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बंगाल में बदलाव की लहर

तेजी से बदल रहा है बंगाल

शुभेंदु अधिकारी की नई सरकार ने पश्चिम बंगाल में तेजी से बदलाव किए, जिसमें सुरक्षा, विकास और अवैध कब्जों के खिलाफ कड़े कदम शामिल हैं।


तेजी से बदल रहा है बंगाल

अवधेश कुमार

पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी सरकार द्वारा सत्ता संभालने के अल्पकाल में ही स्पष्ट बदलाव दिखाई देने लगे हैं। ऐसा लगता है कि केवल ममता सरकार की विचारधारा और दिशा के बिल्कुल उलट शुभेंदु सरकार ने यू-टर्न ही नहीं लिया, बल्कि पुराने ढांचे और व्यवस्थाओं को तेजी से बदलते हुए शासन को एक नई दिशा देने का प्रयास शुरू कर दिया है। उद्देश्य ऐसा बंगाल बनाना है, जो शांत, स्थिर और सामान्य राज्य के रूप में अपनी गतिविधियों का संचालन कर सके।

शुभेंदु सरकार ने कुछ फैसले किए हैं और कुछ नीतियों में बदलाव किए हैं, जिनका प्रभाव तुरंत दिखाई देने लगा है। इनमें केवल केंद्रीय योजनाओं को लागू करना ही शामिल नहीं है। चाहे भाजपा के कितने भी आलोचक क्यों न हों, क्या किसी ने कल्पना की थी कि सरकार बनने के कुछ ही समय बाद राज्य में टीएमसी शासन के दौरान लगाए गए अवैध टोल बूथ हट जाएंगे, बैरिकेड समाप्त हो जाएंगे और कथित हफ्ता वसूली का कारोबार खत्म हो जाएगा? लेकिन ऐसा हुआ।ममता बनर्जी ने स्वयं महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए महिलाओं से रात में बाहर न निकलने की अपील की थी। सरकार बदलने के बाद बंगाल अपने पुराने स्वभाव, संस्कृति और चहल-पहल की ओर लौटता दिखाई दे रहा है। महिलाएं देर रात तक आवाजाही करती नजर आ रही हैं। सरकार ने महिला सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। कोलकाता सहित कई जिलों में रात के समय पुलिस पेट्रोलिंग बढ़ा दी गई है।

आम लोगों की प्रतिक्रिया भी उल्लेखनीय है। सोशल मीडिया से लेकर मुख्यधारा के मीडिया तक लोग लिख रहे हैं कि अब वास्तव में सरकार बदलने का एहसास हो रहा है। बकरीद के दिन वर्षों बाद सड़कों के बजाय मैदानों और मस्जिदों में नमाज अदा की गई।किसी भी सरकार की दिशा उसके शुरुआती निर्णयों से स्पष्ट हो जाती है। यदि वैचारिक और प्रशासनिक दिशा स्पष्ट हो तथा उसके प्रति प्रतिबद्धता दिखाई दे, तो शासन का प्रभाव भी स्थापित होता है। चुनाव परिणाम आने के तुरंत बाद ऐसा लग रहा था कि बंगाल को संभालना कठिन होगा, लेकिन कुछ ही दिनों में माहौल बदलता दिखाई देने लगा। ऐसा प्रतीत होने लगा मानो यह वही बंगाल नहीं है, जिसे लोग 4 मई के चुनाव परिणामों से पहले और उसके बाद के शुरुआती दिनों में देख रहे थे।

कोलकाता से आसनसोल तक अवैध निर्माणों के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई का आक्रामक और हिंसक विरोध पूर्व सरकार के दौर की तस्वीर पेश कर रहा था। पत्थरबाजी भी हुई, लेकिन उसके बाद जो हुआ, वह महत्वपूर्ण है। वीडियो फुटेज के आधार पर पत्थरबाजों और दंगाइयों की पहचान कर कार्रवाई की जा रही है। पुलिस ने लाउडस्पीकर से घोषणा की है कि हिंसा और तोड़फोड़ में शामिल लोगों से नुकसान की भरपाई उनकी संपत्तियों से की जाएगी।उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने हिंसक प्रदर्शनकारियों और दंगाइयों के खिलाफ इसी प्रकार की नीति अपनाई थी, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए थे। बंगाल में ऐसी कार्रवाई की पहले कल्पना भी नहीं की जाती थी।भाजपा ने चुनाव अभियान के दौरान कानून-व्यवस्था को मजबूत करने, महिला सुरक्षा सुनिश्चित करने, अवैध घुसपैठ रोकने, सीमा सुरक्षा बढ़ाने, तुष्टिकरण समाप्त करने, हिंदुओं के साथ हुए कथित अन्याय का परिमार्जन करने, भ्रष्टाचार खत्म करने और राज्य को विकास एवं सांस्कृतिक गरिमा की राह पर वापस लाने जैसे वादे किए थे।

