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फैमिली डॉक्टर इंडियन हेल्थकेयर इकोसिस्टम की जरूरत

फैमिली डॉक्टर इंडियन हेल्थकेयर इकोसिस्टम की जरूरत
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लखनऊ। विश्व भर में स्वास्थ्य देखभाल व्यवस्था में फैमिली डॉक्टर्स की भूमिका और योगदान को रेखांकित करने के लिए 19 मई को वर्ल्ड फैमिली डॉक्टर्स डे मनाया जा रहा है। 2010 में वर्ल्ड आर्गेनाइज़ेशन ऑफ नेशनल कॉलेज़ेस, एकेडमीज़ एंड एकेडमिक एसोसिएशंस ऑफ फैमिली फिजिशियंस (डब्ल्युओएनसीए) ने 19 मई को पहली बार वर्ल्ड फैमिली डॉक्टर्स डे के रूप में घोषित किया है। तब से एकेडमी ऑफ फैमिली फिजिशियन ऑफ इंडिया (एएफपीआई) ने इस दिन हेल्थकेयर इकोसिस्टम/स्वास्थ्य सेवा पारिस्थितिकी तंत्र में फैमिली डॉक्टर्स के काम को रेखांकित करने और उन्हें सम्मान देने के लिए पेशेवर और सामाजिक गतिविधियों की एक श्रृंखला की योजना बनाई है।

एएफपीआई वर्तमान संदर्भ में फैमिली डॉक्टर की अवधारणा को पुनर्जीवित करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहा है। फैमिली मेडिसिन को क्लिनिकल स्पेशलिटी के रूप में लोकप्रिय बना रहा है। फैमिली डॉक्टर भारत में कोई नई अवधारणा नहीं है। ऐतिहासिक रूप से फैमिली डॉक्टर सामान्य चिकित्सक हुआ करते थे जो न केवल स्वास्थ्य प्रबंधकों के रूप में कार्य करते थे बल्कि एक परिवार के लिए एक मित्र, दार्शनिक, संरक्षक और मार्गदर्शक के रूप में भी कार्य करते थे। उन दिनों समाज ने आसानी से उपलब्ध और किफायती फैमिली डॉक्टर्स में बहुत विश्वास दिखाया।

एकेडमी ऑफ फैमिली फिजिशियन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. रमन कुमार ने कहा कि पिछले कुछ दशकों के दौरान चिकित्सा क्षेत्र में उप-विशिष्टताओं (सब-स्पेशियलिटी) के प्रचलन ने अभ्यास के सामान्य तरीके को समाप्त कर दिया है। अंग विशेष, शरीर के विभिन्न तंत्रों या अलग-अलग रोगों में विशेषज्ञता पर ध्यान देने के साथ स्वास्थ्य क्षेत्र में शानदार प्रगति हुई है। यह इन उप-विशेषज्ञों (सब-स्पेशियलिस्ट) का विकास और अस्पतालों में उनकी बढ़ती मौजूदगी है जिसने समाज में एक फिजिशियन की बढ़ती मांग को जन्म दिया है, जो मरीज का ध्यान रखने वाला, आसानी से उपलब्ध होने के साथ-साथ एक विशेषज्ञ भी है। 'फैमिली मेडिसिन' नामक एक क्लिनिकल स्पेशियलिटी/नैदानिक विशेषता के उभार ने सामान्य चिकित्सा की प्राचीन परंपराओं को पुनर्जीवित करने और फैमिली डॉक्टर को फिर से परिभाषित करने की आशा पैदा की है, जो आज के समय की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सर्वश्रेष्ठ रूप से प्रशिक्षित हैं।

फैमिली मेडिसीन की एक व्यक्ति-केंद्रित विशेषता है जो विशेष रूप से एक परिवार और सामान्य रूप से समाज की ओर उन्मुख निरंतर उपचार संबंध के माध्यम से व्यापक देखभाल प्रदान करती है। व्यक्ति केंद्रितता पारिवारिक चिकित्सा का अनिवार्य मूल सिद्धांत है और किसी भी चिकित्सा समस्या के लिए समग्र दृष्टिकोण से संपूर्ण व्यक्ति की पूर्णता को बढ़ावा देना चाहता है। डॉ. कुमार ने आगे कहा कि कोविड 19 महामारी ने एक बार फिर एक मजबूत प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल वितरण प्रणाली के महत्व पर जोर दिया है, जबकि मीडिया और जनता तृतीयक देखभाल अस्पतालों की सराहना कर रहे थे, जिस तरह से उन्होंने गंभीर मामलों को संभाला। प्राथमिक देखभाल कार्यबल जटिलताओं को रोकने और अस्पतालों पर बोझ को कम करने के लिए लगातार काम कर रहा था, चाहे वह जांचे हो, संपर्क अनुरेखण (कांटेक्ट ट्रेसिंग), उपचार, निगरानी, होम आइसोलेशन के मामले या सार्वजनिक क्षेत्र में टीकाकरण, प्राथमिक देखभाल कर्मियों ने मोर्चा संभाला हुआ था।

समाज में चिकित्सा क्षेत्र के बारे में बढ़ती नकारात्मक धारणाओं के वर्तमान परिदृश्य की पृष्ठभूमि में, इस उत्कृष्ट पेशे में मरीज के विश्वास को फिर से स्थापित करने के लिए फैमिली प्रैक्टिस को बढ़ावा देने की बहुत जरूरत है। युवा चिकित्सा स्नातकों को आगे आकर पारिवारिक चिकित्सा को एक विशेषज्ञता के रूप में चुनकर समुदाय में योगदान देना चाहिए। फैमिली फिजिशियन की अगली पीढ़ी को तैयार कर फैमिली डॉक्टर की अवधारणा को दोबारा परिभाषित करने में फैमिली मेडिसिन बिरादरी की बड़ी भूमिका है।

Updated : 2022-05-20T16:45:12+05:30
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स्वदेश वेब डेस्क

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