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India’s HPV Vaccine Drive Against Cervical Cancer

सर्वाइकल कैंसर : निर्णायक विजय के लिए जनआंदोलन बनाना होगा

भारत में 14 साल तक की किशोरियों के लिए मुफ्त एचपीवी टीकाकरण अभियान शुरू हुआ है। सर्वाइकल कैंसर के खिलाफ यह कदम कितना अहम है


सर्वाइकल कैंसर  निर्णायक विजय के लिए जनआंदोलन बनाना होगा

भारत में महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर एक ऐतिहासिक और निर्णायक मोड़ आया है। सरकार द्वारा 14 वर्ष तक की किशोरियों के लिए मुफ्त एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) टीकाकरण अभियान शुरू करने का निर्णय न केवल स्वागत योग्य है, बल्कि यह सर्वाइकल कैंसर के खिलाफ एक ‘स्वस्थ नारी’ मिशन की ओर एक साहसी कदम है। यह पहल भारतीय महिलाओं को कैंसर के सबसे आम और जानलेवा प्रकारों में से एक से बचाने की दिशा में एक निर्णायक विजय की तरह है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, भारत में हर साल सर्वाइकल कैंसर के हजारों मामले सामने आते हैं, जो महिलाओं में कैंसर से होने वाली मौतों का एक बड़ा कारण है। यह कैंसर पूरी तरह से रोके जाने योग्य है और इसका मुख्य कारण एचपीवी संक्रमण है। इतने वर्षों तक टीकाकरण उच्च लागत के कारण केवल निजी क्षेत्र में उपलब्ध था, जिससे यह कई लोगों की पहुंच से बाहर था। अब व्यापक टीकाकरण अभियान, विशेष रूप से ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए, इसे हर महिला तक पहुंचाने का मार्ग प्रशस्त करेगा।

इस पहल की सबसे बड़ी खूबी इसका वैज्ञानिक आधार है। भारत सरकार ने क्वाड्रिवेलेंट वैक्सीन का उपयोग करने का फैसला किया है, जो एचपीवी के सबसे खतरनाक वैरिएंट (16 और 18) से सुरक्षा प्रदान करती है। इसके अलावा, एक मात्र खुराक की प्रभावशीलता को देखते हुए यह अभियान बड़े पैमाने पर कवरेज सुनिश्चित करने में सहायक होगा।हालांकि यह पहल केवल वैक्सीन लगाने तक ही सीमित नहीं रहनी चाहिए। हमें यह याद रखना होगा कि टीकाकरण के साथ-साथ नियमित स्क्रीनिंग और जागरूकता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। इस पहल के खिलाफ मौजूद भ्रांतियों को दूर करना और समाज में यौन स्वास्थ्य को लेकर संकोच को समाप्त करना भी एक बड़ी चुनौती होगी।

यह पहल ‘नीति प्रतिबद्धता को ठोस परिणाम में बदलने’ का शानदार उदाहरण है। यदि हम चाहते हैं कि भारत 2030 तक सर्वाइकल कैंसर के खतरे को कम करे, तो हमें इस मिशन को एक सामूहिक आंदोलन बनाना होगा। यह पहल न केवल एक बीमारी को मिटाएगी, बल्कि एक स्वस्थ और सशक्त भावी पीढ़ी का निर्माण भी करेगी।यह पहल ‘वैक्सीन से सुरक्षा’ का संकल्प है, जो देश की आधी आबादी को एक जानलेवा बीमारी से आजादी दिलाने में निर्णायक भूमिका निभाएगी। टीकाकरण के बाद होने वाले साइड इफेक्ट्स का फॉलोअप भी जरूरी है।

भारत का 14 साल की लड़कियों के लिए पूरे देश में ह्यूमन पैपिलोमा वायरस वैक्सीनेशन प्रोग्राम शुरू करने का कदम विज्ञान के लिए एक बड़ा कदम है, ऐसे समय में जब दुनियाभर में वैक्सीनेशन के खिलाफ माहौल खतरनाक रूप से बढ़ता जा रहा है। वैक्सीन से बचने का असर अमेरिका में साफ दिख रहा है, जहां अभी 26 राज्यों में खसरा महामारी फैल रही है।एचपीवी वैक्सीनेशन केवल तय सरकारी हेल्थ सेंटरों पर और प्रशिक्षित मेडिकल ऑफिसर की मौजूदगी में किया जाएगा, जिन्हें वैक्सीनेशन के बाद निगरानी और साइड इफेक्ट्स के प्रबंधन के लिए तैयार कुशल हेल्थ केयर टीमों का समर्थन मिलेगा। रिपोर्ट बताती हैं कि भारत में सर्वाइकल कैंसर के 80 प्रतिशत से ज्यादा मामले इन्हीं दो टाइप के कारण होते हैं।

सबूत इस ओर भी इशारा करते हैं कि एचपीवी वैक्सीनेशन और नियमित स्क्रीनिंग से सर्वाइकल कैंसर को काफी हद तक रोका जा सकता है, और यदि इसका जल्दी पता चल जाए तथा तुरंत इलाज किया जाए तो इसे पूरी तरह ठीक भी किया जा सकता है। सर्वाइकल कैंसर एक ऐसा दुर्लभ कैंसर है जिसमें वैक्सीन बेहद प्रभावी बचाव साबित हुई है।सरकार ने इस मिशन की शुरुआत कर दी है, लेकिन निर्णायक विजय के लिए सरकारी प्रयासों के साथ-साथ सामाजिक सहभागिता भी जरूरी है। बेहतर होगा कि इस मिशन को एक व्यापक जनआंदोलन बना दिया जाए।

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