मुख्यमंत्री पद संभालते ही शुभेंदु अधिकारी ने बांग्लादेश सीमा पर घेराबंदी के लिए सीमा सुरक्षा बल को भूमि उपलब्ध कराने का आदेश दिया। बताया गया कि यह प्रक्रिया 45 दिनों में पूरी हो जाएगी। लगभग 450 किलोमीटर ऐसे क्षेत्र थे, जहां घेराबंदी के लिए भूमि उपलब्ध नहीं हो सकी थी। यह कार्य शीघ्रता से पूरा किया गया।इस दिशा में एक महत्वपूर्ण फैसला नेशनल हाईवे-10 और नेशनल हाईवे-110 के सात हिस्सों को केंद्र सरकार को सौंपने का भी रहा। इनमें से पांच हिस्से सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) से गुजरते हैं। यह क्षेत्र पूर्वोत्तर भारत के आठ राज्यों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ता है। यह इलाका बांग्लादेश, नेपाल और भूटान की सीमाओं से सटा हुआ है तथा चीन भी इसके निकट है।

चिकन नेक का सामरिक महत्व अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यदि यह संपर्क बाधित हो जाए तो पूर्वोत्तर भारत का देश के अन्य हिस्सों से सीधा जमीनी संपर्क प्रभावित हो सकता है।कट मनी, भ्रष्टाचार और महिलाओं के विरुद्ध अपराधों की जांच के लिए दो उच्चस्तरीय अधिकार प्राप्त आयोगों का गठन किया जा चुका है। सरकार ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज के पूर्व अधीक्षक संदीप घोष के खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में ईडी को मुकदमा चलाने की मंजूरी भी दे दी है। इसी प्रकार अन्य लंबित मामलों में भी कार्रवाई की जा रही है।संदेशखाली से लेकर आरजी कर मेडिकल कॉलेज प्रकरण और मुर्शिदाबाद हिंसा तक, महिलाओं की सुरक्षा बंगाल की राजनीति का प्रमुख मुद्दा रही है। कट मनी और भ्रष्टाचार को लेकर जनता में व्यापक असंतोष था। अब वही पुलिस प्रशासन और वही तंत्र बदला हुआ दिखाई दे रहा है।

अवैध कब्जों से मुक्ति भी बंगाल की एक बड़ी चुनौती रही है। आरोप लगाए जाते रहे हैं कि वर्षों के दौरान विभिन्न राजनीतिक प्रभावों के कारण सरकारी और निजी भूमि पर कब्जे हुए। अब ऐसे मामलों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। कांग्रेस और वामपंथी दलों के कुछ कार्यालय भी वापस दिलाए गए हैं। कई स्थानों पर धार्मिक स्थलों को भी पुनः खुलवाया गया है।वास्तव में शुभेंदु सरकार ने भाजपा की विचारधारा को शासन नीति में लागू करते हुए स्पष्ट संदेश देने का प्रयास किया है। सरकार ने सड़कों पर नमाज पढ़ने की परंपरा को समाप्त करने के लिए कार्रवाई शुरू की है। वंदे मातरम् के गायन को अनिवार्य किया गया है। राज्य के इमामों, मुअज्जिनों और पुजारियों को दिए जाने वाले सरकारी मानदेय को 1 जून से समाप्त करने का आदेश भी जारी किया गया है।

सरकार का एक बड़ा फैसला अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण को 17 प्रतिशत से घटाकर 7 प्रतिशत करना तथा इसे केवल 66 हिंदू जातियों तक सीमित करना बताया जा रहा है। इसके साथ ही मुस्लिम समुदाय की जातियों को पिछड़ा वर्ग सूची से बाहर कर दिया गया है।लेखक का मत है कि कम समय में उठाए गए इन कदमों से सरकार ने यह संदेश देने का प्रयास किया है कि राज्य किसी विशेष समुदाय, पंथ या राजनीतिक दल के समर्थकों के लिए नहीं, बल्कि सभी नागरिकों के हित में कार्य करेगा। शासन कानून और संविधान के अनुसार चलेगा, प्राथमिकता सुरक्षा और विकास होगी तथा सत्ता के दुरुपयोग के मामलों में कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

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