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भाजपा की राष्ट्रीय बैठक शुरू, गडकरी बोले सरकार डूबता जहाज

भाजपा की राष्ट्रीय बैठक शुरू, गडकरी बोले सरकार डूबता जहाज
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नई दिल्ली। सूरजकुंड में आज से शुरू हुई भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी ने संप्रग सरकार को घोटालों की सरकार करार दिया है। उन्होंने सरकार को डूबता हुआ जहाज करार देते हुए अपने कार्यकताओं से कहा है कि चुनाव कभी भी हो सकते हैं और वे तैयार रहें। भाजपा ने एक बार फिर यूपीए सरकार की आलोचना करते हुए उसे आजाद भारत की सबसे भ्रष्ट सरकार करार दिया है। पार्टी प्रवक्ता ने कहा कि काग्रेस सरकार अपने कमियों से गिर रही है और भाजपा का काम उसे बचाना नहीं है। सहयोगी दल सरकार से अलग हो रहे हैं तो इसमें भाजपा कुछ नहीं कर सकती है। साथ ही सरकार काले धन पर भी गंभीर नहीं है। ये सारी बातें नितिन गडकरी ने पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में कही, सूरजकुंड में सरकार पर राजनीतिक वार करते हुए टूजी, कोलगेट समेत भ्रष्टाचार के तमाम मुद्दों को राजनीतिक प्रस्तावों में शामिल किया गया है। कार्यकारिणी में नितिन गडकरी को भाजपा अध्यक्ष के रूप में दूसरा कार्यकाल दिया जाना तय है। कार्यकारिणी की बैठक में एफडीआई के पक्ष में सरकार के तकरें को नकारते हुए खुदरा कारोबारियों व दुकानदारों की रोजीरोटी पर गहराते खतरों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है। मीटिंग में महंगाई पर विशेष रूप से निशाना साधा जाएगा। राज्यों पर दोष मढ़ने की नीतियों पर भी सरकार की घेराबंदी की जाएगी। केंद्र की स्थिरता पर लगातार उठते सवालों और समय से पूर्व चुनाव को लेकर लगती रही अटकलों के बीच भाजपा पार्टी के सामाजिक विस्तार अभियान को तेज करने में जुट गई है। बुधवार से हरियाणा के सूरजकुंड में भाजपा कार्यकारिणी और राष्ट्रीय परिषद की बैठक की तीन दिवसीय बैठक आयोजित की जा रही है। भाजपा इस बैठक के जरिए हर वर्ग को आकर्षित करने की कोशिश करेगी। बैठक के दौरान सबकी नजर गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी पर ही बनी रहेगी। उन्होंने इस बैठक में हिस्सा लेने के लिए अपनी रजामंदी तो दे दी है। लेकिन अब देखना यह है कि वह बैठक में अपनी मौजूदगी दर्ज कराते हैं या नहीं। वहीं, स्वास्थ्य कारणों से लोकसभा की नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज के कार्यक्रम में शामिल होने की संभावना भी कम है। सुषमा पिछले कई दिनों से वायरल से पीड़ित हैं और एम्स में भर्ती हैं। हालाकि उनके करीबी लोगों का कहना है कि यदि डॉक्टरों की इजाजत मिली तो सुषमा कार्यक्रम में जरूर शामिल होंगी। इस कार्यक्रम की शुरुआत नितिन गडकरी करेंगे। नितिन गडकरी अध्यक्षीय भाषण देंगे और राजनीतिक व आर्थिक प्रस्ताव पर चर्चा भी करेंगे। बृहस्पतिवार को राष्ट्रीय परिषद में राज्यों की रिपोर्टिंग होगी और राजनीतिक व आर्थिक प्रस्ताव पारित कराए जाएंगे। शुक्रवार तक राष्ट्रीय अध्यक्ष को दूसरा कार्यकाल देने का प्रस्ताव पारित किया जाएगा। गौरतलब है कि तीन महीने पहले मुंबई की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक में अध्यक्ष के दूसरे कार्यकाल का प्रस्ताव स्वीकार किया गया था, जिसे लागू करने के लिए परिषद की अनुमति जरूरी है और हरियाणा की राष्ट्रीय परिषद इस प्रस्ताव का अनुमोदन करेगी। राज्य से एक भी सांसद लाने में असफल रही भाजपा ने राज्य में प्रवेश के चार द्वार कुछ इसी लिहाज से तैयार किए हैं। सर छोटू राम, राजा नाहर सिंह, राव तुलाराम और चौ. सूरजभान के नाम के सहारे जातीय समीकरण साधने की कोशिश होगी। लोकसभा चुनाव के आसपास ही हरियाणा विधानसभा चुनाव भी होने हैं। इस बैठक में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं का जमावड़ा लगने वाला है। कार्यकारिणी और परिषद का एजेंडा यूं तो सरकार के खिलाफ अभियान तेज करने और अध्यक्ष के कार्यकाल विस्तार के अनुमोदन तक सीमित है, लेकिन असल में नजर जातीय समीकरण और विस्तार पर है। यही कारण है कि बाल आप्टे परिसर में मुख्य सभागार डॉ. मंगल सेन के नाम पर रखा गया है। डॉ. सेन ने ही हरियाणा में भाजपा की जमीन तैयार की थी। पाकिस्तान से विस्थापित डॉ. सेन 1990 तक सक्रिय रहे। राज्य में भाजपा कभी भी अपने भरोसे सत्ता में नहीं आई। हमेशा लाठी बनकर ही रही। अब भाजपा जातीय समीकरणों के सहारे हरियाणा की राजनीति में अकेले दम घुसने की कोशिश में है। द्वारों का नामकरण जातीय विस्तार का ही संदेश देता है। सर छोटू राम और नाहर सिंह देश के हर जाट के लिए श्रद्धा के केंद्र रहे हैं। जबकि नाहर सिंह बल्लभगढ़ के राजा थे और 1857 के शहीद हैं। हरियाणा की राजनीति में अहम जाट वोटर कांग्रेस और इनेलो के बीच बंटे हैं। भाजपा की वापसी के लिए इन दोनों दलों के जाट वोटों में पैठ जरूरी है। अहिरवाल समुदाय के राव तुलाराम भी 1857 के हीरो रहे हैं। गुड़गांव, रेवाड़ी, नारनौल, महेंद्रगढ़ जैसे जिले अहिरवाल समुदाय के गढ़ माने जाते हैं, जबकि चौ. सूरज भान हरियाणा के दलित नेता थे। वह अंबाला से सांसद और उत्तर प्रदेश में राज्यपाल रह चुके थे। जाट समुदाय के बाद हरियाणा में दलित समुदाय का दबदबा है। इस लिहाज से सूरजभान के जरिए भाजपा उन्हें भी साधने की कोशिश करेगी। फिलहाल हरियाणा से भाजपा के हिस्से में एक भी सांसद नहीं हैं।

Updated : 2012-09-26T05:30:00+05:30
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