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दम तोड़ती शहर की स्वास्थ्य सेवाएं, चिंता स्मार्ट सिटी की

दम तोड़ती शहर की स्वास्थ्य सेवाएं, चिंता स्मार्ट सिटी की
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शासन के निर्णय पर टिका एक हजार बिस्तर वाले अस्पताल का भविष्य
ग्वालियर। शहर को एक तरफ जहां स्मार्ट सिटी की दौड़ में शामिल कर लिया गया है वहीं दूसरी तरफ यहां स्वास्थ्य सेवाएं दम तोड़ती नजर आ रही हैं। जयारोग्य चिकित्सालय में प्रस्तावित एक हजार पलंग वाला अस्पताल भवन विगत 12 वर्षों से सिर्फ फाइलों में ही दबा पड़ा है, लेकिन आज तक इस अस्पताल का निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है और न ही अस्पताल को ग्वालियर पॉटरीज की जमीन हाथ लगी है, जबकि ग्वालियर पॉटरीज की जमीन के लिए पैसा उद्योग विभाग को जमा किया जा चुका है फिर भी जमीन सिर्फ आरक्षित हो सकी है, लेकिन आवंटन अब तक नहीं हुआ है। सालों से बंद पड़ी ग्वालियर पॉटरीज की भूमि पर अब स्मार्ट सिटी कंपनी की निगाहें जम गई हैं। कंपनी की नजर में यह स्थान स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत काम शुरू करने व फंड जुटाने के लिए सबसे बेहतर जगह है और नगर निगम ने जमीन की मांग भी कर दी है। इस जमीन का उपयोग नगर निगम व्यवसाय करने के लिए करेगा, जिससे अब यह सवाल खड़े हो रहे हैं कि शहर को स्मार्ट बनाने के लिए तो शासन, प्रशासन स्तर पर कई प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन जब शहर के लोग स्वस्थ ही नहीं होंगे, उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सेवा नहीं मिलेगी तो शहर को स्मार्ट बनाने क्या फायदा?

जानकारी के अनुसार अंचल के सबसे बड़े अस्पताल जयारोग्य चिकित्सालय में एक हजार बिस्तर का अस्पताल बनना है, लेकिन ये प्रोजेक्ट वर्ष 2005 से फाइलों में अटका हुआ है। करीब 264 करोड़ के इस प्रोजेक्ट में पांच ब्लॉकों का निर्माण प्रस्तावित है। इनमें मेडिसिन विभाग, सर्जरी, स्किन, ईएनटी, मनोरोग, आथोर्पेडिक सहित लेक्चर थिएटर का निर्माण किया जाना है। यह अस्पताल भवन जयारोग्य अस्पताल परिसर में बने आवास पॉटरीज की 35 एकड़ भूमि पर बनना है। इसके लिए गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय ने करीब 16 लाख रुपए की राशि उद्योग विभाग को जमा भी करवा दी थी, जिस पर उद्योग विभाग ने इस जमीन को आरक्षित तो कर दिया है, लेकिन आज तक महाविद्यालय के नाम पर आवंटन नहीं किया गया है। इसी बीच अब नगर निगम ने स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के लिए पॉटरीज की जमीन की मांग कर दी है। अब शासन के निर्णय पर हजार बिस्तर के अस्पताल का भविष्य निर्भर है।

सात अप्रैल को भेजा जा चुका है प्रस्ताव

पॉटरीज की 35 एकड़ भूमि के लिए स्मार्ट सिटी कम्पनी के सीईओ ने यहां ग्वालियर हेवीटेड एंड ट्रेड सेंटर बनाने के लिए जिला कलेक्टर को पत्र भेज दिया है क्योंकि उक्त भूमि सरकारी होने पर स्मार्ट सिटी कंपनी के नाम आवंटित होने में भी ज्यादा अड़चनें नहीं आएंगी। ग्वालियर स्मार्ट सिटी प्रपोजल में पॉटरीज की 35 एकड़ भूमि पर हेवीटेड एंड ट्रेड सेंटर बनाए जाने का प्रस्ताव पहले शामिल कर लिया गया था, लेकिन यह प्रस्ताव कागजी अधिक था। कारण यह है कि उक्त भूमि शासकीय है। ऐसे में जब तक यह भूमि स्मार्ट सिटी कंपनी को नहीं मिलती है, तब तक इस स्थान पर बनाए गए प्रस्तावों के कोई मायने नहीं हैं। इसी अड़चन को दूर करने के लिए अब कंपनी सीईओ विदिशा मुखर्जी ग्वालियर पॉटरीज की भूमि के आवंटन के प्रयास में जुट गई हैं और उन्होंने इस जमीन को लेने का प्रस्ताव बनाकर सात अप्रैल को जिलाधीश डॉ. संजय गोयल को भेज दिया है।

कंपनी को होगी आय

कंपनी की योजना है कि वह इस भूमि पर कुछ इस तरह के प्रोजेक्ट लेकर आए, जिससे कंपनी को आय भी हो और स्मार्ट सिटी का काम भी दिखे। कम्पनी ने जो प्रस्ताव तैयार किया है, उसमें छोटा हॉस्पीटल, स्कूल, कॉलेज, एम्फीथिएटर, मकान, इंटरटेनमेंट सेंटर बनाने की प्लानिंग की जा रही है। यह सब इस तरह विकसित किया जाएगा, जिसमें कंपनी को अन्य विकास कार्यों के लिए एक मोटी रकम मिल सके। साथ ही कंपनी फायदा प्राप्त कर आगे के प्रोजेक्टों पर पूरा ध्यान फोकस कर सके।

जयारोग्य में सुपर स्पेशिलिटी अस्पताल का निर्माण होने वाला है पूरा

केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा एवं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विगत वर्ष जयारोग्य अस्पताल में 150 करोड़ की लागत से बनने वाले सुपर स्पेशलिटी अस्पताल की आधारशिला रखी थी, जिसका निर्माण कार्य एक वर्ष में पूरा करना था। इसी के चलते इस अस्पताल का कार्य तेजी से चल रहा है। इतना ही नहीं विगत दिवस प्रभारी मंत्री गौरीशंकर बिसेन की अध्यक्षता एवं केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर की विशेष उपस्थिति में महाविद्यालय के अधिष्ठाता सहित अन्य अधिकारियों के साथ स्वास्थ्य सेवाओं की एक समीक्षा बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें मंत्री श्री बिसेन ने अस्पताल का निर्माण कार्य कर रही एजेंसी को नवम्बर माह तक अस्पताल का कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए थे। बैठक में वर्षों से फाइलों में दवे एक हजार विस्तर के अस्पताल का विषय आया तो मंत्रद्वय इससे बचते हुए दिखे। ससे साफ है कि एक हजार विस्तर वाले अस्पताल की न तो किसी को चिंता है और न ही कोई चर्चा करना चाहता है।

Updated : 2017-05-18T05:30:00+05:30
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