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पानी के मीटर लगाने पर निगम ने बर्बाद किए 24.46 लाख

पानी के मीटर लगाने पर निगम ने बर्बाद किए 24.46 लाख
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आज भी तय प्रभार के आधार पर ही की जा रही है वसूली

ग्वालियर, वरिष्ठ संवाददाता। नगर निगम द्वारा गैर घरेलू उपभोक्ताओं से पानी की खपत के अनुसार वसूली के लिए लगाए जाने वाले मीटरों पर 24.46 लाख रुपए व्यर्थ में बर्बाद कर दिए गए। इस योजना के तहत जितने भी मीटर लगाए गए उनसे वसूली पानी की खपत के आधार पर न करते हुए आज भी पूर्व निर्धारित राशि के आधार पर ही की जा रही है।

उल्लेखनीय है कि नगर निगम ने नवम्बर 2006 में गैर घरेलू उपभोक्ताओं से पानी की वास्तविक खपत के आधार पर बिल वसूली की मंशा से 1,088 मीटरों की आपूर्ति के साथ ही उन्हें लगाने और परीक्षण के साथ उन्हें काम में लाने के लिए एक निविदा आमंत्रित की थी। मार्च 2007 में इसके आधार पर बोली लगाने वाली फर्म के साथ इस काम के लिए 42.64 लाख में अनुबंध किया गया। इसके अनुसार यह काम उक्त फर्म को एक वर्ष में पूरा करना था।

नहीं लगे समय पर मीटर

इसी बीच मीटर बॉक्स की कीमत घटने पर निगम ने इस परियोजना की लागत को जुलाई 2009 में घटाकर 35.47 लाख रुपए करते हुए काम पूरा करने की निर्धारित तिथि भी एक वर्ष बढ़ाते हुए जुलाई 2010 कर दी। उल्लेखनीय है कि मप्र में नगरीय जल आपूर्ति एवं पर्यावरण सुधार परियोजना के अन्तर्गत सभी गैर घरेलू एवं औद्योगिक जल कनेक्शनों में वर्ष 2009 तक मीटर लगाए जाने थे और इस पर होने वाला खर्च एशियन विकास बैंक से प्राप्त ऋण से होना था। लेकिन महालेखाकर की रिपोर्ट में हुए खुलासे के अनुसार ग्वालियर नगर निगम में इसके लिए ठेका लेने वाली फर्म ने दिसम्बर 2010 तक मात्र 943 मीटर ही लगाए गए। इस दौरान जहां 145 मीटर नहीं लगाए गए वहीं जो मीटर लगाए गए उनका परीक्षण और उपयोग में लाने का काम भी शुरू नहीं कराया गया। इसके बावजूद नगर निगम ने ठेकेदार को दिसम्बर 2012 में 24.46 लाख रुपए का अंतिम भुग्तान भी कर दिया।

वास्तविक खपत का प्रस्ताव पारित किया
जानकारी के अनुसार जल की वास्तविक खपत के आधार पर वसूली के लिए नगर निगम ने वर्ष 2011 मेें प्रस्ताव पारित किया, इसके बावजूद वसूली पूर्व के अनुसार तय राशि के आधार पर ही की जाती रही। इस मामले में शासन द्वारा दिसम्बर 2015 में बताया गया कि लगाए गए मीटरों को क्रियाशील रखने और पानी के बिल खपत के आधार पर तैयार करने के आदेश सम्बन्धित क्षेत्रीय इंजीनियरों को दिए गए थे। लेकिन इस आदेश पर अमल नहीं किया गया। कुल मिलाकर मीटर लगाने और उनके आधार पर खपत के अनुसार बिल नहीं जारी किए जाने के कारण निगम की लापरवाही से 24.46 लाख रुपए व्यर्थ में बर्बाद हो गए। वहीं निगम व शासन को लाखों के राजस्व की हानि भी हुई है।

Updated : 2016-07-29T05:30:00+05:30
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