Top
Home > Archived > दिमाग की हड्डी में पड़ गया था मवाद आॅपरेशन कर लगाई कृत्रिम हड्डी

दिमाग की हड्डी में पड़ गया था मवाद आॅपरेशन कर लगाई कृत्रिम हड्डी

दिमाग की हड्डी में पड़ गया था मवाद आॅपरेशन कर लगाई कृत्रिम हड्डी
X

उपचार के लिए भटकते रहे दिल्ली, जयारोग्य में मिला नया जीवन

ऑपरेशन के बाद ऑपरेशन से पहले

ग्वालियर/ सुजान सिंह। अंचल के सबसे बड़े अस्पताल के न्यूरोसर्जरी विभाग में एक 54 वर्षीय व्यक्ति रामसेवक शर्मा को चिकित्सकों ने नया जीवन दान दिया। रामसेवक ब्रेन हेमरेज की गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। तमाम उपचार के बाद ब्रेन हेमरेज तो ठीक हो गया, लेकिन करीब एक वर्ष बाद दिमाग की हड्डी में संक्रमण हो गया, तमाम दवाएं खाने के बाद भी संक्रमण बढ़ता गया और माथे के आगे की हड्डी पूरी तरह सड़ गई। जिसके उपचार के लिए रामसेवक के बेटे उन्हें दिल्ली के मेदांता व एम्स में ले गए। वहां भी कोई संतोषजनक उपचार नहीं मिल पाया । अंत में जयारोग्य के न्यूरोसर्जरी विभाग के चिकित्सकों ने उनका आॅपरेशन कर कृत्रिम हड्डी लगाई। जिसके बाद अब रामसेवक बिलकुल ठीक है और अपनी सामान्य जिन्दगी जी रहे हैं।

मोतीझील शिव शक्ति नगर निवासी रामसेवक शर्मा का एक्सीडेंट विगत वर्ष जेल रोड पर मोटरसाइकिल चलाते समय हुआ था। एक्सीडेंट में रामसेवक के सिर में चोट आई थी, जिसके उपचार के लिए परिजन उन्हें आनन-फानन में आयुष्मान हॉस्पीटल लेकर पहुंचे। जहां चिकित्सकों ने उपचार के दौरान सिर की चोट में टांके लगा दिए और कुछ दिन उपचार के बाद उनकी छुट्टी कर दी। लेकिन एक्सीडेंट के करीब एक वर्ष बाद रामसेवक के सिर में दर्द शुरू हुआ और उनके सिर से मवाद निकलने लगा। जिसके उपचार के लिए निजी चिकित्सकों के पास पहुंचे और उपचार लिया, फिर भी उनके सिर से मवाद निकलना बंद नहीं हुआ। इसके बाद वह न्यूरोसर्जरी विभाग के डॉ. अवधेश शुक्ला के पास उपचार के लिए पहुंचे तो उनकी एमआरआई सहित अन्य जांचे कराई गईं। जांचों में सामने आया कि उनके सिर की एक बड़ी हड्डी में संक्रमण होने के कारण गलाव हो गया है। डॉ. शुक्ला ने पहले तो रामसेवक को दो माह तक दवाएं दी, लेकिन फिर भी वह ठीक नहीं हुआ। इसके बाद डॉ. शुक्ला ने रामसेवक के बेटे दिलीप शर्मा को बताया कि उनके सिर में कृत्रिम हड्डी डालनी पड़ेगी, अगर वह चाहें तो दिल्ली में भी आॅपरेशन के लिए जा सकते हैं। इस पर दिलीप अपने पिता रामसेवक को दिल्ली मेदांता हॉस्पीटल में लेकर पहुंचे तो वहां उन्हें आॅपरेशन के लिए लगभग 3 लाख खर्चा बताया । इसके बाद दिलीप अपने पिता को एम्स में लेकर पहुंचे तो वहां आॅपरेशन के लिए एक वर्ष की वेटिंग दी गई। दिल्ली के अस्पतालों में चक्कर काटने के बाद अंत में दिलीप अपने पिता को दुबारा जयारोग्य हॉस्पीटल में डॉ. शुक्ला के पास लेकर पहुंचे और अपनी परेशानी बताई। इस पर डॉ. शुक्ला ने न्यूरोसर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. एस.एन. अयंगर से बात कर मरीज को आॅपरेशन के लिए भर्ती कर लिया। आॅपरेशन के दौरान रामसेवक के सिर की हड्डी निकाल कर कृत्रिम हड्डी लगाई, जिसके बाद अब रामसेवक बिलकुुल ठीक हैं।

अभी तक नहीं हुआ इतना बड़ा आॅपरेशन

डॉ. अवधेश शुक्ला ने बताया कि इस तरह का इतना बड़ा आॅपरेशन अभी तक जयारोग्य में नहीं किया गया था। सिर में छोटी-छोटी आर्टिफीशियल हड्डियां तो पहले आॅपरेशन के दौरान दिमाग में लगाई गई हैं, लेकिन मरीज के सिर की बड़ी हड्डी में इंफेक्शन हो गया था। जिस कारण मरीज का आर्टिफीशियल कार्नीयोप्लास्टी विथ टाइटेनियम आॅपरेशन किया गया, जो अभी तक अस्पताल में नहीं हुआ है।

दो बार किया गया आॅपरेशन, 2 घण्टे मेहनत करने के बाद डाली हड्डी

आॅपरेशन काफी जटिल था, लेकिन पूरी तरह सफल रहा। डॉ. शुक्ला ने बताया कि मरीज की हड्डी में बहुत ज्यादा संक्रमण फैल चुका था। जिस कारण मरीज का दो स्टेज में आॅपरेशन करना पड़ा। पहले आॅपरेशन के दौरान मरीज के सिर की हड्डी निकाल दी गई थी और लगभग 3 माह बाद संक्रमण खत्म होने के बाद मरीज के सिर में कृत्रिम हड्डी लगाई गई। जिसका आॅपरेशन दो घण्टे तक चला। इसके बाद मरीज का आॅपरेशन सफल हो सका, अब मरीज बिलकुल स्वस्थ है।

इनका कहना है

‘‘मैं अपने पिता के उपचार के लिए दिल्ली के मेदांता हॉस्पीटल गया था तो आॅपरेशन के लिए लगभग 3 से 4 लाख रूपए खर्चा बताया गया था, लेकिन हमारी स्थिति इतने पैसे खर्च करने की नहीं थी। इसके बाद हम एम्स पहुंचे तो वहां भी हमें एक वर्ष की वेटिंग दे दी गई। लेकिन डॉ. अवधेश शुक्ला ने जयारोग्य में ही आॅपरेशन कर मेरे पिता को ठीक कर दिया, जिसमें सिर्फ 14 से 15 हजार रूपए ही खर्चा आया है।’’

दिलीप शर्मा, मरीज का पुत्र

Updated : 2017-08-06T05:30:00+05:30
Next Story
Share it
Top