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बाबरी और गोधरा कांड युवाओं को आतंकी बनाने के जिम्मेदार

बाबरी और गोधरा कांड युवाओं को आतंकी बनाने के जिम्मेदार

बाबरी और गोधरा कांड युवाओं को आतंकी बनाने के जिम्मेदार


नई दिल्ली | दिल्ली पुलिस के अनुसार आतंकी संगठन अलकायदा में भारतीय युवाओं के शामिल होने के पीछे 1992 में हुए बाबरी मस्जिद विध्वंस और 2002 के गोधरा दंगे जिम्मेदार हैं। अपनी जांच में पुलिस ने पाया कि पुलिस की पकड़ में आये सभी आरोपी सोशल मीडिया और मोबाइल फोनों के माध्यम से पाकिस्तान, ईरान और तुर्की के आतंकवादियों के संपर्क में थे।

दरअसल दिसंबर 2015 से जनवरी 2016 के बीच देश के विभिन्न हिस्सों से गिरफ्तार किये गए 17 आरोपियों के खिलाफ अनलॉफुल एक्टिविटिज प्रिवेंशन एक्ट (यूएपीए) की धारा 18 (षड्यंत्र के लिए सजा), धारा 18-बी (आतंकी गतिविधि के लिए किसी भी व्यक्ति की भर्ती करने के लिए सजा) और धारा 20 (आतंकी संगठन का सदस्य बनने के लिए सजा) के तहत आरोप लगाए गए हैं। आरोपपत्र में पुलिस ने 17 आरोपियों के नाम दिए हैं जिनमें से 12 फरार हैं। फरार आरोपियों में सैयद अख्तर, सैनुअल हक, मोहम्मद शरजील अख्तर, उस्मान, मोहम्मद रेहान, अबु सूफियां, सैयद मोहम्मद अर्शियां, सैयद मोहम्मद जीशान अली, सबील अहमद, मोहम्मद शाहिद फैज़ल, फरहतुल्ला घोरी और मोहम्मद उमर हैं।

दिल्ली की एक अदालत में 17 आरोपियों के खिलाफ दायर आरोपपत्र में पुलिस ने कहा कि अयोध्या में बाबरी मस्जिद विध्वंस और गुजरात दंगों के बाद कई भारतीय युवक अलकायदा में शामिल होने की इच्छा से पाकिस्तान गए और जमात उद दावा प्रमुख हाफिज सईद, लश्कर ए तैयबा प्रमुख जकी उर रहमान लखवी तथा अन्य दुर्दान्त आतंकियों से मिले। पुलिस ने अदालत को बताया कि अब यह लोग अलकायदा का भारतीय उपमहाद्वीप में आधार (एक्यूआईएस) बनाने में जुटे हुए हैं।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रीतेश सिंह के समक्ष आरोपपत्र में कहा गया है कि भारत में मुसलमानों पर कथित अत्याचार, गोधरा और बाबरी मस्जिद मुद्दों पर चर्चा करने के लिए गिरफ्तार आरोपी सईद अंजार शाह एक फरार आरोपी मोहम्मद उमर से मिला। उमर उसके जिहादी विचारों और भाषणों से बहुत प्रभावित हुआ तथा खुद को जिहाद के लिए समर्पित कर दिया। साथ ही उसने पाकिस्तान से हथियारों और गोलाबारूद का प्रशिक्षण लेने की भी इच्छा जताई। वह पाकिस्तान से अपनी गतिविधियां संचालित करने लगा।

पुलिस ने कहा कि आरोपी अब्दुल रहमान ने पाकिस्तानी उग्रवादियों सलीम, मंसूर तथा सज्जाद को भारत में सुरक्षित पनाह दी। सलीम, मंसूर और सज्जाद जैश ए मोहम्मद के सदस्य थे और वर्ष 2001 में उत्तर प्रदेश में गोलीबारी में मारे गए थे। आरोपपत्र में दावा किया गया है कि यह तीनों पाकिस्तानी उग्रवादी बाबरी मस्जिद विध्वंस का बदला लेने के लिए भारत आए थे और उनकी योजना अयोध्या में राम मंदिर पर हमला करने की थी।

जांच एजेंसियों का आरोप है कि अलकायदा भारत में अपना आधार बनाने के लिए युवाओं को लुभाने की कोशिश कर रहा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों के कुछ युवक तो भारत छोड़ कर पाकिस्तान चले गए तथा उसके कैडर में शामिल हो गए। इसके साथ दावा किया गया है आतंकी गुट का एक मॉड्यूल उत्तर प्रदेश के संभल जिले में सक्रिय है।

Updated : 2016-06-12T05:30:00+05:30
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