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फार्म निरस्त किया तो बताना होगा कारण

ग्वालियर। बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों की नि:शुल्क प्रवेश प्रक्रिया में अब निजी स्कूलों की मनमानी नहीं चलेगी। इस अधिनियम के तहत अगर किसी निजी स्कूल में निर्धारित 25 प्रतिशत सीटों में से एक सीट भी खाली रहेगी तो संबंधित स्कूल प्रबंधन को इसका वाजिब कारण स्पष्ट करना होगा।

उल्लेखनीय है कि सात साल पूर्व वर्ष 2009 में बाल शिक्षा का अधिकार कानून लागू हुआ था। तभी से स्कूलों में जरूरतमंद बच्चों के लिए रिजर्व राखी जा रही सीटें आधी से ज्यादा खाली पड़ी रहती हैं। ऐसा नहीं है कि जरूरतमंद बच्चों की संख्या कम है, बल्कि स्कूलों की मनमानी, चालाकी और लापरवाही के कारण सीटें जानबूझकर खाली रखी जाती हैं। ग्वालियर जिले की बात करें तो यहां निजी स्कूलों में आरटीई के तहत करीब आठ हजार सीटें रिजर्व रहती हैं। इनमें से मुश्किल से चार हजार सीटें ही भर पाती हैं। स्कूलों की इस मनमानी को रोकने के लिए आरटीई के तहत होने वाली नि:शुल्क प्रवेश प्रक्रिया ऑनलाइन की जा रही है। इसमें पारदर्शिता तो रहेगी ही, साथ ही जो स्कूल सीटें खाली रखेगा, उसे इसका कारण भी बताना होगा।

सिर्फ फार्म की हार्ड कॉपी देना होगी
नई व्यवस्था मे अब अभिभावकों को स्कूलों के चक्कर नहीं लगाना पड़ेंगे। म.प्र स्कूल शिक्षा विभाग की वेबसाइट पर फार्म जमा करने का ऑप्शन बनाया जा रहा है। अभिभावक अपने घर से या फिर साइबर कैफे से ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। पिछले सालों में आरटीई के तहत नि:शुल्क प्रवेश देने में आनाकानी करने वाले स्कूलों की ऐसी शिकायतें विभाग को मिल चुकी हैं कि अभिभावक को गलत जानकारी दी जाती है। कई मामलों में तो आवेदनों की संख्या पूरी होना बताकर अभिभावकों को स्कूल के द्वार से ही वापस लौटा दिया जाता है, लेकिन अब नई व्यवस्था में सिर्फ ऑनलाइन फार्म की हार्ड कॉपी ही स्कूल में जमा कराना होगी। इसका सत्यापन सरकारी स्कूल के शिक्षक करेंगे।

ऑनलाइन ही बताना होगा क्यों नहीं दिया प्रवेश
जरूरतमंद बच्चों को नि:शुल्क प्रवेश देने में शहर के ज्यादातर सीबीएसई स्कूल मनमानी करते रहे हैं। कई पात्र बच्चों को भी अपात्र बताकर प्रवेश नहीं दिया जाता है। हालांकि अब नई ऑनलाइन प्रक्रिया में स्कूलों को फार्म निरस्त करने का कारण भी ऑनलाइन ही स्पष्ट करना होगा। स्कूलों के लिए भी वेबसाइट पर मॉड्यूल तैयार किया जा रहा है। इसके पूरी तरह तैयार होने के बाद प्रत्येक स्कूल को पासवर्ड और आईडी दी जाएगी। इसके माध्यम से स्कूलों को ऑनलाइन ही फार्म की स्थिति और निरस्त करने का कारण बताना होगा।


एजुकेशन पोर्टल पर दर्ज करना होंगे बच्चें के नाम

निजी स्कूल संचालकों को अब अपने यहां पढऩे वाले सभी बच्चों के नाम एजुकेशन पोर्टल पर दर्ज करना होंगे। इन नामों के आधार पर ही आरटीई के तहत पढऩे वाले बच्चों का भौतिक सत्यापन स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारी करेंगे। राज्य शिक्षा केन्द्र ने निजी स्कूल संचालकों को बच्चों के नाम एजुकेशन पोर्टल पर अपलोड करने के लिए सात अप्रैल तक का समय दिया है। जिला परियोजना समन्वयक द्वारा इसके निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं। पोर्टल पर बच्चों के फोटो भी अपलोड किए जाएंगे। साथ ही बच्चों की समग्र आईडी की जानकारी भी देना होगी। जिन बच्चों की समग्र आईडी तैयार नहीं है। उनकी समग्र आईडी बनाने के निर्देश दिए गए हैं।

Updated : 2016-03-21T05:30:00+05:30
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