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फर्जी दस्तावेजों के आधार पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता नियुक्त

जमींदार बने बीपीएल कार्डधारी

शिवपुरी। जिले के बदरवास कस्बे में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के पद पर चयनित योग्य उम्मीदवार को दरकिनार करते हुए अयोग्य अभ्यर्थी का चयन कर दिया गया है। बदरवास में फर्जी दस्तावेजों व दबंगई के चलते आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के पद पर अधिकारियों द्वारा नियुक्ति दे दी गई। मिली जानकारी के अनुसार बदरवास कस्बे में आने वाली आंगनबाड़ी 13,14,15 में फर्जी दस्तावेजों एवं अधिकारियों से साठगांठ कर प्रथम नंबर पर चयनित अभ्यार्थी को पांचवें नंबर पर पहुंचा दिया गया। चयन समिति द्वारा प्रथम स्थान पर श्रीमती ओमवती शर्मा पत्नि स्व. दिनेश शर्मा, जिसके 47 प्रतिशत अंक है। दूसरे स्थान पर श्रीमती शोभा चतुर्वेदी 45 प्रतिशत, तीसरे स्थान पर श्रीमती संध्या चतुर्वेदी 42 प्रतिशत चौथे स्थान पर जयंति चतुर्वेदी 40 प्रतिशत तथा पांचवें नंबर पर श्रीमती वंदना चतुर्वेदी का चयन किया गया था। लेकिन बाद में अधिकारियों से साठगांठ कर चयनित सूची में उलटफेर करवा दिया गया और 38 प्रतिशत अंक पाने वाली प्रत्याशी को प्रथम स्थान पर कर दिया गया जो समझ से परे है।
अधिकारियों ने विधवा को किया दरकिनार
बदरवास कस्बे में आंगनबाड़ी क्र. 13, 14, 15 के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की नियुक्ति में वंदना चतुर्वेदी के पति प्रदीप चतुर्वेदी संपन्न व्यक्ति हैं। उन्होंने जिले में पदस्थ अधिकारियों से साठगांठ कर अपनी पत्नी की नियुक्ति आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के रूप में करा ली। वहीं जिले में पदस्थ अधिकारियों ने चंद चांदी के सिक्कों की खातिर एक विधवा महिला को योग्य होने के उपरांत भी दरकिनार कर दिया।

काश ऐसे ही होते सभी बीपीएल कार्डधारी
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को पद पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नियुक्ति पाने वाली बंदना चतुर्वेदी के पति बीपीएल कार्डधारी हैं जिनके पिता नगर परिषद बदरवास में एआरआई के पद पर नियुक्त हैं जिन्हें लगभग 27 हजार रुपए वेतन मिलता है।
प्रदीप शर्मा का एक निजी विद्यालय संचालित है जिसके अंतर्गत लगभग दो दर्जन शिक्षक कर्मचारी कार्यरत। साथ ही गुरुकुल कोचिंग सेंटर भी संचालित करते हैं। इतना ही नहीं प्रदीप शर्मा के पिता सुरेश कुमार शर्मा का बारई रोड पर एक कृषि फार्म है जिसमें सिंचाई के लिए नलकूप लगा है। जिसकी जांच हेतु नगर परिषद अधिकारी बदरवास द्वारा परियोजना अधिकारी एकीकृत बाल विकास अधिकारी को 6.6.2014 को एक पत्र भी लिखा गया। काश! देश में बीपीएल कार्डधारी ऐसे ही होंगे तो देश के गरीबों का क्या होगा?

तहसीलदार द्वारा की गई बीपीएल कार्ड की जांच
जिलाधीश कार्यालय के पत्र क्र. 349 2 अगस्त के अनुसार वंदना चतुर्वेदी पत्नी प्रदीप चतुर्वेदी के बीपीएल कार्ड धारी होने की जांच तहसीलदार बदरवास ने की जिसमें बीपीएल कार्डधारी होने की पुष्टि की गई लेकिन जांच करने वाले अधिकारी ने इस तथ्य को जानने का प्रयास नहीं किया कि कई संपत्ति के वारिस होने के बावजूद इनका बीपीएल कार्ड कैसे बन गया।

जनसुनवाई में नहीं हुई बेवा की सुनवाई
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की चयन प्रक्रिया के तहत 47 प्रतिशत अंक पाने वाली बेवा ओमवती शर्मा ने जनसुनवाई कार्यक्रम के तहत जिलाधीश कार्यालय में न्याय की गुहार लगाई लेकिन उसमें भी ओमवती की सुनवाई नहीं हुई। 

Updated : 19 Sep 2014 12:00 AM GMT
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