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पंजाब में अनाज घोटाले का मामला

पंजाब में अनाज घोटाले की गूंज

पंजाब में अनाज घोटाले का मामला गरमाया, व्हिसल ब्लोअर गुरप्रीत सिंह के अनुसार राज्य में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और घोटाले हो रहे हैं। आम आदमी पार्टी सरकार पर जनता का भरोसा कम होता जा रहा है।


पंजाब में अनाज घोटाले की गूंज

आम आदमी पार्टी के गठन का प्रमुख उद्देश्य राजनीति को भ्रष्टाचार से मुक्त करके उसमें शुचिता लाना था। लेकिन क्या आम आदमी पार्टी इस उद्देश्य में सफल रही? पंजाब सरकार पर काबिज आम आदमी पार्टी के रवैये से तो ऐसा नहीं दिख रहा। बल्कि वह पिछली कांग्रेसी सरकार के भ्रष्टाचार की धारा को ही आगे बढ़ाती दिख रही है। यह कहना है राज्य के अनाज आपूर्ति घोटाले के व्हिसल ब्लोअर गुरप्रीत सिंह का। गुरप्रीत सिंह का आरोप है कि इन घोटालों से राज्य को हजारों करोड़ का चूना लगा है। इससे हुई कमाई की बंदरबांट राज्य के मंत्रियों और ताकतवर अफसरों के बीच हुई है।

बीते अप्रैल में राज्य के बीजेपी प्रमुख सुनील जाखड़ ने भी पंजाब सरकार पर आरोप लगाया था कि अनाज रखने वाली बोरियों की खरीद में भारी घोटाला किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया था कि राज्य में 22 रुपये की दर से बोरी मिल रही थी, लेकिन आम आदमी पार्टी सरकार ने उसे तकरीबन दोगुने यानी 43 रुपये 89 पैसे की दर से खरीदा। इस घोटाले की उन्होंने जांच की मांग की थी। हालांकि बीजेपी अभी चुप है, लेकिन आने वाले दिनों में उसकी चुप्पी टूट सकती है।

दिल्ली के शराब घोटाले की तर्ज पर पंजाब सरकार पर अनाज खरीद घोटाले के आरोप लग रहे हैं। वैसे आरोप पुरानी कांग्रेस सरकार पर लगे थे। राज्य में नई सरकार आने के बाद आम आदमी पार्टी की जिम्मेदारी थी कि इसे रोके और उचित कानूनी उपाय करे। लेकिन जिस तरह से इस मामले की अनदेखी राज्य की मौजूदा सरकार कर रही है, उससे लगता नहीं कि वह इस मामले में ईमानदार है। व्हिसल ब्लोअर गुरप्रीत सिंह का कहना है कि इस सिलसिले में वे अधिकारियों और मंत्रियों से कई बार मिले, लेकिन बात कहीं से आगे बढ़ती नहीं दिख रही। राज्य में विधानसभा के चुनाव की उलटी गिनती शुरू होने में देर है। लेकिन जिस तरह अनाज घोटाले को लेकर पंजाब की सरकार को घेरने की कोशिश हो रही है, उसके मायने भगवंत मान सरकार के लिए संकेत साफ हैं। आने वाले विधानसभा चुनावों में इसका जवाब देना आसान नहीं होगा। फिलहाल इस मुद्दे को राज्य के विपक्षी दल तूल देते हुए नजर नहीं आ रहे हैं। लेकिन इसकी गारंटी नहीं है कि आने वाले दिनों में, जब राज्य के विधानसभा चुनाव सिर पर होंगे, विपक्षी दल इस मामले में चुप बैठेंगे।

पांच नदियों के प्रदेश पंजाब की ख्याति खेती-किसानी के लिए रही है। यहां की करीब तीन-चौथाई आबादी सीधे या फिर परोक्ष रूप से खेती-किसानी से जुड़ी हुई है। जाहिर है कि यहां के लोगों के लिए खेती-किसानी न सिर्फ जीवन रेखा है, बल्कि भावनात्मक मुद्दा भी है। इसलिए आने वाले दिनों में अगर अनाज घोटाले की तासीर बढ़ने लगे तो हैरत नहीं होनी चाहिए।

पंजाब के कृषि उपज घोटाले के तार पिछली कांग्रेस सरकार से जुड़ते हैं। कांग्रेस की सरकार रहते राज्य के खाद्य और आपूर्ति विभाग से जुड़ी निविदाओं में जमकर धांधली हुई थी। इस मामले के तूल पकड़ने के बाद राज्य के विजिलेंस विभाग ने साल 2022 में लुधियाना में एफआईआर दर्ज की थी। इसकी जांच के दौरान कांग्रेसी सरकार के मंत्री रहे भारत भूषण आशु, ठेकेदार तेलू राम समेत खाद्य और आपूर्ति विभाग के कई अधिकारियों की गिरफ्तारी हुई थी। इसी मामले के एक आरोपी जूनियर अधिकारी राकेश सिंगला भगोड़ा घोषित हो चुका है और उसके लिए सीबीआई ने रेड कॉर्नर नोटिस जारी कर रखा है।

