NFHS-6 सर्वे में खुलासा हुआ है कि भारत में डायबिटीज, मोटापा और हाई ब्लड प्रेशर तेजी से बढ़ रहे हैं। महिलाओं में डायबिटीज 13.5% से बढ़कर 17.8% तक पहुंच गई है, जो चिंता बढ़ाने वाली बात है।
भारत में डायबिटीज के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-6 (NFHS-6) के ताजा आंकड़े बताते हैं कि देश में लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियां तेजी से फैल रही हैं। यह सर्वे 2023-24 के दौरान करीब 6.79 लाख घरों में किया गया, जिससे देश की सेहत की एक व्यापक तस्वीर सामने आई है।
रिपोर्ट के मुताबिक महिलाओं में डायबिटीज का स्तर NFHS-5 की तुलना में 13.5 प्रतिशत से बढ़कर 17.8 प्रतिशत तक पहुंच गया है। यही नहीं, पुरुषों में भी इसी तरह का उछाल देखा गया है। यही वजह है कि यह रिपोर्ट देश की स्वास्थ्य व्यवस्था और बदलती जीवनशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
लाइफस्टाइल बीमारियों का बढ़ता बोझ
दरअसल, NFHS-6 की रिपोर्ट सिर्फ डायबिटीज तक सीमित नहीं है। इसमें मोटापा और हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याओं में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि शहरीकरण, फास्ट फूड का बढ़ता चलन और शारीरिक गतिविधियों में कमी इसके मुख्य कारण हैं। अब समझिए, यह सिर्फ एक स्वास्थ्य समस्या नहीं बल्कि आर्थिक और सामाजिक बोझ भी बनता जा रहा है। लंबे समय तक इलाज और दवाओं पर निर्भरता परिवारों के बजट पर सीधा असर डाल रही है।
महिलाओं में तेजी से बढ़ती डायबिटीज, क्यों है चिंता?
रिपोर्ट का सबसे चिंताजनक पहलू महिलाओं में बढ़ता डायबिटीज रेट है। 13.5% से बढ़कर 17.8% तक पहुंचना यह दिखाता है कि बदलती जीवनशैली का असर तेजी से महिलाओं पर भी पड़ रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि घरेलू काम के बावजूद शारीरिक गतिविधियों की कमी, तनाव और खानपान की खराब आदतें इसके पीछे प्रमुख कारण हो सकते हैं। हालांकि कई मामलों में समय पर जांच न होना भी स्थिति को गंभीर बना देता है।
मोटापा और हाई ब्लड प्रेशर ने बढ़ाई मुश्किलें
NFHS-6 के अनुसार, डायबिटीज के साथ-साथ मोटापा और हाइपरटेंशन के मामले भी बढ़े हैं। यह तीनों बीमारियां एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं और एक साथ होने पर जोखिम और ज्यादा बढ़ जाता है। यही सवाल अब उठ रहा है कि क्या भारत आने वाले समय में लाइफस्टाइल डिजीज का ग्लोबल हब बनता जा रहा है? स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते रोकथाम पर ध्यान नहीं दिया गया, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
कैसे रोका जा सकता है खतरा?
फिलहाल विशेषज्ञों की राय है कि नियमित जांच, संतुलित आहार और रोजाना शारीरिक गतिविधि इस बढ़ते खतरे को काफी हद तक कम कर सकती है। हालांकि असली चुनौती लोगों की दिनचर्या बदलने की है। क्योंकि समस्या इलाज से ज्यादा आदतों में छिपी हुई है। आने वाले वर्षों में यह देखना अहम होगा कि भारत इस बढ़ते डायबिटीज संकट से कैसे निपटता है।