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भारत और फ्रांस की साझेदारी ठोस धरातल पर साबित हुई: लूनावत

भोपाल। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष विजेश लूनावत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रास के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद की परस्पर फ्रांस और भारत यात्रा ने वैश्विक पटल पर मैत्री की विशिष्ट छाप अंकित की है। 1998 में जब परमाणु परीक्षण के समय पश्चिमी दुनिया भारत के विरोध में एक जुट हुई थी।
फ्रांस ने भारत के साथ सांझा सरोकार जताकर मैत्री का सबूत दिया था। गणतंत्र दिवस परेड में ऐसे समय भारत का अतिथ्य स्वीकार किया जब फ्रांस आतंकवादियों के निशाने पर रहा है। उसने भारत के साथ आतंकवाद को समूल नष्ट करने की जो प्रतिबद्धता दिखाई है किसी भी पश्चिमी दुनिया के मुल्क का साहसिक कदम ही कहा जायेगा। इसके लिए नरेंद्र मोदी और ओलांद बधाई के पात्र हैं। उन्होंने कहा कि फ्रांस के राष्ट्रपति के इस दोरे का लाभदायी एक पहलू तो यह है कि फ्रांस की कंपनी ने भारत में भारतीय रेल के लिए इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव बनाने का करार किया है। तीन स्मार्ट सिटी भारत के संवारने की फ्रांस ने जवाबदेही ली है। भारत द्वारा लड़ाकू विमान राफेल की खरीद की प्रक्रिया भले अंजाम पर न पहुंची हो लेकिन इस पर परस्पर सकारात्मक संवाद जारी रहा है। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य के रूप में फ्रांस ने भारत की सदस्यता की अहर्ता भी स्वीकार की है और पाकिस्तान से पठानकोट पर आतंकी हमले के गुनहगारों को सजा दिलाने और मुंबई आतंकी हमले के मास्टर माइन्ड को कानून के शिकंजे में लेने की पुरजोर मांग करते हुए भारत की पीड़ा को सही अर्थों में समझा है। इसका सबसे बड़ा कारण यह भी है कि जहा पश्चिमी दुनिया में फ्रांस दहशतगर्दी से सर्वाधिक आहत हुआ है। पूर्वीय विश्व में भारत भी पाक प्रायोजित आतंकवाद का शिकार बना है। सबके लिए सस्ती बिजली का नरेंद्र मोदी का सपना सच करने के लिए दोनों नेताओं ने गुडग़ांव में अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा गठबंधन मुख्यालय का उद्घाटन करके सौर ऊर्जा के नये-नये उपक्रम लगाने का मार्ग भी प्रशस्त किया है।

Updated : 2016-01-29T05:30:00+05:30
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