ऐसे में सवाल यह उठता है कि पंजाब की भगवंत मान सरकार पर अनाज घोटाले का आरोप कैसे चस्पा हो रहा है। राज्य को भ्रष्टाचार और नशा मुक्त करने के नारे के साथ सत्ता में आई पंजाब की भगवंत मान सरकार दरअसल इस भगोड़े अधिकारी के खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई करती नजर नहीं आ रही है। अव्वल तो होना चाहिए कि टेंडर घोटाले की जांच करके दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होती, लेकिन ऐसा होता नहीं दिख रहा है।लुधियाना में दर्ज मामले के व्हिसल ब्लोअर गुरप्रीत सिंह हैं। उनका आरोप है कि नई सरकार के आने के बाद घोटाला रुकना चाहिए था, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। बल्कि इसकी कड़ी आगे जुड़ती दिख रही है।

दरअसल, पंजाब में कृषि उपज की खरीद भारत सरकार के खाद्य निगम के लिए पंजाब सरकार करती है। इसके लिए उसे प्रति क्विंटल कमीशन मिलता है। असल गड़बड़ी यहीं है। गुरप्रीत सिंह का कहना है कि दरअसल असल खरीद कुछ और हो रही है और कागजों पर कुछ और दिखाया जा रहा है। चूंकि हर साल केंद्र सरकार खरीद के लिए निश्चित रकम राज्य को देती है, लिहाजा उसका हर साल हिसाब-किताब भी मांगती है। लेकिन दिलचस्प यह है कि साल 2017 में कांग्रेस के सत्ता में आने से लेकर 2022 में आई मान सरकार तक, इस बारे में केंद्र को ठीक से हिसाब नहीं दिया गया है। इसकी वजह से केंद्र सरकार द्वारा इन वर्षों में राज्य को मिले 31 हजार करोड़ रुपये को केंद्र सरकार ने राज्य पर कर्ज घोषित कर दिया है। इस कर्ज के एवज में पंजाब सरकार को इसकी दोगुनी रकम चुकानी पड़ेगी।

गुरप्रीत सिंह का आरोप है कि कोविड महामारी के बहाने पड़ोसी राज्यों हरियाणा और उत्तर प्रदेश से अनाज की खरीद की गई। इसके लिए करीब साढ़े छह हजार करोड़ की बोगस बिलिंग की गई।फर्जी खरीद बाद में भी हुई। पंजाब में साल 2025 में भारी बाढ़ आई। इस दौरान राज्य में जितने अनाज की पैदावार नहीं हुई, उसकी तुलना में ज्यादा अनाज की राज्य में खरीद की गई। गुरप्रीत सिंह के मुताबिक, इस बार भी पिछले साल यानी 2024 जितने अनाज की खरीद दिखाई गई।

दिलचस्प है कि साल 2022 में आपूर्ति घोटाले का मामला दर्ज होने के बाद इस बारे में राज्य सरकार ने खरीदारी की नई नीतियां बनाईं। राज्य ने लेबर, कार्टेज एंड ट्रांसपोर्ट पॉलिसी बनाई। नई नीति की वजह से कायदा हुआ। लेकिन अधिकारियों को यह रास नहीं आया, क्योंकि इसमें उनकी कमाई नहीं रही। फिर उन्होंने मिलीभगत करके इस नीति को साल 2024 में बदलकर तकरीबन पुरानी जैसी ही कर दिया। इसकी वजह से राज्य को अनाज खरीद में सालाना सौ करोड़ की चपत लग रही है।पंजाब की मान सरकार पर आरोप लगा है कि साल 2024 में उसने खरीद के लिए टेंडरों में भी हेरफेर किया। गुरप्रीत का आरोप है कि इसके जरिए कुछ चहेते ठेकेदारों को फायदा पहुंचाया गया और उनसे मिली रकम का दिल्ली के 2025 विधानसभा चुनाव में इस्तेमाल किया गया। गुरप्रीत सिंह ने इन सब घोटालों को लेकर सीबीआई की चंडीगढ़ यूनिट से शिकायत करके जांच की मांग की है।

हालांकि, सीबीआई के हाथ इस सिलसिले में बंधे हैं, क्योंकि इंडी गठबंधन में शामिल सरकारों ने अपने राज्यों में सीबीआई को जांच करने के अधिकार को वापस ले लिया था। दिलचस्प यह है कि टेंडर घोटाला और आपूर्ति घोटाला सामने आने और उसकी जांच होने के बाद प्रवर्तन निदेशालय ने आरोपी और भगोड़े अधिकारी राकेश सिंगला के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उसकी करीब साढ़े बाइस करोड़ की संपत्तियां सील कर रखी हैं। लेकिन राज्य की ओर से जांच आगे नहीं बढ़ रही है।जब केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों ने आंदोलन किया था, उसमें पंजाब के किसान और उनके संगठन बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे थे। देखना यह होगा कि विधानसभा चुनावों के वक्त ये संगठन सामने आते हैं या नहीं।

राज्य के अगले विधानसभा चुनाव को लेकर शिरोमणि अकाली दल और बीजेपी में एक बार फिर गलबहियां होने की संभावना बढ़ गई है। यदि ऐसा होता है तो तय मानिए, विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी के लिए अनाज घोटाला वैसा ही सिरदर्द होगा, जैसा दिल्ली विधानसभा चुनाव में शीश महल और शराब घोटाला बना था।

उमेश चतुर्वेदी

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक समीक्षक हैं।)

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