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Indian Market Slowdown: Nifty 8% Down

18 महीने की सुस्ती में फंसा बाजार, निफ्टी अपने जनवरी के उच्च स्तर से लगभग 8 प्रतिशत नीचे

भारतीय शेयर बाजार करीब 18 महीनों से सुस्त दौर में है। निफ्टी अपने जनवरी के उच्च स्तर से लगभग 8% नीचे है, जबकि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी गिरावट देखी जा रही है।


18 महीने की सुस्ती में फंसा बाजार निफ्टी अपने जनवरी के उच्च स्तर से लगभग 8 प्रतिशत नीचे

भारतीय शेयर बाजार पिछले करीब डेढ़ साल से अपेक्षित रिटर्न नहीं दे पा रहा है, जिससे निवेशकों के बीच चिंता बढ़ गई है। प्रमुख सूचकांक निफ्टी 50 अपने जनवरी के उच्च स्तर से लगभग 8 प्रतिशत नीचे चल रहा है, जबकि छोटे और मिडकैप शेयर अपने 52 हफ्तों के उच्च स्तर से करीब 15 प्रतिशत तक नीचे बने हुए हैं। इस लंबे ठहराव ने निवेशकों को अपनी निवेश रणनीति पर दोबारा सोचने के लिए मजबूर कर दिया है।

बाजार की इस स्थिति के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं, जिनमें तकनीक के क्षेत्र में तेजी से बढ़ता आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, वैश्विक व्यापार तनाव और पश्चिम एशिया में बढ़ती भू-राजनीतिक अस्थिरता प्रमुख हैं। खासतौर पर ईरान से जुड़े क्षेत्रीय तनाव और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर टैरिफ विवादों ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया है।

निवेश का अवसर हो सकती है यह स्थिति

कई रणनीतिकारों का कहना है कि शेयर बाजार में आई यह गिरावट वास्तव में निवेश के लिए बेहतर अवसर भी हो सकती है, क्योंकि अब कई कंपनियों के शेयर पहले की तुलना में सस्ते मूल्यांकन पर उपलब्ध हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, निवेशकों को इस समय घबराकर अपने निवेश को नकद में बदलने के बजाय दीर्घकालिक नजरिया अपनाना चाहिए।

एक साल पहले बेहतर रिटर्न दे रहा था बाजार

लगभग एक साल पहले तक भारतीय शेयर बाजार तेजी के दौर में था और निवेशकों को लगातार अच्छे रिटर्न मिल रहे थे, लेकिन अब हालात बदल गए हैं। एआई तकनीक के तेजी से विस्तार ने आईटी सेक्टर के भविष्य को लेकर नई आशंकाएं पैदा कर दी हैं। कई निवेशकों को डर है कि नई तकनीक से पारंपरिक आईटी सेवाओं के बिजनेस मॉडल प्रभावित हो सकते हैं।

इसके साथ ही दुनिया के कई हिस्सों में चल रहे राजनीतिक और सैन्य तनावों ने बाजार की स्थिरता पर भी असर डाला है। इन सभी कारणों से निवेशकों का भरोसा कुछ हद तक कमजोर हुआ है और बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ गया है। हालांकि बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति उतनी नकारात्मक नहीं है जितनी पहली नजर में दिखाई देती है।

भावनाओं के आधार पर फैसले लेने से बचने की सलाह

विशेषज्ञों का कहना है कि खुदरा निवेशकों की सबसे बड़ी गलती भावनाओं के आधार पर फैसले लेना होती है। जब बाजार गिरता है तो कई लोग घबराकर अपने शेयर बेच देते हैं और जब बाजार अचानक ऊपर जाता है तो वे बिना योजना के खरीदारी करने लगते हैं।

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