नरेश अग्रवाल ने कराई फजीहत

राज्यसभा में जाने के लिए टिकट नहीं मिलने के बाद समाजवादी पार्टी से भाजपा में शामिल होने वाले नरेश अग्रवाल के साथ सिर मुड़ाते ही ओले पड़े वाली कहावत सिद्ध हो रही है। उन्होंने भले ही गुस्से में आकर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया हो, लेकिन उनकी वार्ता की शैली में कोई बदलाव दिखाई नहीं दे रहा है। हम जानते हैं कि नरेश अग्रवाल एक ऐसे नेता हैं जो विवादित बयान देने के लिए जाने जाते रहे हैं। यहां तक उन्होंने हिन्दू देवी देवताओं के बारे में भी अशोभनीय टिप्प्णी तक की है, उस समय भाजपा ने नरेश अग्रवाल का भारी विरोध किया था। भाजपा में प्रवेश लेने के बाद भी नरेश अग्रवाल ने जया बच्चन के बारे में जिस प्रकार से बयान दिया है, वह भारत की महिलाओं का अपमान है। हालांकि भाजपा नेताओं ने नरेश अग्रवाल के इस बयान पर तत्काल ही आपत्ति दर्ज करा दी, इसके साथ ही नरेश अग्रवाल को शब्दों से एक चेतावनी भरा संदेश भी दिया है कि भाजपा में इस प्रकार की बयानबाजी नहीं चलेगी। नरेश अग्रवाल ने कहा था कि समाजवादी पार्टी ने एक नाचने वाली के लिए मेरा टिकट काट दिया, उनका आशय यकीनन जया बच्चन जी से ही था, क्योंकि सपा ने राज्यसभा के लिए इस बार जया बच्चन को उम्मीदवार बनाया है।
विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने इस पर कड़ी आपत्ति जतायी। उन्होंने कहा कि अग्रवाल का भाजपा में स्वागत है, लेकिन जया बच्चन पर उनकी टिप्पणी अनुचित और अस्वीकार्य है। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने पार्टी का सैद्धांतिक पक्ष रखते हुए नरेश अग्रवाल के बयान पर कहा कि भाजपा सभी लोगों का सम्मान करती है, चाहे वह किसी भी समुदाय या फिल्मों से ही क्यों न हो। नरेश अग्रवाल के स्वभाव को देखते हुए वर्तमान में यही कहा जा सकता है कि वह कितना भी अपने आपको परिवर्तित कर लें, लेकिन भाजपा के सिद्धांतों से वह मेल नहीं खा सकते। क्योंकि लम्बे समय से विभिन्न राजनीतिक दलों में काम करने के बाद उनका स्वभाव भी वैसा ही बन गया है। अयोध्या मामले को लेकर भी उन्होंने कई विवदित टिप्पणियां की हैं। यहां तक कि केन्द्र सरकार की खराब शब्दों में आलोचना भी की है, ऐसे में कहा जा सकता है कि वह भाजपा में किस प्रकार से सामंजस्य बिठा पाएंगे। नरेश अग्रवाल ने समाजवादी पार्टी के बारे में कभी कहा था कि वह समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव और रामगोपाल यादव का साथ कभी नहीं छोडेंगे। लेकिन समाजवादी पार्टी जिस ढंग से तमाम दलों के साथ गठबंधन कर रही है, ऐसे में यही कहा जा सकता है कि अब पहले वाली सपा नहीं रही। इसके साथ ही नरेश अग्रवाल ने कहा कि भाजपा से मैंने कोई राज्यसभा का टिकट नहीं मांगा है। कोई शर्त नहीं रखी है। पार्टी जो भी काम देगी, वह करने को तैयार हैं। अब देखना यह है कि जिस प्रकार से नरेश अग्रवाल अपने बयान को लेकर भाजपा में आलोचना का पात्र बन रहे हैं, ऐसी स्थिति में उनका भाजपा में भविष्य क्या होगा, अभी से कह पाना जल्दबाजी ही होगी, लेकिन इतना तय है कि श्री अग्रवाल को भाजपा में लम्बी पारी खेलना है तो अपनी बोलचाल की भाषा में संयम लाना होगा, नहीं तो आसमान से टूटा खजूर में अटका वाली कहावत सिद्ध होती हुई दिखाई देगी।
