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भाजपा की जीत से कांग्रेस का अस्तित्व संकट में

भाजपा की जीत से कांग्रेस का अस्तित्व संकट में

*जयकृष्ण गौड़

बहुमत के लोकतंत्र में चुनाव के माध्यम से जनता इस सवाल का उत्तर तलाशती है कि कौन सत्ता संभालने के लायक है या नहीं? पांच राज्यों के चुनाव में जहां नेतृत्व की क्षमता, योग्यता और लोकप्रियता का आंकलन हुआ, वहीं क्षेत्रीय क्षत्रपों के बारे में भी जनता ने निर्णय दिया। उत्तर नहीं मिलता कि निर्वाचित व्यक्ति लोकतंत्र और सामाजिक मान्यता की कसौटी पर खरा उतरेगा? कितने ही निर्वाचित सांसद, विधायक ऐसे हंै, जिन्होंने अपराध किये हैं या समाज में उनकी छवि खराब है। कुल मिलाकर चुनाव परिणाम से यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि कौन बुरा और कौन कम बुरा है। व्यक्तिगत सवालों के साथ पार्टी की नीतियां और सिद्धांत भी कसौटी पर रहते हैं। इसके साथ ही पार्टी की संगठन क्षमता भी चुनावों को प्रभावित करती है। जो कांगे्रस देश के आम लोगों का प्रतिनिधित्व करती थी,कांग्रेस के दिग्गज गर्व के साथ कहते थे कि हमारी पार्टी ऐसा मंच है जहां हर विचारधारा और आचरण की विविधता का व्यक्ति राजनीति कर सकता है। सैद्धांतिक कट्टरता और संगठन क्षमता को बढ़ाने की ओर हमारा ध्यान कम रहता है।

आज कांगे्रस की स्थिति का आंकलन करें तो जनता ने कांगे्रस को उस स्थिति में लाकर खड़ा कर दिया है, जहां उसके लिए अस्तित्व को बचाने का संकट पैदा हो गया है। उसकी दुर्गति के कारणों का आंकलन चुनाव में हो जाता है। पांच राज्यों के चुनाव में कांगे्रस की दुर्गति होने के बाद कांगे्रस के ही दिग्गज कांगे्रस के उपचार की सलाह देते हंै। यह स्थिति है कि जिन कारणों से कांगे्रस आईसीयू में है, वे ही उसे सलाह दे रहे हंै। बयानवीर नेता दिग्विजय सिंह, जिनके बयानों से कांगे्रस की छवि खराब हुई, उनकी राय है कि कांगे्रस की सर्जरी होना चाहिए। बुजुर्ग नेता नटवर सिंह, जिन्हें कांगे्रस ने अलग-थलग कर दिया, वे भी इसी प्रकार की बात कहते हंै, जबकि कांगे्रस के शहजादे राहुल गांधी कहते है कि इस रोग की तलाश कर उसे दूर करने की कोशिश करेंगे। जो कांगे्रस के उपचार की सलाह दे रहे हैं, उनके कारण कांगे्रस की दुर्गति हुई है। इस चुनाव में दो बड़े राज्य असम, केरल की जनता ने कांगे्रस को बुरी तरह नकार दिया है। केवल छोटे राज्य पाण्डुचेरी में कांगे्रस गठबंधन जीता है।

पश्चिम बंगाल में दीदी ममता बनर्जी ने कम्युनिस्ट और कांग्रेस के तंबू बुरी तरह उखाड़ फैंके हैं। दक्षिण के बड़े राज्य तमिलनाडु में जयललिता ने द्रमुक और कांगे्रस की हवा निकाल दी है। केरल में पुन: कम्युनिस्ट गठबंधन को जनता ने अवसर दिया है। हालांकि केरल में पहली बार एक विधायक भाजपा का जीता है। प. बंगाल में भी भाजपा के तीन विधायक जीतने में सफल हुए हैं। इस प्रकार भाजपा अब राष्ट्रीय पार्टी के स्वरूप में आ चुकी है और कांगे्रस का राष्ट्रीय पार्टी का स्वरूप समाप्त हो रहा है। उसे क्षेत्रीय दल ही कहा जायेगा। प. बंगाल में ममता बनर्जी ने अपने बलबूते पर वर्षों से जमी कम्युनिस्ट पार्टी को उखाड़ फेंका और दुबारा वहां की जनता ने दीदी को सत्ता संभालने का अवसर दिया है। 'हम तो डूबेंगे सनम, तुमको भी ले डूबेंगेÓ यही स्थिति कांगे्रस की तमिलनाडू, प. बंगाल एवं केरल में हुई है। जिस तरह घातक रोग लग जाता है, लोग कहते हैं कि इसे छूने से तुम्हें भी रोग लग सकता है। इस प्रकार कांगे्रस राजनीति में अछूत जैसी हो गयी है। यह मान्यता है कि जो शक्ति संपन्न है, उससे ही लोग दोस्ती करते हैं। वैश्विक स्थिति में भी अमेरिका, चीन समृद्ध और शाक्तिशाली देश हंै, इसलिए वैश्विक कूटनीतिक चक्र इन दोनों देशों के आस-पास घूमता है। भारत की मोदी सरकार ने पहली बार दुनिया को आभास करा दिया है कि वह बराबरी से बात करेगा। भारत की सुरक्षा भी तेजी से सुदृढ़ हो रही है। चार बड़े राज्यों के चुनाव में सबसे अधिक चर्चित पूर्वांचल के राज्य असम की चर्चा है।

