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नगर निगम पर पन्द्रह हजार का जुर्माना

ग्वालियर | उच्च न्यायालय ने नगर निगम को भूमि विकास निगम के तहत कार्यवाही न करने का दोषी पाते हुए 15 हजार का जुर्माना लगाया है। याचिकाकर्ता रामकटोरी की याचिका पर उक्त आदेश देते हुए न्यायालय ने 10 हजार रुपए याचिकाकर्ता को व पांच हजार रुपए विधिक सहायता में जमा कराने का आदेश दिया है। याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी अभिभाषक एन.के.गुप्ता ने की।
रामकटोरी गोयल ने गोविंद वल्लभ पंत गृह निर्माण समिति से एक प्लॉट खरीदकर उसके निर्माण कार्य के लिए नगर निगम से मंजूरी मांगी थी जिसे नगर निगम ने यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि अभी यह कॉलोनी विकसित नहीं है। इस संबंध में निर्माण समिति ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि समिति द्वारा सभी विकास कार्य पूरे किए जा चुके हं। वहीं निगम ने आसपास के भू-खण्डों पर निर्माण की स्वीकृति दे दी। इस संबंध में न्यायालय में याचिका दायर की गई तब न्यायालय ने दिशा निर्देश देते हुए नगर निगम को भू-खण्ड की वास्तविक स्थिति पता कर कार्यवाही करने के लिए कहा था।
इसके बाद याचिकाकर्ता ने रिट अपील दायर करते हुए नगर निगम पर भेदभावपूर्ण कार्यवाही करने का आरोप लगाया था। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि नगर निगम ने भूमि विकास नियम के मुताबिक कार्य नही किया साथ ही यह भी नही बताया कि गृह निर्माण समिति ने कौन सा विकास कार्य नही कराया? न्यायालय ने नगर निगम पर 15,000 रुपए का जुर्माना लगाया जिसमें 10,000 रुपए याचिकाकर्ता को व पांच हजार रुपए विधिक सहायता में जमा कराने का आदेश दिया है। गृह निर्माण समिति की ओर से पैरवी अभिभाषक एच.के. शुक्ला ने की। 

Updated : 2013-09-11T05:30:00+05:30
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