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फर्श पर आए टमाटर के दाम, किसान पशुओं को खिलाने के लिए मजबूर

फर्श पर आए टमाटर के दाम, किसान पशुओं को खिलाने के लिए मजबूर
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ग्वालियर। मध्यप्रदेश सहित ग्वालियर में टमाटर के दाम फर्श से अर्श पर आ गए हैं। हालत यह है कि साठ रुपए किलो बिकने वाला टमाटर मात्र आठ से दस रुपए किलो के भाव से बिक रहा है। वहीं मध्यप्रदेश के किसान भाव घटने के कारण टमाटर पशुओं को खिलाने के लिए मजबूर हो गए हैं।

टमाटर की नई फसल आने के बाद थोक बाजार में इसके भाव तेजी से घटने से मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल झाबुआ जिले के टमाटर की खेती करने वाले किसानों करीब 6,000 किसानों की चिंता बढ गई है। किसानों के अनुसार स्थानीय मंडियों में टमाटर के भाव गिर कर दो-तीन रपए किलो पर आ गए हैं। उठाव कम होने से किसानों को अच्छी गुणवत्ता के टमाटर छांट कर बाकी बचा बड़े हिस्से का माल पशुओं को खिलाकर खपाना पड़ रहा है। टमाटर उत्पादकों को फिलहाल बाजार में न तो इसका उचित मूल्य मिल पा रहा है, न ही उनके पास इसे अधिक दिन तक तक सुरक्षित रखने के लिये शीतगृह की सुविधा का विकल्प उपलब्ध है। झाबुआ जिलेे का पेटलावद क्षेत्र प्रदेश के प्रमुख टमाटर उत्पादक इलाकों में गिना जाता है। इस क्षेत्र के रायपुरिया गांव के किसान योगेश सेप्टा ने आज कहा कि नई फसल आने के बाद टमाटर के थोक भाव घटकर औसतन दो से तीन रुपए किलोग्राम रह गए हैं। इस कीमत में टमाटर बेचने पर खेती की उत्पादन लागत, फसल तुड़वाने, छंटवाने और इसे पैक कराकर मंडी तक पहुंचाने का खर्च भी निकल नहीं पा रहा है।’

उन्होंने कहा,‘हमारा उगाया टमाटर मध्यप्रदेश, गुजरात, पंजाब, दिल्ली, उत्तरप्रदेश और राजस्थान के कारोबारी खरीदते हैं। हमसे प्रीमियम गुणवत्ता का टमाटर तो खरीद लिया जाता है। लेकिन छंटनी के बाद कुल उत्पादन का करीब 50 फीसदी टमाटर बचा रह जाता है जिसे हमें मजबूरन पशुओं को खिलाना पड़ता है या इसे घूरे में डालकर खाद बनाने में इस्तेमाल करना पड़ता है।

Updated : 2016-11-08T05:30:00+05:30
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