गत् 15 वर्षों से तरूण गोगोई के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार थी, इस सीमा क्षेत्र के असम में बोडो आतंकियों एवं बांग्लादेश घुसपैठियों की समस्या प्रमुख रही। बोडो आतंकियों की क्षेत्रीय मांगे थी, बांग्लादेश घुसपैठियों को रोकने के लिए भी उन्होंने हिंसा का रास्ता अपनाया। अब बोडो ने भी क्षेत्रीय दल बनाकर भाजपा के साथ चुनाव लड़ा और सफलता भी मिली। असम की 126 सीटों में से 86 सीटों पर भाजपा गठबंधन ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। वैसे तो प. बंगाल में तीन और केरल में भी एक सीट पर जीतकर भाजपा ने अपनी दस्तक दी है। असम का चुनाव भाजपा ने सर्वानंद सोनोवाल के नेतृत्व में लड़ा, उनको भावी मुख्यमंत्री के नाते प्रस्तुत किया। असम में भी राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की रणनीति सफल रही और पूर्वांचल के सबसे बड़़े राज्य असम में भी भाजपा का विजय परचम फहराया। आजादी के 68 वर्षों बाद भाजपा ने कांगे्रस को क्षेत्रीय दल की स्थिति में ला दिया है।

गत् 2014 के लोकसभा चुनाव में श्री नरेन्द्र मोदी ने कांग्रेस मुक्त भारत की बात कही थी, इसे अलोकतांत्रिक बताते हुए कथिक सेकुलर दलों ने आलोचना की थी। उनका कहना था कि किसी दल के अस्तित्व को समाप्त करने की बात लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। हालांकि भाजपा ने स्पष्ट किया था कि भ्रष्टाचार और घोटालेबाजों से भारत को मुक्त करना है। बिहार और दिल्ली के चुनाव के बाद यह कहा जाने लगा था कि नरेन्द्र मोदी के करिश्माई नेतृत्व का जादू कम हो रहा है, लेकिन असम के चुनाव से स्पष्ट हो गया है कि नरेन्द्र मोदी की लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आई है। कांग्रेस के शासन में घुसपैठियों को रोकने की सार्थक पहल नहीं हुई। इसके विपरीत घुसपैठियों के नाम मतदाता सूची में दर्ज कराकर भारत की सुरक्षा के साथ गद्दारी की गयी। असम की देशभक्त जनता ने कांगे्रस को उखाड़ फैंका। सर्वानंद सोनोवाल ने चुनाव के बाद कहा कि बांग्लादेश घुसपैठियों को रोकने के लिए वे कारगर कदम उठायेंगे। भाजपा के लिए असम की विजय इसलिए महत्व की है, क्योंकि पहली बार उसने पूर्वांचल राज्य में अपनी सशक्त दस्तक दी है। इस प्रकार दो गठबंधन की सरकारों के साथ दस प्रमुख राज्यों में उसकी सरकारें हैं। इससे यह तो स्पष्ट हो गया है कि राष्ट्रीय पार्टी भाजपा है, जिस कांगे्रस ने लगभग 50 वर्षों तक एकछत्र शासन किया। उस समय यह भी कहा जाता था कि भाजपा में प्रभावी नेतृत्व का अभाव है, कांगे्रस में ही नेतृत्व की क्षमता है। अब इसके विपरीत यह धारणा बन रही है कि अब कांगे्रस में कोई प्रभावी नेतृत्व नहीं है और नरेन्द्र मोदी की लोकप्रियता का सामना करने की स्थिति में कांगे्रस नेतृत्व में कोई नहीं है। सोनिया गांधी और राहुल गांधी के नेतृत्व को देश की जनता ने बुरी तरह नकार दिया है। कांगे्रस अनाथ जैसी स्थिति में है।
आईसीयू में पड़ी कांगे्रस के उपचार की सलाह वे दे रहे है, जो कांग्रेस की इस दुर्गति के लिए स्वयं जिम्मेदार हैं। इस प्रकार की सलाह पूर्व केन्द्रीय मंत्री नटवर सिंह दे रहे हैं। शशि थरूर भी इस प्रकार की सलाह दे रहे हैं। जो दीवार पर लिखा है, उसे पढऩे की स्थिति न कांगे्रस नेताओं की है और न ही कांगे्रस के कार्यकर्ताओं की। गत लोकसभा चुनाव और राज्य विधानसभा के चुनाव, उपचुनाव का ठीक प्रकार से आंकलन किया जाये तो जनता विदेशी मूल की सोनिया गांधी और उनके बेटे राहुल गांधी के नेतृत्व को नकार चुकी है। इनके नेतृत्व में कांग्रेस अपना अस्तित्व ही समाप्त कर देगी। राष्ट्रवादी सिद्धांतों को पूरा करने का दायित्व भाजपा का है।

लेखक- राष्ट्रवादी लेखक और वरिष्ठ पत्रकार है।

Updated : 2016-05-24T05:30:00+05:30
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