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फिर लटकी सिंध जलावर्धन योजना

* नहीं नजर आ रहे पानी आने के आसार
* नेशनल वाइल्ड लाइफ बोर्ड से 470 झाड़ों को काटने की फिर से लेनी होगी अनुमति

शिवपुरी। नेशनल पार्क क्षेत्र में सिंध परियोजना के क्रियान्वयन में बाधक बने 470 झाड़ों को हटाने की अनुमति नए सिरे से लेनी होगी जिसके शीघ्र मिलने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं, क्योंकि प्रस्ताव पहले नगरपालिका प्रदेश शासन को भेजेगी और प्रदेश शासन से वह प्रस्ताव केन्द्र तथा इसके पश्चात एम पावर कमेटी को भेजा जाएगा। इसके बाद नेशनल वाइल्ड लाइफ बोर्ड से उस प्रस्ताव को स्वीकृति लेनी होगी। सिंध परियोजना की वस्तुस्थिति दो दिन पूर्व शिवपुरी आए सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने स्पष्ट की।
अभी तक यही कहा जा रहा था कि दोशियान कंपनी मुख्यमंत्री और मंत्रियों के आदेश को न मानकर काम शुरू नहीं कर रही। दोशियान कंपनी दोषारोपण नेशनल पार्क संचालक पर मढ़ रही थी और नगरपालिका को भी वह निशाने पर ले रही थी लेकिन काम शुरू न होने के पीछे कारण क्या है इसे जानने और जनता को बताने का किसी ने प्रयास नहीं किया। सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अवश्य योजना की कड़वी हकीकत पेश की। हालांकि उनके निशाने पर प्रदेश सरकार रही।
श्री सिंधिया का कहना है कि 2009 में योजना का जो डीपीआर बनाया गया था उसमें नेशनल पार्क क्षेत्र के क्रियान्वयन में अवरोधक बने 470 झाड़ों का कोई जिक्र नहीं था। श्री सिंधिया का आरोप है कि यह लापरवाही प्रदेश सरकार ने जानबूझकर की ताकि शिवपुरी के नागरिकों को सिंध के पानी का लाभ नहीं मिल सके। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इसी कारण सिंध का काम रुका हुआ है। सिर्फ यही अड़चन नहीं है कि 81 करोड़ की उक्त योजना समय में विलंब के कारण 110 करोड़ तक की पहुंच गई और एक-दो साल योजना में विलंब हुआ तो यह राशि बढ़कर 125 करोड़ हो जाएगी। अब सवाल यह है कि यह राशि कौन देगा? इस कारण सिंध परियोजना पर मंडराते बादल और अधिक घने हो गए हैं और आसार ऐसे ही नजर आ रहे हैं कि शिवपुरीवासियों को चांदपाठा के दूषित पेयजल व ट्यूबवेलों के अपर्याप्त पानी पर ही आश्रित रहना होगा। *

Updated : 2014-07-05T05:30:00+05:30
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