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दुनियाभर में खूब जमाई धाक

दुनियाभर में खूब जमाई धाक
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मोदी सरकार के दो साल

*प्रमोद पचौरी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आजकल ईरान दौरे पर हैं। स्वदेश लौटने से पहले वे सामरिक मुद्दों पर चर्चा करेंगे और भारत-ईरान के बीच संबंधों का एक और नया अध्याय जोड़ेंगे। कहने को तो मोदी सरकार की यह महज दो साल की छोटी सी यात्रा है लेकिन इतने अल्प समय में उन्होंने विश्व पटल पर भारत की छाप छोड़ दी। इसे उनकी कार्यशैली का कमाल कहें या उनकी दृढ़ इच्छा शक्ति। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से लेकर विश्व के सभी बड़े नेताओं की जुबान पर मोदी ही मोदी है। 21 जून को विश्व योग दिवस घोषित करवाकर मोदी ने सभी देशों को शीर्षासन करवा दिया।

भारत के लिए यह उपलब्धि उसके विश्वगुरु बनने की दिशा में एक नायाब कदम है। प्रधानमंत्री विदेशी यात्राओं को खासा तवज्जो दे रहे हैं। इसके लिए उन्होंने खुद को ही मोर्चे पर लगाया है। अमेरिका से लेकर रूस, चीन, इंगलेंड, आस्ट्रेलिया, जापान, फ्रांस, जर्मन सहित दर्जनों देशों की यात्रा कर प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की धमक व चमक बनाई। युवाओं को उद्यमी बनाने की इच्छाशक्ति लिए वे संपन्न राष्ट्रों के पूंजीपतियों से भारत में निवेश करने की अपील कर रहे हैं। मोदी सरकार की विदेश नीति का मुख्य उद्देश्य पड़ौसी राष्ट्रों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधों को नए सिरे से विस्तार देने के साथ ही विकसित देशों के साथ समानता का दर्जा हासिल करना है। अपने शपथ ग्रहण समारोह में पड़ौसी देशों के प्रतिनिधियों को बुलाकर उन्होंने समूचे एशिया में यह संदेश दिया कि भारत दक्षिण एशिया में बिग ब्रदर नहीं बल्कि सहगामी राष्ट्र के तौर पर आगे बढऩे को तत्पर है। दूसरी ओर अमेरिका व यूरोपीय देशों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संबंधों का नया अध्याय जोड़ते हुए संयुक्त राष्ट्रसंघ में स्थायी सदस्य बनने की पैरवी कर दी है। हालांकि चीन इसका सबसे ज्यादा विरोध कर रहा है पर दुनिया के ज्यादातर शक्ति संपन्न राष्ट्र भारत के हिमायती बनकर उभरे हैं। मोदी जिन-जिन देशों में गए वहां की जनता से लेकर राष्ट्राध्यक्षों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। उनकी शारीरिक भाषा से लेकर आत्मविश्वास व कार्यशैली लोगों को खूब भाती और उनसे मिलने, बात करने के लिए लोग आतुर हो जाते। इनमें खासकर अप्रवासी भारतीय होते हैं जो स्वदेश से आए किसी चमत्कारी नेता में सदी के नायक की छवि देखकर उनसे मिलने के लिए उमड़ पड़ते हैं।

इस जिज्ञासा के साथ कि यह कैसा नायक है जिसने देश की राजनीति ही बदल कर रख दी। विश्व स्तरीय नेता ओबामा से लेकर पुतिन, आदि सब के सब मोदी की अद्भुत कार्यक्षमता के आगे नतमस्तक हो गए। कथित तौर पर बिना किसी पूर्व योजना के पाकिस्तान भी पहुंच गए। ओबामा के रात्रिभोज में नवरात्र व्रत के साथ शामिल होने का इतिहास रचा तो ब्रिटेन की महारानी के साथ भोजन कर आए। हर देश में उनकी चर्चित सभाएं हुईं। इस दौरान वे स्थायी भाव के साथ कांग्रेस के 65 साला शासन की खूब आलोचना भी करते रहे। इन विदेश यात्राओं के दौरान भाजपा और मोदी सरकार ने इसे 'न भूतो न भविष्यति'के अंदाज में पेश किया कि हम दुनिया में भारत की नई पहचान बना रहे हैं। शुरुआती दौर में ऐसा माना भी गया कि मोदी के ताबड़तोड़ दौरों और विदेशों में बड़ी-बड़ी भारतीय सभाओं का अपना खास मतलब हो सकता है। चीनी राष्ट्रपति के साथ झूला झूलना या अमेरिकी राष्ष्ट्रति के लिए प्रेमपूर्वक संबोधन 'बराक'भी खासा चर्चित रहा। नवाज शरीफ के घरेलू कार्यक्रम में मोदी की शिरकत से एक दफा कोई भी सोच सकता था कि अब पाकिस्तान से भारत के रिश्ते बेहद मधुर होने वाले हैं।

