एमपी आॅनलाइन का सिस्टम हुआ फेल, फिर शुरू किया हमारी लाड़ली ट्रेकर

एमपी आॅनलाइन का सिस्टम हुआ फेल, फिर शुरू किया हमारी लाड़ली ट्रेकर
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गर्भवती महिलाओं पर रखी जाएगी निगरानी, आधे केन्द्रों पर हुए शुरू


ग्वालियर, न.सं.। एमपी आॅनलाइन के पोर्टल के माध्यम से हो रहे अल्ट्रासाउण्ड की व्यवस्था पूरी तरह फैल हो गई है। जिसके चलते अब स्वास्थ्य विभाग ने बंद पड़े हमारी लाड़ली एक्टिव ट्रेकर को शुरू करने की तैयारी कर ली है। स्वास्थ्य विभाग ने शहर के 50 प्रतिशत अल्ट्रासाउण्ड केन्द्रों पर यह ट्रेकर शुरू कर दिया है। जिससे अब अल्ट्रासाउण्ड कराने पहुंच रहीं गर्भवती महिलाओं पर फिर से निगरानी रखना आसान होगा।

लिंग परीक्षण और कन्या भू्रण हत्या पर रोक लगाने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा वर्ष 2010-11 में हमारी लाड़ली एक्टिव टेÑकर अल्ट्रासाउण्ड केन्द्रों पर लगाए गए थे। लेकिन कई अल्ट्रासाउण्ड संचालकों ने इसका विरोध किया और वह न्यायालय में चले गए। जिस पर न्यायालय ने आदेश जारी करते हुए कहा कि विभाग किसी भी अल्ट्रासाउण्ड केन्द्र के संचालक को यह ट्रेकर लगाने के लिए बाध्य नहीं कर सकते, अगर शासन खुद यह ट्रेकर लगवाना चाहे तो वह लगा सकता है। इसी के कारण यह ट्रेकर वर्ष 2012-13 में बंद कर दिया गया। इसके बाद सभी अल्ट्रासाउण्ड केन्द्रों को एमपी आॅनलाइन पोर्टल पर रजिस्टर करवा दिया गया था।

लेकिन अल्ट्रासाउण्ड केन्द्र संचालकों के लिए यह आॅनलाइन प्रकिया और बड़ी परेशानी बन गई थी। क्योंकि रेडियोलॉजिस्ट चिकित्सकों को गर्भवती महिलाओं के फार्म एमपी आॅनलाइन के माध्यम से ही भरने पड़ रहे हैं, आॅनलाइन प्रक्रिया जटिल होने के कारण चिकित्सकों को तो परेशानी हो ही रही है, साथ ही गर्भवती महिलाओं को भी अल्ट्रासाउण्ड कराने के लिए घंटो इंतजार करना पड़ रहा है। जिस कारण विगत दिनों आयोजित हुई पीसी-पीएनडीटी समिति की बैठक में सभी अल्ट्रासाउण्ड केन्द्रों के संचालकों ने यह सहमति दी कि वह खुद से ही यह ट्रेकर लगवाना चाहते हैं। इसी के चलते अब दुबारा से शहर भर के करीब 115 अल्ट्रासाउण्ड केन्द्रों पर हमारी लाड़ली एक्टिव टेÑकर शुरू किए जा रहे हैं, जिसमें से करीब 50 प्रतिशत केन्द्रों पर यह ट्रेकर शुरू भी कर दिए गए हैं। इसके साथ ही अब इस ट्रेकर के माध्यम से गर्भवती महिलाओं पर निगरानी रखना भी स्वास्थ्य विभाग के लिए आसान हो जाएगा।

ऐसे काम करेगा यह ट्रेकर

-एक्टिव ट्रैकर डिवाइस के अंदर एक चिप होती है। यह अल्ट्रासाउंड सोनोग्राफी मशीन के अंदर सेटटॉप बॉक्स की तरह लगता है।
-यह डिवाइस सोनोग्राफी मशीन के अंदर होने वाले हर काम की लगातार वीडियो रिकॉर्डिंग करता है। मशीन के शुरू होने के साथ ही यह ट्रेकर भी शुरू हो जाता है।
-सोनोग्राफी सेंटरों पर गर्भवती की सोनोग्राफी करते समय फॉर्म-एफ भरना होता है। इसमें महिला का आईडी प्रूफ लेना और पीसी एण्ड पीएनडीटी एक्ट के तहत इस फॉर्म को आॅनलाइन करना अनिवार्य है।
-इस ट्रेकर के माध्यम से जिलाधीश और सीएमएचओ पूरी रिपोर्टिंग भी देख सकते हैं।

इनका कहना है

रेडियोलॉजिस्ट चिकित्सकों ने अपनी सहमति दे दी है, इसी के चलते अब यह ट्रेकर दुबारा शुरू किए जा रहे हैं। अभी करीब 50 केन्द्रों पर यह ट्रेकर शुरू कर दिए गए हैं। इस माह के अंत तक सभी केन्द्रों पर ट्रेकर शुरू करवा दिए जाएंगे।

डॉ. अमित रघुवंशी
नोडल अधिकारी, पीसी-पीएनडीटी

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