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पाकिस्तान का टूट गया ख्वाब

आतंकवादियों को पालने-पोसने, फंड और हथियार मुहैया कराने के खुलासे के बाद अमेरिका में भी पाकिस्तान का चेहरा पूरी तरह बेनकाब हो गया है। एशिया-प्रशांत मामलों की संसदीय उप-समिति के वरिष्ठ सदस्य ब्रेड शर्मन ने पाकिस्तान को आतंकवाद की फैक्टरी चलाने पर चेताया है। उनका कहना है कि पाकिस्तान इसी नीति पर चलता रहा तो देश के टुकड़े होना तय है। शर्मन ने पाकिस्तान को 1971 का युद्ध भी याद दिलाया है। उन्होंने नवाज सरकार की समृद्ध सिंधी संस्कृति को व्यवस्थित तरीके से कुचलने की भी तीखी आलोचना की है। दुनिया में अलग-थलग पड़ते जा रहे पाकिस्तान की हुकूमत अब अपने मुल्क में घिरती जा रही है। भारत में मोदी सरकार को पाकिस्तान के खिलाफ जारी मुहिम को जन समर्थन के साथ अन्य दलों का भी साथ मिला है।

भा रतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह ने केरल के कोझिकोड में आयोजित राष्ट्रीय परिषद अधिवेशन के समापन में कहा था कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की उपलब्धियों से मेरा सीना गज-गज फूल जाता है। प्रधानमंत्री मोदी के साथ ही उन्होंने पाकिस्तान के हर नापाक मंसूबों को पूरी तरह नाकाम करने का भी ऐलान किया है। भाजपा अध्यक्ष की बात एकदम सही साबित हो रही है। प्रधानमंत्री मोदी की पाकिस्तान को घेरने और दुनिया भर में अलग-थलग करने की नीति के बाद भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के संयुक्त राष्ट्र महासभा के 71वें सत्र में ओजस्वी, तर्कपूर्ण, धारदार और पाकिस्तान की नापाक हरकतों का खुलासा करने वाले संबोधन से वास्तव में देश के हर नागरिक का सीना तन गया है। भाजपा के धुर विरोधी नेताओं ने भी भारत की विदेश मंत्री की खुले तौर पर प्रशंसा की है। इतना ही नहीं मोदी सरकार की पाकिस्तान के खिलाफ आतंकवाद विरोधी मुहिम के बाद पाकिस्तान में चिंता व्याप्त हो गई है।

पाकिस्तानी मीडिया में यह चिंता जताई जा रही है कि पाकिस्तान भारत की मुहिम के बाद दुनिया में अलग-थलग पड़ गया है। पाकिस्तान हुकूमत को नए दोस्त तलाशने की सलाह दी जा रही है। पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह ने भी माना है कि भारत सरकार के प्रयासों के कारण पाकिस्तान का साथ देने वाले देशों की संख्या बहुत कम हो गई है। इतना ही नहीं पाकिस्तान के पुराने दोस्त चीन ने भी युद्ध होने के हालातों में साथ न देने का ऐलान कर दिया है। चीनी विदेश मंत्रालय की तरफ से कहा गया है कि पाकिस्तान और भारत दोनों पड़ोसी और दोस्त के रूप में हमें उम्मीद है कि दोनों देश अपने मतभेदों का समाधान वार्ता और विचार-विमर्श, स्थिति को नियंत्रित और प्रबंध कर करेंगे। चीन के विदेश मंत्रालय की तरफ से यह बयान पाकिस्तान के इस दावे के बाद दिया गया कि युद्ध के दौरान चीन मदद करेगा।


आतंकवादियों को पालने-पोसने, फंड और हथियार मुहैया कराने के खुलासे के बाद अमेरिका में भी पाकिस्तान का चेहरा पूरी तरह बेनकाब हो गया है। एशिया-प्रशांत मामलों की संसदीय उप-समिति के वरिष्ठ सदस्य ब्रेड शर्मन ने पाकिस्तान को आतंकवाद की फैक्टरी चलाने पर चेताया है। उनका कहना है कि पाकिस्तान इसी नीति पर चलता रहा तो देश के टुकड़े होना तय है। शर्मन ने पाकिस्तान को 1971 का युद्ध भी याद दिलाया है। उन्होंने नवाज सरकार की समृद्ध सिंधी संस्कृति को व्यवस्थित तरीके से कुचलने की भी तीखी आलोचना की है। दुनिया में अलग-थलग पड़ते जा रहे पाकिस्तान की हुकूमत अब अपने मुल्क में घिरती जा रही है। भारत में मोदी सरकार को पाकिस्तान के खिलाफ जारी मुहिम को जन समर्थन के साथ अन्य दलों का भी साथ मिला है। पाकिस्तान की नवाज शरीफ सरकार पर हमले तेज हो गए हैं। पाकिस्तान के एक अंग्रेजी अखबार के संपादकीय में कहा गया है कि सभी दक्षिण एशियाई देश, नेपाल, श्रीलंका, बांग्लादेश और अफगानिस्तान भारत के पक्ष में हैं, जबकि ईरान तटस्थ बना हुआ है।

