ऑपरेशन सिंदूर के एक साल पूरे होने पर देश भारतीय सेना के शौर्य को नमन कर रहा है। 23 मिनट में 9 आतंकी ठिकानों को तबाह कर भारत ने दुनिया को बड़ा संदेश दिया।
ऑपरेशन सिंदूर का एक साल पूरा हो गया है। ऑपरेशन सिंदूर के जरिये भारत ने दुश्मन और दुनिया को ये दिखा दिया कि अब वो छद्म युद्ध के जरिये आतंकवादी हमलों को और नहीं सहेगा। 7 मई को 23 मिनट के भीतर भारतीय वायुसेना ने सीमापार किए बिना जिस सटीक ढंग से बहावलपुर, मुरीदके में 9 आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया, वह काबिले तारीफ है। सीमा पार किए बिना की गई ये कार्रवाई अचूक, अद्वितीय, आत्मनिर्भर भारतीय सैन्यबल की बेमिसाल रणनीति का उदाहरण है। एक वर्ष पहले चलाए गए इस ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जिस तरह से भारतीय सेना ने अपना पराक्रम दिखाया, उसे सलाम है।
एक साल पहले भारतीय सेनाओं ने अद्वितीय वीरता, सटीक रणनीति और दृढ़ संकल्प का परिचय देते हुए पहलगाम में निर्दोष भारतीयों पर हमला करने वालों को करारा जवाब दिया था। पूरा देश सेना केऑपरेशन सिंदूर के एक साल शौर्य और बलिदान को एक वर्ष पूरा होने पर नमन करता है। ऑपरेशन सिंदूर केवल एक सैन्य अभियान नहीं था, बल्कि यह आतंकवाद के खिलाफ भारत की जीरो टॉलरेंस नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक था। इस अभियान ने भारतीय सेनाओं की तत्परता, समन्वय और पेशेवर क्षमता को दुनिया के सामने मजबूती से रखा। ऑपरेशन सिंदूर ने यह भी दिखाया कि भारत की तीनों सेनाएं किस तरह बेहतर तालमेल और आधुनिक रणनीति के साथ काम कर रही हैं।
ऑपरेशन सिंदूर के समय भारत ने जिन हथियारों का प्रयोग किया उसमें से ज्यादातर स्वदेशी ही थे। इससे जाहिर होता है कि स्वदेशी रक्षा क्षमता ने राष्ट्रीय सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाया है। भारत का संकल्प आज भी उतना ही अड़िग है जितना एक साल पहले था। सरकार का लक्ष्य केवल आतंकवादियों को मार गिराना नहीं है, बल्कि उस पूरे ईकोसिस्टम और तंत्र को जड़ से उखाड़ फेंकना है जो आतंक की फसल को पनपने में मदद करता है। ऑपरेशन सिदूर का संदेश स्पष्ट था कि पाकिस्तान का कोई भी सुरक्षित ठिकाना पहुंच से बाहर नहीं है। 100 से अधिक आतंकवादियों को मार गिराया गया। ऑपरेशन सिंदूर की खास बात यह थी कि अधिकांश युद्धों में नुकसान कभी सीमित नहीं रहता। यह सीमाओं, अर्थव्यवस्थाओं और आम आबादी तक फैल जाता है। दोनों पक्षों को भारी कीमत चुकानी पड़ती है, लेकिन ऑपरेशन सिंदूर ने इस मिथक को तोड दिया। भारत ने पाकिस्तानी आतंकी और सैन्य बुनियादी ढांचे को लक्ष्य करके उसे गंभीर चोट पहुंचाई। जबकि भारत के भीतर कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ।
पाकिस्तानी मिसाइलों से कोई नुकसान नहीं हुआ, क्षेत्रीय अस्थिरता नहीं फैली और न ही कोई लंबे वक्त तक असर करने वाला आर्थिक नुकसान हुआ। कम वक्त में गहरी चोट करने वाली ये स्ट्राइक सुनियोजित योजना और उसे बेहतरीन तरीके से लागू करने का परिणाम थी। भारतीय वायु सेना ने राफेल जेट, स्कैल्प मिसाइलों और हैमर बमों का उपयोग करके मात्र 23 मिनट में पाकिस्तान की चीनी एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम को चकमा दिया और मिशन को पूरा किया जो भारत की तकनीकी बढ़त को दर्शाता है। बहरहाल ऑपरेशन सिंदूर के एक साल पूरे होने पर भारतीय सेना को एक बार फिर से सलाम है।