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भारत-अफ्रीका के सम्बन्ध

भारत-अफ्रीका के सम्बन्ध

यूं तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अभी हाल ही में की गई चार अफ्रीकी देशों की यात्रा कई मायनों में महत्वपूर्ण है, लेकिन इसका सबसे अहम् पहलू यह है कि यात्रा के दौरान इस महाद्वीप से सम्बन्धों को गहराई देने की हमारे देश की कोशिशों को एक नया मुकाम हासिल हुआ है। प्रधानमंत्री का यह दौरा मोजाम्बिक से शुरू हुआ और वहां से अफ्रीका तथा तंजानिया होते हुए वह केन्या पहुंचे। इस यात्रा के महत्व को समझने के लिए हाल ही में अफ्रीका से बने सम्बन्धों पर गौर करना जरूरी है।

उल्लेखनीय है कि बीते अक्टूबर माह में नई दिल्ली में तीसरे भारत-अफ्रीका शिखर सम्मेलन का आयोजन हुआ था। जिसमेें सभी 54 अफ्रीकी देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए थे। वहीं पिछले माह राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी घाना, आइवरी कोस्ट और नामीबिया के दौरे पर गए थे तो मई-जून में उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने मोरक्को और ट्यूनीशिया की यात्रा की थी। इसके बाद अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का अफ्रीकी देशों का दौरा हुआ। अर्थात अफ्रीका से निरंतर सम्पर्क का दौर लगातार बना हुआ है। इसके माध्यम से भारत प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध इस महाद्वीप के साथ बेहतर दोस्ताना सम्बन्ध बनाने की पुरजोर कोशिश कर रहा है और प्रधानमंत्री के प्रयासों से इसमें उसे सफलता भी मिलती दिखाई दे रही है, इसे इन सम्बन्धों का आर्थिक पहलू भी कहा जा सकता है। वैसे देखा जाए तो अन्तर्राष्ट्रीय कूटनीति की दृष्टि से भी यह रिश्ता कम अहम् नहीं है। संयुक्त राष्ट्र में अक्सर सभी अफ्रीकी देश एक गुट के रूप में व्यवहार करते हैं। इसके चलते संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थाई सदस्यता की दावेदारी पर जब भी बात होगी तब इन देशों की राय विशेष महत्व रखेगी। गौरतलब है कि बीते माह परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) की सदस्यता के भारत के दावे का दक्षिण अफ्रीका ने समर्थन किया था। इसके बाद प्रिटोरिया में प्रधानमंत्री मोदी ने उसका आभार भी जताया था। दक्षिण अफ्रीका इस महाद्वीप का सबसे दमदार देश है। रक्षा उत्पादन क्षेत्र में उसने काफी उन्नति की है। अत: प्रधानमंत्री का ध्यान यहां अपनी प्रिय ‘मेक इन इण्डिया’ योजना का विवरण देने पर ही रहा। इतना ही नहीं दक्षिणी अफ्रीकी कम्पनियों को उन्होंने भारत में निवेश के लिए भी आमंत्रित किया। कारोबारियों से मिलना और उन्हें भारत में निवेश के फायदे बताना प्रधानमंत्री मोदी की हर विदेश यात्रा का खास पहलू होता है। अफ्रीकी देशों की यात्रा भी इसका अपवाद नहीं थी।

इसी दौरान मोजाम्बिक से इस वित्त वर्ष में एक लाख टन दालों के आयात का करार हुआ। वहीं 2020-21 तक यह आयात बढ़ कर दो लाख टन तक पहुंच सकता है। इससे दालों की कीमतों को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा का एक और अहम पहलू यह है कि चारों देश आतंकवाद से एकजुट होने की बात पर सहमत हो गए। इस तरह उन्होंने भारत-अफ्रीकी सम्बन्धों को बहुआयामी रूप दिया। इससे इन सम्बन्धों के और प्रगाढ़ होने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।

Updated : 2016-07-15T05:30:00+05:30
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