पाकिस्तानी हुकूमत को मुस्लिम देशों से मदद लेने की सलाह दी गई है। पाकिस्तानी मीडिया में यह धारणा बन गई है कि कश्मीर के मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र महासभा में मिली करारी हार को अब पाकिस्तान ने भी मान लिया है। उड़ी हमले से पहले अंतरराष्ट्रीय मीडिया में कश्मीर को लेकर हो रही चर्चा उड़ी हमले के बाद बंद हो गई और पाकिस्तान के शह पर हुए हमले की खबरों को प्रमुखता मिली। पाकिस्तान की संसद में भी नवाज शरीफ सरकार की नीतियों को लेकर सवाल उठाए गए थे। सिंध यूनाइटेड पार्टी के अध्यक्ष सैय्यद जलाल महमूद शाह ने भी कहा है कि भारत और अफगानिस्तान के आंतरिक मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप से क्षेत्र में सुरक्षा संबंधी समस्या उत्पन्न हो गई है। उनका यह भी कहना है कि पाकिस्तान ऐसी गतिविधियों को रोक कर शांति स्थापित कर सकता है। यही बात भारत कह रहा है कि पाकिस्तान आतंकवादियों को शह देना बंद करे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तो खुद पाकिस्तान की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाया था।


प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के समय पाकिस्तान समेत सभी पड़ोसी देशों को न्योता देकर नरेंद्र मोदी ने यह जता दिया था कि भारत पड़ोसी देशों से बेहतर संबंध बनाना चाहता था। पाकिस्तान की लगातार नापाक हरकतों के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सिंधु जल समझौते को लेकर हुई बैठक में सख्त लहजे में कहा कि खून और पानी एक साथ नहीं बहते। उड़ी हमले में हमारे 18 जवानों के शहीद होने के बाद पाकिस्तान के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की बढ़ती मांग के मद्देनजर ही सिंधु नदी समझौता रद्द करने पर विचार किया जा रहा है। प्रधानमंत्री के बाद विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने संयुक्त राष्ट्र की महासभा में पाकिस्तान को पूरी तरह बेनकाब कर दिया। सुषमा स्वराज के संबोधन को पूरे देश ने मंत्रमुग्ध होकर सुना। भारत की विदेश मंत्री का पाकिस्तान को करारा जवाब देने के संबोधन को सुनने के लिए लोग टीवी देखने के लिए बैठे रहे। उनकी इस नसीहत पर जिनके घर शीशे के हों, उन्हें दूसरों के घर पत्थर नहीं फेंकने चाहिए, पाकिस्तान में भी व्यापक प्रतिक्रिया हुई है। उनका पाकिस्तान को यह दो टूक जवाब कि जम्मू-कश्मीर हमारा है और हमारा ही रहेगा, पाकिस्तान की हुकूमत सुन्न पड़ गई है। सुषमा की इस अपील पर कि जो देश आतंक नहीं रोक पा रहे हैं उन्हें अलग-थलग कर देना चाहिए। ऐसे देश को दुनिया के साथ रहने का कोई अधिकार नहीं होना चाहिए पर भी सभी देशों का ध्यान गया है। पहले से ही आतंकवाद को बढ़ावा देने के कारण पड़ोसी देशों के साथ छोडऩे के बाद अब पाकिस्तान के खिलाफ आवाज बुलंद होती जा रही है। पाकिस्तान को बलूचिस्तान के मुद्दे पर भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय से लताड़ पड़ रही है। यूरोपियन यूनियन ने साफतौर कह दिया है कि यदि पाकिस्तान ने बलूचिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघन के मामले नहीं रोके तो उस पर प्रतिबंध लगाने में वह देर नहीं लगाएगा। यूनियन के उपाध्यक्ष रिजार्ड सी ने पाकिस्तान पर आर्थिक और राजनीतिक प्रतिबंध लगाने की चेतावनी भी दी है।

संय़ुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान पीएम शरीफ ने कुछ मुस्लिम देशों के राष्ट्राध्यक्षों से भी अलग से मुलाकात कर कश्मीर के मुद्दे पर उनका सहयोग मांगा था। इसके बावजूद पाकिस्तान को कोई साथ देने वाला नहीं मिल रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के सख्त तेवरों के मद्देनजर ही सुषमा के भाषण से पहले भारत में पाकिस्तान के हाई कमिश्नर अब्दुल बासित ने कहा था कि जंग कोई हल नहीं है। कश्मीरी अगर भारत में खुश हैं तो उन्हें वहीं रहने दो। बासित यह बात तो करते हैं पर साथ ही कश्मीरियों को विकल्प चुनने की सलाह भी दे रहे हैं। कश्मीरी तो भारत में खुश हैं पहले पाकिस्तान को गुलाम कश्मीर की हालत देखनी चाहिए। बहते खून के धब्बे दामन पर न रह जाएं, इसके लिए पानी बहाने की जरूरत होती है। यह भी जरूरी है खून बहाने वालों की फसल न लहराए, इसके लिए पानी भी बन्द कराना पड़े तो किया जाएगा। अब तो बस विश्वास के साथ कुछ और धैर्य रखने की जरूरत है। वैसे अब जंग पहले की तरह नहीं लड़े जाते। जो आतंकवाद को बढ़ावा दे रहे हैं, उनका विश्वास जंग में हो सकता है। पाकिस्तान को यह पता है कि हमारी सैन्य ताकत क्या है।

पाकिस्तान के साथ असली जंग यही है कि उसका दुनिया भर में हुक्का-पानी बंद हो जाए, और इस दिशा में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। हमारी सिंहनी सुषमा स्वराज की ललकार ने पाकिस्तान को पूरी तरह घेर दिया है।
लेखक भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री हैं।

Updated : 2016-09-29T05:30:00+05:30
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