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अब बेनामी सम्पत्तियां निशाने पर, आयकर विभाग ने जुटाना शुरू की जानकारी

अब बेनामी सम्पत्तियां निशाने पर, आयकर विभाग ने जुटाना शुरू की जानकारी


ग्वालियर।
नोटबंदी के बाद अब सरकार सरकार के निशाने पर अचल सम्पत्तियां आ सकती हैं। इसके दायरे में बेनामी संपत्ति धारक और बिल्डर आ सकते हैं। सही जवाब नहीं मिलने पर सरकार यह भी पूछ सकती है कि जो रियल स्टेटों को खड़ा किया जा रहा है उनमें लगा पैसा कहां से आया है।

जानकारों का कहना है कि इस प्रकार के लोगों से संतुष्टिपूर्ण जवाब नहीं मिलने पर सरकार सख्त कार्रवाई करते हुए सम्पत्ति को राजसात भी कर सकती है। सूत्र बताते हैं कि आयकर विभाग ने भी ऐसी सम्पत्ति के मालिकों की जानकारी जुटाना प्रारंभ कर दिया है। इसके लिए अधिकारी सम्पत्तियों का पंजीयन करने वाले अधिकारियों की भी जानकारी जुटा रहे हैं इसमें ऐसे लोगों की पहचान की जा रही है जिन्होंने कि तीस लाख से अधिक की सम्पत्ति की खरीद फरोख्त की हो।

उल्लेखनीय है कि मोदी सरकार ने कालेधन को बाहर निकालने के लिए बीती आठ नवम्बर से पूरे देश में 500 और 1000 के नोटों को चलन से बाहर कर दिया था। नोटबंदी के बाद सरकार की अब पैनी निगाह लोगों की बेनामी सम्पत्तियों पर है, जिसमें लोगों ने बड़े पैमाने पर अपना कालाधन लगा रखा है। आयकर विभाग इन सभी का की सूची तैयार कर रहा है। सूत्रों की मानें तो आयकर विभाग कभी भी सर्वे और छापे की कार्रवाई कर सकता है।

बिल्डर, भू-माफिया और उद्योगपतियों में हलचल
नोटबंदी के बाद बिल्डर, भू-माफिया और उद्योगपतियों में हलचल मच गई है। जानकारी के अनुसार इनमेें से जिन लोगों ने अपनी काली कमाई की घोषणा नहीं की है सरकार अब इन पर शिकंजा कसने की तैयारी में है।

नौकरशाहों और राजनीतिज्ञों का पैसा लगा है सम्पत्ति में
जानकारी के अनुसार अचल सम्पत्ति की खरीद-फरोख्त में बड़े-बड़े नौकरशाहों और राजनीतिज्ञों का कालाधन लगा हुआ है। स्थिति यह है कि इस धन के कारण सम्पत्तियों के दाम सातवें आसमान पर पहुंच गए हैं और आम आदमी के लिए इन्हें खरीदना एक सपना बन कर रह गया है।

रियल एस्टेट में खाली पड़े हैं सैकड़ों फ्लैट
शहर के सिटी सेन्टर क्षेत्र में सैकड़ों की संख्या में बहुमंजिला इमारतों का निर्माण हो गया है, जिसमें एक-एक फ्लैट की कीमत 30 लाख से ऊपर की है। स्थिति यह है कि नौकरशाहों और राजनीतिज्ञों ने इसमें अपना कालाधन तो खपा दिया है, लेकिन महंगे दामों के कारण इन सम्पत्तियों का खरीदार कोई नहीं है।

इन्होंने कहा
‘आयकर विभाग को कर अदा नहीं करने पर सजा, दण्ड और जुर्माने का प्रावधान है। अगर किसी भी सजा आदि से बचना है तो अपने बही खातों को अपडेट रखें और रिटर्न आदि समय पर भरते रहें, जिससे आयकर की किसी भी कार्रवाई से बचा जा सकता है।’

अशोक विजयवर्गीय, वरिष्ठ सी.ए.

Updated : 2016-12-02T05:30:00+05:30
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