कठोर थे, लेकिन उतने ही दूसरों के लिए सरल भी थे। उन्होंने अपने सरल व्यवहार से कई स्वयंसेवकों का निर्माण किया। उन्होंने कहा कि गुप्ते जी ने वृद्धावस्था में भी अपने आपको एक शिशु ही समझा। उनकी स्मरण शक्ति तेज थी, वे जिससे भी मिलते थे, उसको कभी भूलते नहीं थे। गुप्ते जी सही अर्थों में स्रेह सरिता के धनी थे।
इस अवसर पर स्वयंसेवकों ने भी अपने-अपने संस्मरण सुनाए। जिसमें कहा गया कि गुप्ते जी में मनसा वाचा कर्मणा में केवल संघ ही दिखता था। इस अवसर पर संघ के क्षेत्र प्रचारक दीपक विस्पुते जी, प्रांत प्रचारक अशोक पोरवाल, सह प्रांत प्रचारक राजमोहन जी, सह प्रांत कार्यवाह यशवंत इंदापुरकर सहित कई स्वयंसेवक उपस्थित रहे।