सबसे पहले वे 'लुक ईस्ट पॉलिसी'को अहमियत देते हुए भूटान गए। उसके बाद नेपाल और जापान की यात्रा की। उन्होंने कुछ ऐसे भी देशों की यात्रा की जहां अभी तक कोई भारतीय प्रधानमंत्री गया ही नहीं था, या दशकों पहले गया था। मोदी ने इजराइल की यात्रा की जहां अब तक कोई भारतीय प्रधानमंत्री नहीं गया था । उन्होंने आयरलैंड की यात्रा की जहां पिछले 60 साल से कोई भारतीय प्रधानमंत्री नहीं गया था। 'अमेरिका के बरक्स देखें तो हम द्विपक्षीय संबंधों को बनाने में कामयाब रहे हैं। ओबामा ने पाकिस्तान द्वारा जैश-ए-मोहम्मद पर कोई कार्रवाई न करने को लेकर उंगली तक नहीं उठाई है। लेकिन इन सब विदेश यात्राओं के चलते हालांकि कुछ मामलों में ठोस समाधान नहीं निकले इसमें आगे और गुंजाइश है जिसके लिए मोदी सरकार प्रयास कर रही है। भारत सरकार द्वारा विदेश में फंसे भारतीय नागरिकों को बचाने के लिए चलाए गए अभियान बेहद सफल रहे। युद्ध और आंतरिक संकट से जूझ रहे यमन में फंसे भारतीयों को बचाने के लिए भारत सरकार ने ऑपरेशन राहत चलाया था। अप्रैल 2015 में सफलतापूर्वक खत्म हुए इस अभियान में 5,600 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला गया। इनमें 4,640 भारतीय नागरिक थे, बाकी 41 देशों के 960 विदेशी नागरिकों को भी भारतीय सैनिकों ने बचाया। युद्धग्रस्त यमन में बड़ी संख्या में भारतीय नर्सें और नागरिक फंसे हुए थे। यह किसी दूसरे देश में चलाया गया अब तक का सबसे बड़ा बचाव अभियान था। विदेश राज्यमंत्री जनरल वीके सिंह की अगुवाई में चले इस अभियान में भारतीय नौसेना, वायुसेना, एयर इंडिया और भारतीय रेल शामिल थीं। इस अभियान की सफलता के चलते सरकार को खूब तारीफ मिली।

मोदी की अप्रत्याशित पाकिस्तान यात्रा के बीच अमेरिका ने पाकिस्तान की सामरिक मदद की और भारत की ओर से एक औपचारिक नाराजगी का प्रदर्शन भर हो सका। नेपाल जैसा देश, जो भारत का अनन्य पड़ोसी है, जो भारत चीन के बीच 'बफर स्टेटÓ की भूमिका निभाता रहा है, उसके साथ हमारे रिश्ते सामरिक दृष्टि से बहुत अच्छे नहीं हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इसे विदेश नीति की कामयाबी के तौर पर नहीं देखा जा सकता। नेपाल से संबंध खराब होने, नेपाल की चीन से नजदीकी बढऩे, पाकिस्तान और श्रीलंका जैसे देशों से संबंधों में उल्लेखनीय सुधार न होने जैसे तथ्यों पर गंभीरता से चिंतन होना चाहिए। विदेश मामलों के जानकारों का कहना है कि पाकिस्तान को लेकर भारत की नीति अधर में लटकी रहती है। कई बार बातचीत होना, फिर टूटना, आतंकवाद के मुकदमों का आगे न बढऩा और एक-दूसरे पर दोषारोपण करते जाना दोनों देशों की नीतिगत अगंभीरता को दिखाता है।

Updated : 2016-05-24T05:30:00+05:30
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