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यूपी में विपक्ष के गठबंधन से बीजेपी को होगा नुकसान

यूपी में विपक्ष के गठबंधन से बीजेपी को होगा नुकसान
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लखनऊ। भारतीय राजनीति व चुनाव पर वर्ष 1990 से गहन अध्यन व शोध करके पुस्तक लिख रहे अर्थशास्त्री, राजनीतिक विश्लेषक व पत्रकार, प्रवासी भारतीय रूचिर शर्मा का कहना है कि नरेन्द्र मोदी को आगामी लोकसभा चुनाव में जीतने की संभावना 50 प्रतिशत है। इसमें उ.प्र. में सपा, बसपा, कांग्रेस व रालोद की गठबंधन की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी। यदि यह गठबंधन हो गया तो इसका सबसे अधिक नुकसान 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को होगा। इसका असर सभी हिन्दीभाषी राज्यों पर तो पड़ेगा ही, अन्य राज्यों पर भी पड़ेगा। इस बारे में बीएचयू आईआईटी के छात्र रहे पूर्व सांसद हरिकेश बहादुर का कहना है कि इसका प्रमाण उ.प्र. में 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा व उसके सहयोगी दलों तथा सपा + कांग्रेस, बसपा के प्रत्याशियों को मिले मत प्रतिशत हैं। उस समय भाजपा, अपना दल, सुहेल देव भारतीय समाज पार्टी गठबंधन करके चुनाव लड़े थे। उनको 325 सीट तथा 41.4 प्रतिशत वोट मिले थे। बसपा अकेले लड़ी थी, जिसको 19 सीट और 22.2 प्रतिशत वोट मिले थे। कांग्रेस व सपा मिलकर लड़े थे। उनको 28.2 प्रतिशत वोट और 54 सीट मिली थी। रालोद को 2 प्रतिशत वोट मिले थे।

इसमें यदि सपा-कांग्रेस, बसपा और रालोद को मिले वोट जोड़ते हैं, तो हो जाता है 28.2+ 22.2+02=52.4 प्रतिशत वोट। जो कि भाजपानीत गठबंधन को मिले 41.4 प्रतिशत वोट से (52.4 - 41.4) 11 प्रतिशत अधिक है।

इस आंकड़े से साफ है कि यदि आगामी लोकसभा चुनाव में उ.प्र. में सपा, बसपा,कांग्रेस व रालोद मिल कर चुनाव लड़े या केवल सपा व बसपा ही मिलकर चुनाव लड़े तो भाजपा को 2014 लोकसभा चुनाव में मिली सीटों से आधे से भी कम सीटें मिलेंगी।

हरिकेश बहादुर का कहना है कि इसके लिए भाजपा के नेता तर्क दे रहे हैं कि लोकसभा चुनाव में चुनावी मुद्दे राष्ट्रीय होते हैं और पार्टी अगला लोक सभा चुनाव भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम पर लड़ेगी। विपक्ष में कोई भी उतने बड़े कद का नेता नहीं है। इसके जवाब में विपक्षी नेताओं का कहना था कि 2014 के चुनाव में यूपीए सरकार के 10 साल से शासन के विरूद्ध जनता की नाराजगी थी। उसको मोदी ने बड़े-बड़े वायदे करके खूब भुनाए पर इनके 5 वर्ष के राज्य में वही सब हो रहा है जो खत्म करने के ये चुनाव के समय वादे किये थे। अब यह पता चल रहा है कि उस समय माहौल कोयला घोटाला से लगायत अन्य कई तथाकथित घोटालों में तबके कैट प्रमुख द्वारा परोसे गये हवा-हवाई नुकसान के आंकड़ों को भाजपा ने प्रचार करके बनाया था। उसी भाजपा का राज आने पर कोयला घोटाले, टूजी घोटाले के आरोपी से लगायत अन्य आरोपी छूट गए। सो जनता अब इस सरकार की शासन की असलीयत भी जान गई है। इसलिए 2019 के लोकसभा चुनाव में 2014 के लोकसभा चुनाव वाली हवा नहीं रहेगी। इसका सबसे अधिक असर उ.प्र. में होगा। यदि सपा, बसपा, कांग्रेस, रालोद में गठबंधन हो गया, तब तो भाजपा गठबंधन को और भी नुकसान होगा। यही वजह है कि सपा, बसपा, कांग्रेस, रालोद में गठबंधन नहीं होने देने के लिए हर तरह के उपक्रम किये जा रहे हैं। यदि कर लिये तो उनके वोट काटने की रणनीति के मद्दे नजर अमर सिंह व शिवपाल यादव को शह दे नई पार्टी लांच कराने की कोशिश हो रही है।

इधर ऐसे किसी भी तरह के समीकरण व तर्कों को नकारते हुए भारतीय जनता पार्टी किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष वीरेन्द्र सिंह "मस्त" का कहना है कि मोदी सरकार ने मात्र 4 वर्ष में जो काम कर दिया है, उतना अब तक किसी भी सरकार ने नहीं किया था। रही बात विपक्षी गठबंधन की, तो विपक्ष कुछ भी कर ले, कितना भी समीकरण बना ले, जनता 2019 के लोकसभा चुनाव में भी नरेन्द्र मोदी को ही जिताएगी, प्रधानमंत्री बनाएगी।

Updated : 2018-08-27T23:43:49+05:30
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Swadesh Digital

स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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