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तीन दिन बाद मुक्त हुए 82 ऊंट

वन विभाग ने नहीं की चारे की व्यवस्था

ग्वालियर। 'ऊंट के मुंह में जीरा। यह कहावत बचपन से ही सुनते आ रहे हैं, लेकिन इसे चरितार्थ होते हुए पहली बार देखा, वह भी ऊंटों पर ही, और इसे चरितार्थ किया वन विभाग ने। दरअसल वन विभाग द्वारा अवैध चराई के आरोप में अपने डिपो परिसर में पिछले चार दिनों से 82 ऊंटों को बंद करके रखा गया और उन्हें चारे के नाम पर सिर्फ नीम की पत्तियां खिलाई गईं। इसे जिसने भी देखा या सुना, उसी के मुख से एक ही वाक्य निकला। वाह! 'ऊंट के मुंह में जीरा। हालांकि चौथे दिन बुधवार की शाम को न्यायालय के आदेश पर इन सभी ऊंटों को ऊंट पालक हरिचरण सिंह गुर्जर की सुपुर्दगी में देकर बंधन मुक्त कर दिया गया।
उल्लेखनीय है कि वन विभाग ने 31 जनवरी को सोन चिरैया अभयारण्य घाटीगांव के अंतर्गत बरई वीट मेंं विचरण कर रहे 83 ऊंटों को अपने कब्जे में लेकर शिवपुरी लिंक रोड स्थित वन विभाग के डिपो परिसर में बंद कर दिया था। चूंकि यह ऊंट उस संरक्षित वन क्षेत्र से पकड़े गए थे, जहां मवेशियों का प्रवेश प्रतिबंधित है, इसलिए वन विभाग द्वारा इस मामले में भारतीय वन अधिनियम 1927, भारतीय वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 एवं म.प्र. चराई अधिनियम 1965 की धारा 26, 27, 29, 51, 6 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया। इन ऊंटों के साथ ऊंट पालक हरिचरण सिंह गुर्जर निवासी कुशराजपुर जिला ग्वालियर, चरवाहा कल्याण सिंह निवासी झालावाड़ राजस्थान एवं गोविन्द निवासी मंसौर राजस्थान को भी पकड़कर न्यायालय में पेश किया था, जहां से इन तीनों को जमानत पर छोड़ दिया गया था, लेकिन ऊंट डिपो परिसर में ही कैद थे। इन ऊंटों के लिए वन विभाग द्वारा पानी की तो पर्याप्त व्यवस्था की गई, लेकिन चारे के नाम पर चार दिनों तक डिपो परिसर में खड़े नीम के वृक्षों की पत्तियां तोड़-तोड़कर खिलाई गईं।
मीडिया कर्मियों को देख भड़के अधिकारी
बुधवार को जब शहर में इस आशय की खबर फैली कि वन विभाग के डिपो परिसर में बंद ऊंटों को भोजन व पानी नहीं मिलने से कुछ ऊंट बीमार पड़ गए हैं, तो डिपो परिसर में मीडिया कर्मियों का पहुंचना शुरू हो गया, जिन्हें देख सहायक वन संरक्षक जी.के. चंद सहित अन्य अधिकारी भड़क गए और ऊंटों के फोटो खींचने से रोकने का प्रयास किया। अधिकारियों का कहना था कि वन संरक्षक की अनुमति के बिना डिपो परिसर में किसी का भी प्रवेश प्रतिबंधित है।
मौके पर नहीं पहुंचे अधीक्षक
डिपो परिसर में मौजूद अधिकारी आपस में यह चर्चा करते सुने गए कि वन मंडल ग्वालियर के इतिहास में यह पहला मामला है, जब अवैध चराई के आरोप में संरक्षित वन क्षेत्र से इतनी बड़ी संख्या में पालतू पशुओं (ऊंटों) को पकड़कर वन डिपो परिसर में बंद कर मामला दर्ज किया गया। इसके बाद मुख्य वन संरक्षक राजेश कुमार एवं वन संरक्षक विक्रम सिंह परिहार ने वन डिपो पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया, लेकिन सोन चिरैया अभयारण्य अधीक्षक प्रकाश श्रीवास्तव गुजरे चार दिनों में एक बार भी वन डिपो में नहीं पहुंचे, जबकि यह मामला उन्हीं के क्षेत्र से संबंधित था।
वीट प्रभारी पर गिर सकती है कार्रवाई की गाज
विभागीय सूत्रों के अनुसार उक्त ऊंट सोन चिरैया अभयारण्य की बरई वीट के जंगल में पिछले करीब तीन माह से चर रहे थे, लेकिन संबंधित वीट प्रभारी (वनरक्षक) ने न तो अपने स्तर पर कोई कार्रवाई की और न ही इसकी जानकारी अपने वरिष्ठ अधिकारियों को दी। इस पर उक्त वनरक्षक के विरुद्ध कार्रवाई की जा सकती है। इसके अलावा सूत्रों के अनुसार ऊंटों की चराई से जंगल में किस प्रकार का और कितना नुकसान पहुंचा है? इसकी जांच भी कराई जा रही है।
इनका कहना है
ऊंटों के लिए भोजन-पानी की पर्याप्त व्यवस्था की गई थी और वे पूरी तहर स्वस्थ्य हैं। न्यायालय के आदेश पर आज सभी ऊंटों को ऊंट पालक की सुपुर्दगी में देकर मुक्त भी कर दिया गया है।
प्रकाश श्रीवास्तव
अधीक्षक, सोन चिरैया अभयारण्य

Updated : 2016-02-04T05:30:00+05:30
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