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Bengal Enters Shubhendu Adhikari Era

पश्चिम बंगाल में अब शुभेंदु राज

पश्चिम बंगाल में भाजपा की ऐतिहासिक जीत के बाद शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में नई सरकार बनी। जानिए बंगाल में भाजपा सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौतियां क्या हैं।


पश्चिम बंगाल में अब शुभेंदु राज

पश्चिम बंगाल में भाजपा की प्रचंड जीत के साथ ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस सरकार के 15 साल लंबे शासन का पतन हो गया। बंगाल में 9 मई 2026 को भाजपा ने शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में नई सरकार का गठन कर दिया। नई सरकार बनने के साथ ही राज्य में शुभेदु युग की शुरुआत हो गई। खास बात यह है कि 2014 में नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद बंगाल नौवां राज्य है, जहां पहली बार भाजपा का मुख्यमंत्री बना है।

 मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से ही 'मोदी है तो मुमकिन है। ये कहावत लगातार प्रचलित है। ये कहावत यूं ही नहीं कही जाती, बल्कि इसमें सच्चाई भी है। नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद भाजपा ने नई ऊंचाइयों को छुआ है। ताजा उदाहरण पश्चिम बंगाल है। जहां पहली बार भाजपा की सरकार बनी है। मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से भाजपा ने नौ राज्यों में पहली बार मुख्यमंत्री बनाए हैं। इसे मोदी का करिश्माई व्यक्तित्व ही कहेंगे। पार्टी लगातार बुलंदियों पर पहुंच कर अपनी जीत का परचम लहरा रही है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा की प्रचंड जीत ने देश की राजनीति में एक बड़ा के बदलाव दर्ज किया है। 

ममता बनर्जी नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के 15 साल पुराने कुशासन का अंत करते हुए भाजपा ने राज्य में पहली बार सुशासन की सरकार बनाई है। कुल 294 सीटों वाली विधानसभा में भाजपा ने 207 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। भाजपा की इस विजय यात्रा की शुरुआत 2014 में हरियाणा और महाराष्ट्र से हुई थी। इसके बाद असम 2016, अरुणाचल प्रदेश 2016, मणिपुर 2017, त्रिपुरा 2018, ओडिशा 2024, विहार 2026 के बाद अब पश्चिम बंगाल इस लिस्ट में शामिल हो गया है। हरियाणा में भाजपा ने 2014 में पहली बार अपने दम पर सरकार बनाई और मनोहरलाल खट्टर को मुख्यमंत्री बनाया था। महाराष्ट्र में भाजपा 2014 के विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी।

जहां शिवसेना के साथ गठबंधन में सरकार बनाई थी और देवेन्द्र फडणवीस भाजपा से राज्य के पहले मुख्यमंत्री बने। प्रधानमंत्री मोदी अब सत्ता समर्थक लहर के पर्याय बन चुके हैं। पिछले कुछ चुनावों में असम और पुडुचेरी जैसे राज्यों में भाजपा-एनडीए सरकारें फिर से सत्ता में आ गई है, जबकि कई विपक्षी शासित राज्यों में सरकारों को सता विरोधी लहर का सामना करना पड़ा है। बंगाल विजय के बाद अब भाजपा सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती कानून-व्यवस्था को ठीक करने की होगी। बंगाल में चुनाव से पहले और चुनाव के बाद हिंसा का इतिहास रहा है। हाल ही में शुभेदु अधिकारी के निज सहायक की हत्या कर दी गई। अन्य नेताओं को भी निशाने पर लिया गया। बंगाल में हत्या की वारदातें आम हो गई हैं। 

महिलाओं के प्रति अपराध को लेकर बंगाल पहले से ही सुर्खियों में है। पश्चिम भाजपा बंगाल का राजनीतिक हिंसा का इतिहास काफी पुराना है। नई सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि ऐसी घटनाएं अब और नहीं। पार्टी के भीतर इस संबंध में एक कड़ा संदेश पहले ही दे दिया गया है लेकिन इसका जमीनी स्तर पर पालन कराना सबसे बड़ी चुनौती होगी। शुभेदु अधिकारी के सामने चुनौतियों में सबसे अहम बांग्लादेश से होने वाली अवैध घुसपैठ को रोकना भी है। इसके लिए बीएसएफ और पुलिस के साथ मिलकर काम करना होगा। दूसरी बड़ी चुनौती राज्य में पहले से मौजूद बांग्लादेशी घुसपैठियों की पहचान कर उनका वापस भेजने की है। तीसरी बड़ी चुनौती गौ तस्करी को रोकना है। 

बंगाल के रास्ते अभी बड़े पैमाने पर जानवरों की अवैध तस्करी की जाती है। नदी के रास्ते जानवरों को अवैध तरीके से बांग्लादेश भेजा जाता है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल में दशकों से सिंडिकेट कट मनी सिस्टम सचिवालय से पंचायत स्तर तक फैला हुआ है। इस सिंडिकेट सिस्टम को पूरी तरह खत्म करना शुभेदु अधिकारी के लिए सबसे बड़ा चैलेंज है क्योंकि यही सिंडिकेट सिस्टम बंगाल में भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा दीमक है।

 

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