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राजनाथ की खरी-खरी

राजनाथ की खरी-खरी

सार्क देशों के गृह मंत्रियों के सम्मेलन में पाकिस्तान को खरी-खरी सुनाकर लौट आए। सार्क देशों के सम्मेलन में राजनाथ ने जो कहा, वो भारत शुरू से ही कहता आ रहा है। लेकिन इस्लामाबाद में राजनाथ ने जो कहा वो सही समय, उचित मंच और सही अवसर था। पठानकोट एयरबेस पर हमले के बाद से दोनों देशों के रिश्तों में तनाव आ गया था।

आतंकी बुरहान वानी को शहीद बताने की पाकिस्तान की नीति ने इन रिश्तों मेें और खटास ला दी। बुरहान वानी की मौत को शहादत बताने वाले पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए ये जरूरी था कि पाकिस्तान को उचित मंच पर जवाब दिया जाए। पाकिस्तान को आईना दिखाने के लिए यह जरूरी भी था कि सार्क देशों के सम्मेलन में पाकिस्तान के दिखावे और उसकी सच्चाई को सामने लाया जाए। पाकिस्तान की शह में पल रहे आतंकी संगठनों के विरोध के बावजूद गृहमंत्री की इस्लामाबाद यात्रा सार्क देशों के बीच यह संदेश देने में कामयाब रही कि दोस्ती की आड़ में पीठ में छुरा घोंपने की नीति भारत को बर्दाश्त नहीं है। दोनों देशों के बीच पिछले दिनों बढ़े तनाव के बीच राजनाथ की यात्रा को लेकर अंतिम समय तक संशय की स्थिति बनी रही। लेकिन बिगड़े पाक को सबक सिखाने के लिए ये जरूरी था कि भारत दोस्ती का हाथ बढ़ाने में पीछे नहीं है। सार्क सम्मेलन में दोनों देशों के बीच तनाव को देखते हुए द्विपक्षीय बैठक का कोई कार्यक्रम नहीं रखा गया। प्रधानमंत्री कार्यालय, गृह और विदेश मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों के बीच बुधवार रात लंबे विचार-विमर्श के बाद राजनाथ के इस बैठक में शामिल होने का निर्णय लिया गया था। केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को कड़े शब्दों में आतंकवाद को लेकर नसीहत देते हुए कहा कि आतंकवाद सिर्फ आतंकवाद होता है, इसलिए आतंकवादियों को शहीद न बताएं।

राजनाथ ने कहा कि आतंकवाद और आतंकवादियों की केवल निंदा करना पर्याप्त नहीं है। कोई भी अच्छा आतंकवादी या बुरा आतंकवादी नहीं होता आतंकवाद सिर्फ आतंकवाद होता है। उन्होंने पाकिस्तान से आतंकी संगठनों पर कार्रवाई करने को भी कहा। पाकिस्तान के दौरे पर गए राजनाथ की यात्रा में उनका पाकिस्तानी समकक्ष चौधरी निसार अली का भोज ठुकराना भी चर्चाओं में रहा। वैसे पाकिस्तान से ये उम्मीद करना बेकार है कि वह आतंकवादियों को पनाह देने और आतंकी संगठनों पर लगाम कसने के रास्ते पर चलेगा, हां सार्क देश भारत के प्रयासों की गंभीरता को न सिर्फ समझेंगे बल्कि आतंकवाद के खिलाफ भारत के अभियान को समर्थन देंगे।

Updated : 6 Aug 2016 12:00 AM GMT
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