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बॉयो टॉयलेट बना जी का जंजाल

बॉयो टॉयलेट बना जी का जंजाल
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-ट्रेन में दुर्गंध से दम घुटने की सर्वाधिक शिकायतें
-कैग की रिपोर्ट में रेलवे की व्यवस्था की खुली कलई
नई दिल्ली। अभी तक ट्रेन में खान-पान, सफाई को लेकर ही रेलवे कठघरे में खड़ा किया जाता था, लेकिन अब टॉयलेट के मसले पर भी रेलवे की खिचाई शुरू हो गई है। नियंत्रक एव महालेखा परीक्षक (कैग)की रिपोर्ट में ऐसे तथ्य सामने लाए गए, जो रेलवे की व्यवस्था पर सवाल खड़ा करते हैं। लगभग दो लाख रेल यात्रियों द्वारा टॉयलेट में दुर्गंध की शिकायत की है, वहीं 21 हजार से अधिक यात्रियों ने टॉयलेट से मग गायब रहने की शिकायत दर्ज कराई है।

संसद में मंगलवार को नियंत्रक एव महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट पेश की गई, उसमें रेलवे व्यवस्था पर सवालिया निशान लगे थे। रिपोर्ट में कहा गया कि ट्रेनों में लगे बॉयो टॉयलेट चोक हो रहे हैं, जिससे भयानक दुर्गंध आती है। लगभग दो लाख रेल यात्रियों ने दम घुटने की शिकायतें की हैं। बॉयो टॉयलेट में पानी के अभाव में यात्री बोतल लेकर शौच करने जाते हैं। कैग ने 2014-15 एवं 2016-17 की आॅडिट रिर्पोट में कहा कि बॉयो टॉयलेट लगाने में रेलवे बोर्ड ने 17 जोनल रेलवे के समक्ष लक्ष्य नहीं रखा जिस कारण उनको लगाने का काम धीमी गति से चल रहा है। रेलवे 613 ट्रेनों का रख रखाव करती है, इसमें 163 में बॉयो टॉयलेट नहीं थी। 453 ट्रेनों में 25,080 बॉयो टॉयलेट हैं इसमें एक लाख 99 हजार 689 यात्रियों ने बॉयो टॉयलेट को लेकर कई प्रकार की शिकायतें दर्ज कराई। कैग व रेलवे की संयुक्त टीम ने अक्टूूबर 2016 से जनवरी 2107 के दौरान कानपुर-बांद्रा सुपरफास्ट, हावड़ा-यशवंतपुर एक्सप्रेस, आगरा-लखनऊ इंटरसिटी, गुवाहाटी-ओखा एक्सप्रेस, रामेश्वर-भुवनेश्वर एक्सप्रेस ट्रेनों की जांच की थी। इसमें यात्रियों से फीडबैक यह शिकायतें सामने आईं। कैग ने अपनी रिर्पोट में कहा कि सर्वाधिक 102792 शिकायतें दम घुटने की मिली हैं। इसके पश्चात 16,375 शिकायतें बॉयो टॉयलेट से आती गंध की थी। 21181 शिकायतें मग गायब होने की थी। इसलिए यात्री पानी की बोलत लेकर शौच करने जाते हैं। उचित रख रखाव के अभाव व कूड़दान नहीं होने के कारण बोतल व अन्य कचरा लोगों के टॉयलेट में डालने से वह चोक हो जाते हैं।

-कैग ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि जनवरी 2011 से अप्रैल 2012 के दौरान परीक्षण के आधार पर सात ट्रेनों में विभिन्न प्रकार के बॉयो टॉयलेट लगाए गए थे। लेकिन परीक्षण परिणामों की समीक्षा के पहले रेलवे ने 10,000 बॉयो टॉयलेट लगाने का फैसला कर लिया।

-रेलवे के प्रशिक्षण देने के आदेश के बाद अब तक केवल 36.62 फीसदी पर्यवेक्षण व 23.21 प्रतिशत गैर पर्यवेक्षण कर्मचारियों को बॉयो टॉयलेट के रख रखाव का प्रशिक्षण दिया गया था।

-विभिन्न जोनल रेलवे की कार्यशालाओं में बॉयो टैंकों व वैक्टीरिया इनोकुलुम के लिए पर्याप्त भंडारण की उपलब्धता और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं। वैक्टीरिया इनोकुलुम की आपूर्ति गुणवत्ता भी एक समस्या थी।

Updated : 2017-12-20T05:30:00+05:30
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