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सोम डिस्टलरीज मामला : विधायक डॉ. गोविन्द सिंह ने विधानसभा में लहराया ‘स्वदेश’, लगाए गंभीर आरोप

सोम डिस्टलरीज मामला : विधायक डॉ. गोविन्द सिंह ने विधानसभा  में लहराया ‘स्वदेश’, लगाए गंभीर आरोप

सरकार सोम डिस्टलरीज पर इतनी मेहरबान क्यों?


भोपाल, ब्यूरो। आज फिर एक बार स्वदेश ग्वालियर मप्र की विधानसभा में लहराया गया। पहले खदानों को लेकर और आज शराब के ठेकों को लेकर ग्वालियर स्वदेश राज्य विधानसभा में चर्चा में छाया रहा। मंगलवार को विधानसभा में वाणिज्यिक कर विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान ब्लैक लिस्टेड शराब कंपनी सोम डिस्टलरीज पर सरकार की मेहरबानी को लेकर विपक्ष ने सरकार को जमकर घेरा। इस दौरान स्वदेश ग्वालियर की खबरों को उल्लेख करते हुए वरिष्ठ विधायक डॉ. गोविन्द सिंह ने सदन में अखबार को लहराते हुए कहा कि आज तो सरकार बता ही दे कि इस कंपनी पर सरकार इतनी मेहरबान क्यों है।

वाणिज्यिक कर विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा में भाग लेते हुए वरिष्ठ विधायक डॉ. गोविंद सिंह ने कहा कि उन्हे याद है कि ब्लैक लिस्टेड शराब कंपनी सोम डिस्टलरीज 1993 में सीहोर की नदी में गंदा पानी छोड़ कर उसे प्रदूषित कर दिया था। तब उस पर कार्रवाई हुई थी। उस समय उस यूनिट को बंद कर मामला दबा दिया गया। उसके बाद 2004 में धार कलेक्टर ने इस कंपनी को वसूली का नोटिस दिया लेकिन कंपनी ने पैसा जमा नहीं किया, कलेक्टर ने कंपनी को ब्लैक लिस्टेड कर दिया। इस कंपनी ने औद्योगिक निगम से भी 12 करोड़ कर्जा लिया वह भी वापस नहीं किया। उन्होंने कहा कि इतना सब गिनाने का मकसद केवल यह बताना है कि यह कंपनी इतनी ताकतवर है कि आज भी चल रही है। इतना कहने के बाद विधायक डॉ. गोविंद सिंह ने ‘स्वदेश’ अखबार लहराते हुए कहा कि लगातार एक महीने से इस अखबार में इस कंपनी के खिलाफ समाचार प्रकाशित हो रहे हंै इसके बाद भी सरकार कोई कार्रवाई क्यों नहीं कर रही है। जब सवोच्च न्यायालय आदेश दे चुका है कि कंपनी से वसूली की जाए तो वसूली क्यों नहीं की जा रही है। ब्लैक लिस्टेड कंपनी घोषित करने के बाद भी न तो उसके ठेके निरस्त किए गए और न ही उससे वसूली की गई । आखिर सरकार इस कंपनी पर इतनी मेहरबान क्यों है। उन्होंने कहा कि और भी कंपनियां है इसलिए सरकार इस एक कंपनी पर मेहरबानी न करे और इसके खिलाफ कार्रवाई करे। वाणिज्यिक कर विभाग की अनुदान मांगो पर विधायक जीतू पटवारी,ओमप्रकाश सखलेचा, डां राजेन्द्र पाण्डेय,यशपाल सिंह सिसोदिया ने भी भाग लिया।


कांग्रेस को 50 साल तक क्यों याद नहीं आई शराबबंदी की: मलैया

दरअसल आज विधानसभा में वाणिज्यकर विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा चल रही थी। कांग्रेस विधायकों का कहना था कि सरकार इस बात की प्रचार तो खूब कर रही है कि प्रदेश में शराबबंदी की जा रही है लेकिन प्रदेश में धड़ल्ले से शराब की दुकानें चल रही है, अंत में कांग्रेसी विधायकों के सवालों के जवाब में वित्तमंत्री जयंत मलैया ने विपक्ष के सभी आरोपों का आक्रामता से जवाब देते हुए कहा कि कांग्रेस ने देश और प्रदेश में 50 साल तक राज किया तब क्यों नहीं याद आई प्रदेश में शराबबंदी की। और जिस कंपनी को संरक्षण देने का आरोप लगाया गया है उसके बारे में तो कांग्रेस विधायकों को सब पता ही होगा। एक समय वह तत्कालीन मुख्यमंत्री के साथ विदेश यात्राओं तक में साथ जाते थे। मलैया ने स्वीकार किया कि सरकार भी प्रदेश में शराबबंदी चाहती है लेकिन इसके लिए केवल सरकारी सख्ती से काम नहीं चलेगा। सामाजिक जागरुकता के बिना सही मायनों में शराबबंदी का कोई फायदा नहीं होगा। वाणिज्यिक कर मंत्री ने बताया कि वर्ष 2018-19 में गर्ल्स स्कूल, कॉलेज, हॉस्टल और धार्मिक स्थलों से 50 मीटर तक की दूरी की 149 देशी-विदेशी मदिरा दुकानों को एक अप्रैल, 2018 से बंद कर दिया जाएगा। वर्ष 2017-18 में नर्मदा किनारे के शहरों में पांच किलोमीटर तक की दूरी की 66 मदिरा दुकानों को बंद किया गया है। प्रदेश में 50 लीटर से अधिक अवैध शराब के परिवहन को गैर-जमानती अपराध बनाया गया है। मध्यप्रदेश में आबकारी मद से 8 हजार करोड़ रुपए का वार्षिक राजस्व प्राप्त होता है, जो कल्याणकारी कार्यों पर खर्च किया जाता है।

Updated : 2018-03-14T05:30:00+05:30
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