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फिर हुई चेम्बर की किरकिरी, संयुक्त अध्यक्ष की 'बाउण्ड्री' बचाने नहीं पहुंचे पदाधिकारी

फिर हुई चेम्बर की किरकिरी, संयुक्त अध्यक्ष की बाउण्ड्री बचाने नहीं पहुंचे पदाधिकारी
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ग्वालियर, वरिष्ठ संवाददाता। अंचल की सबसे बड़ी व्यापारिक संस्था चेम्बर पर व्यापारियों और व्यापार के विकास की पूरी जिम्मेदारी है और वह इसका दंभ भी भरता है लेकिन अब तक ऐसे कई मामले आए हैं जबकि उनके व्यापारी साथियों पर कोई संकट आया है और चेम्बर ने खुलकर कभी उनका साथ नहीं दिया। एक ऐसी ही घटना बीते रोज उस समय हुई जबकि चेम्बर के संयुक्त अध्यक्ष यश गोयल के हरीशंकरपुरम स्थित एक प्लॉट पर नगर निगम ने तुड़ाई की और उनके बार-बार फोन करने पर भी चेम्बर का कोई पदाधिकारी उनके सहयोग के लिए नहीं पहुंचा। उधर इस सम्बन्ध में मंगलवार को जब स्वदेश ने इस मामले को लेकर चेम्बर पदाधिकारियों का मन टटोला तो वे इसेे लेकर कुछ भी खुलकर बोलने से बचते नजर आए और असमंजस की स्थिति में दिखाई दिए। इधर इसे लेकर आज दिनभर चेम्बर की किरकिरी होती रही।
उल्लेखनीय है कि चेम्बर के संयुक्त अध्यक्ष यश गोयल ने हरीशंकरपुरम स्थित लगभग चार लाख वर्ग फीट की भूमि पर बाउण्ड्रीवॉल के साथ ही काफी ऊंचाई के टीनशेड लगा दिए थे। इसे तोडऩे निगम का मदाखलत अमला अपर आयुक्त एमएल दौलतानी के नेतृत्व में सोमवार देर शाम को इसे हटाने पहुंचा था। नगर निगम का कहना है कि श्री गोयल ने बाउण्ड्रीवॉल बनाकर यहां अतिक्रमण किया है जिसकी शिकायत क्षेत्रीय नागरिकों ने महिला एवं बाल विकास मंत्री मायासिंह सहित नगर निगम में की थी। निगम अमला जब यहां कार्रवाई के लिए पहुंचा तो श्री गोयल ने इसका विरोध करते हुए न केवल कार्रवाई में बाधा डाली बल्कि कर्मचारियों व अधिकारियों के साथ झूमाझटकी भी की। उनका कहना था कि मामला न्यायालय में है इस स्थिति में कार्रवाई उचित नहीं है।

एक चर्चा यह भी

शहर में एक चर्चा यह भी है कि कुछ समय पहले नगर निगम ने दालबाजार में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की थी। इस दौरान यहीं निवास करने वाले निगम के अपर आयुक्त एमएल दौलतानी को छोड़ दिया गया था। इसका विरोध चेम्बर के संयुक्त अध्यक्ष यश गोयल ने किया था और काफी हंगामा करते हुए उसे भी तोडऩे की बात की थी। इसके चलते निगम द्वारा श्री दौलतानी के नेतृत्व मे की गई कार्रवाई भी इसी का परिणाम हो सकती है।

अतिक्रमण का नहीं सम्पत्तिकर का है विवाद
चेम्बर के सयुंक्त अध्यक्ष यश गोयल का इस मामले को लेकर कहना है कि निगम ने सम्पत्तिकर के विवाद को लेकर यह कार्रवाई की है। लेकिन वे हमसे अधिक सम्पत्तिकर की मांग कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि जहां तक बाउण्ड्रीवॉल का सवाल है नियमानुसार कृषि भूमि के लिए जितनी ऊंची बाउण्ड्री होना चाहिए वह उतनी ही थी। इसके साथ ही उसके सीमांकन का मामला तहसील न्यायालय में चल रहा है। इसलिए जो भी कार्रवाई की गई वह अनुचित है। नगर निगम ने यह कार्रवाई बौखलाकर की है। इसमें अपर आयुक्त दौलतानी की विशेष रूचि रही है।

पदाधिकारी मनाते रहे नववर्ष
चेम्बर की एकता और व्यापारियों के प्रति उसकी हमदर्दी का खुलासा उस समय हो गया जबकि श्री गोयल चेम्बर के अन्य पदाधिकारियों को लगातार फोन लगाते रहे लेकिन किसी ने उनका फोन रिसीव करना भी उचित नहीं समझा। उल्लेखनीय है कि जिस दौरान श्री गोयल के यहां निगम का मदाखलत दस्ता अतिक्रमण हटा रहा था उस दौरान चेम्बर पदाधिकारी चेम्बर में आयोजित नववर्ष समारोह का आनंद ले रहे थे। हालांकि इसे लेकर एक पदाधिकारी ने तो यह भी कहा कि उन्होंने हमें फोन किया ही नहीं। इसे देखकर यह अंदाज लगाया जा सकता है कि जब एक चेम्बर पदाधिकारी का सहयोग करने से चेम्बर पल्ला झाड़ सकता है तो फिर आम व्यापारी के प्रति उसकी क्या सोच होगी।

''चूकिं मामला न्यायालय में लम्बित है, इसलिए निगम की यह कार्रवाई गलत है। नियमविरुद्ध की गई कार्रवाई को कोई भी व्यक्ति सहन नहीं करेगा और निश्चित ही इसका विरोध करेगा। ऐसी कार्रवाई से निगम या किसी भी सरकारी एंजेसी से लोगों का विश्वास उठ जाएगा।''
प्रवीण अग्रवाल, मानसेवी सचिव चेम्बर
''उक्त भूमि को लेकर न्यायालय में मामला लंबित है, इसलिए निगम की यह कार्रवाई उचित नहीं है। जहां तक श्री गोयल द्वारा कार्रवाई का विरोध और पत्थर आदि फेंकने की बात है, मुझे इसकी जानकारी नहीं है। हम लोग चेम्बर के नववर्ष समारोह में व्यस्त थे। वहीं श्री गोयल का कोई फोन भी हमारे पास नहीं आया।''
सुरेश चन्द्र बसंल
उपाध्यक्ष, चेम्बर

Updated : 2016-01-20T05:30:00+05:30
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