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फलक को दिमागी बुखार, बचना मुस्किल

फलक को दिमागी बुखार, बचना मुस्किल
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नई दिल्ली। देश के शीर्ष चिकित्सा संस्थान अखिल भारतीय
$img_titleआयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में 18 जनवरी से मौत से जूझ रही दो वर्ष की फलक के बचने की उम्मीद अब कम ही है।
फलक का इलाज कर रहे एम्स के डॉक्टरों का कहना है कि सोमवार की रात उसे को दिमागी बुखर हो गया रात में उसकी हालत बिगडऩे लगी इस कारण सोमवार को उसके मस्तिष्क की दूसरी सर्जरी करनी पड़ी और वेंटिलेटर पर रखना पड़ा। यह सर्जरी मस्तिष्क में जमा पानी निकालने के लिए की गई। अगले 48 घंटे का समय फलक के लिए काफी नाजुक है। अस्पताल के न्यूरोसर्जन डॉ. सुमित सिन्हा ने कहा कि चिकित्सकों की सबसे प्रमुख प्राथमिकता उसे वेंटिलेंटर के सहारे के बगैर रखने की है। उसके दिमाग में भरा पानी संक्रामक है और यह जानलेवा साबित हो सकता है। इसके लिए उसे एंटीबायोटिक दवाइयां दी जा रही है। अगर अगले 24 से 48 घंटे के दौरान दवाई से फायदा नहीं हुआ तो एक और सर्जरी करने की जरूरत पड़ सकती है। चिकित्सकों के अनुसार फलक की छाती में पानी भी भर गया है। डाक्टरों को आशंका है कि दिमाग में इन्फेक्शन हो गया है। डॉक्टर स्वीकार कर रहे हैं कि फलक के बचने की संभावना बहुत कम है। कोई चमत्कार ही उसे बचा सकता है।

Updated : 1 Feb 2012 12:00 AM GMT
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