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अमेठी : कभी लगते थे राहुल जिंदाबाद के नारे, अब स्मृति के जयकारे

-वजह: राहुल ने अपनों को किया बेगाना

अमेठी : कभी लगते थे राहुल जिंदाबाद के नारे, अब स्मृति के जयकारे
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अमेठी। एक समय था अमेठी के गांव, गली और मोहल्लों में राहुल भैया जिंदाबाद के नारे लगते थे। गांधी परिवार के विरुद्ध एक शब्द कहकर कोई आसानी से बचकर जा नहीं सकता था। आज वक़्त ने ऐसी करवट ली है कि यहां राहुल भैया से ज्यादा स्मृति दीदी जिंदाबाद के जयकारे लग रहे हैं?

वजह साफ है राहुल ने अपनों को बेगाना किया और स्मृति ने बेगानों को अपना बना लिया। बेगाने पन का ही ये एक बानगी भर है कि जहां गांधी परिवार की तूती बोलती थी, आज वहां लाखों लोग बीजेपी का झंडा लिए टहल रहे हैं।

हाल ही में हाजी हारून नाम के कांग्रेसी नेता बगावत पर उतर आए और उन्होंने राहुल गांधी के विरुद्ध चुनाव लड़ने का ऐलान किया। हारून का कहना है कि आज कांग्रेस से मेरा ही मोह भंग नहीं हुआ पूरे देश के मुसलमानों का मोह भंग हो चुका है। इसका कारण है, हिस्सेदारी के हिसाब से उसका प्रतिनिधत्व नहीं मिल रहा है।

इसी तरह छह दिन पूर्व योगी सरकार के मुस्लिम मंत्री के समक्ष राजधानी लखनऊ में कांग्रेस के पूर्व विधायक डा. मुस्लिम ने बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की थी। 72 वर्षीय कद्दावर नेता ने कहा था कि हमारी कौम और जात में बीजेपी का एक हव्वा (डर) पैदा किया। वहीं दो दिन पूर्व सलोन में पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी के साथ रहे नेता ने 140 साथियों के साथ कांग्रेस को अलविदा कह दिया। ऐसे में भली-भांति अंदाजा लगाया जा सकता है कि राहुल गांधी को अमेठी के साथ-साथ केरल के वायनाड से पर्चा क्यूं भरना पड़ा। अगर अमेठी लोकसभा के दो दशक के चुनावी नतीजों पर नजर डालें तो परिस्थिति कांग्रेस के अनुकूल नहीं है।

2014 से जो डाउन फाल कांग्रेस का यहां शुरू हुआ उससे कांग्रेस उबर नहीं पा रही। राजीव गांधी की मौत के बाद 1999 में गांधी परिवार की नुमाइंदगी करने उनकी पत्नी सोनिया गांधी अमेठी पहुंची। उनके मुकाबले पर बीजेपी के टिकट पर थे अमेठी के राजा डा. संजय सिंह। बावजूद इसके अमेठी ने उनको हाथों हाथ लिया। तीन लाख वोटों से उन्होंने बड़ी जीत हासिल की। पांच साल बाद 2004 में उन्होंने बेटे राहुल के लिए अमेठी सीट छोड़ दी। 2004 के चुनाव में वर्तमान में बीजेपी नेता चंद्र प्रकाश मिश्र मटियारी को राहुल ने दो लाख 90 हजार की करारी शिकस्त दी, मटियारी को मात्र 99 हजार 326 वोट ही मिले। इसके बाद 2009 में राहुल ने वर्तमान में बीजेपी नेता आशीष शुक्ला को तीन लाख 70 हजार वोटों से हार का मज़ा चखाया। आशीष शुक्ला को बीएसपी के टिकट पर कुल 93 हजार 997 मत ही मिले लेकिन दो बार राहुल और एक बार सोनिया की बड़ी जीत 2014 में दांव पर लगती नजर आई। जब स्मृति ईरानी सीधे राहुल के मुकाबले पर आई। इस बार वे कड़ी टक्कर दे रही हैं। अब आने वाला वक्त ही बताएगा कि जीत का सेहरा किसके सिर बंधेगा।

Updated : 8 April 2019 9:14 AM GMT
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Swadesh Digital

स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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