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क्या मॉस्कीटो रैकेट खराब कर सकता है TV?

मच्छर मारने वाला रैकेट बन सकता है आपके TV और Smartphone का दुश्मन? जानिए कितना बड़ा है खतरा

मच्छर मारने वाला इलेक्ट्रिक रैकेट आपके स्मार्ट टीवी और स्मार्टफोन के लिए खतरा बन सकता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक हाई-वोल्टेज स्पार्क से गैजेट्स के सेंसर और डिस्प्ले प्रभावित हो सकते हैं।


मच्छर मारने वाला रैकेट बन सकता है आपके tv और smartphone का दुश्मन जानिए कितना बड़ा है खतरा

गर्मियों में मच्छरों से बचने के लिए ज्यादातर घरों में इलेक्ट्रिक मॉस्कीटो रैकेट इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यही छोटा-सा गैजेट आपके महंगे स्मार्ट टीवी, स्मार्टफोन या लैपटॉप को नुकसान पहुंचा सकता है? हाल ही में इसको लेकर टेक एक्सपर्ट्स की चेतावनी चर्चा में है।

दरअसल, कई लोग टीवी स्क्रीन या मोबाइल के बेहद करीब जाकर मच्छर मारने की कोशिश करते हैं। उसी दौरान रैकेट से निकलने वाली हाई-वोल्टेज स्पार्क  और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंटरफेरेंस (EMI) इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज को प्रभावित कर सकती है। यही वजह है कि अब यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि क्या मॉस्कीटो रैकेट सच में गैजेट्स के लिए खतरा है?

कैसे काम करता है इलेक्ट्रिक मॉस्कीटो रैकेट?

इलेक्ट्रिक रैकेट सामान्य बैटरी से चलने वाला डिवाइस दिखता जरूर है, लेकिन इसके अंदर  हाई-वोल्टेज सर्किट होता है। यह कम वोल्टेज को बढ़ाकर लगभग 2000 से 3000 वोल्ट तक पहुंचा देता है। जब कोई मच्छर इसके जाल में फंसता है, तो तेज स्पार्क पैदा होता है। इसी दौरान एक छोटा इलेक्ट्रोमैग्नेटिक पल्स (EMP) और EMI भी बनती है हालांकि, सामान्य दूरी पर इसका असर बहुत कम होता है। लेकिन अगर इसे किसी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के बेहद करीब इस्तेमाल किया जाए, तो समस्या हो सकती है।

TV और Smartphone पर क्या असर पड़ सकता है?

आज के स्मार्ट गैजेट्स बेहद संवेदनशील माइक्रोचिप्स पर काम करते हैं। इनके अंदर मौजूद सेंसर और सर्किट बहुत कम वोल्टेज पर चलते हैं। ऐसे में अचानक पैदा हुई इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड उन्हें प्रभावित कर सकती है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक सबसे ज्यादा खतरा स्मार्ट टीवी के डिस्प्ले पैनल और स्मार्टफोन के टच सेंसर को होता है। अगर स्पार्क टीवी स्क्रीन के बहुत पास हो, तो 

  • स्क्रीन पर लाइनें आ सकती हैं
  • कुछ पिक्सल डेड हो सकते हैं
  • डिस्प्ले फ्लिकर कर सकता है

वहीं स्मार्टफोन में:

  • टच रिस्पॉन्स धीमा पड़ सकता है
  • फोन अचानक हैंग या रीस्टार्ट हो सकता है
  • सेंसर गड़बड़ कर सकते हैं

हालांकि, ऐसा हर बार हो यह जरूरी नहीं है। लेकिन जोखिम पूरी तरह से नकारा भी नहीं जा सकता।

क्या EMI सच में इलेक्ट्रॉनिक्स को प्रभावित करती है?

अब समझिए कि EMI यानी इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंटरफेरेंस इतना महत्वपूर्ण क्यों माना जाता है। कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में पहले से ही EMI शील्डिंग दी जाती है ताकि बाहरी इलेक्ट्रोमैग्नेटिक सिग्नल उन्हें प्रभावित न करें लेकिन हाई-वोल्टेज स्पार्क अगर बहुत नजदीक हो, तो कुछ मामलों में यह सुरक्षा भी कमजोर पड़ सकती है। खासकर OLED स्क्रीन और प्रीमियम स्मार्टफोन्स जैसे संवेदनशील डिवाइसेज में जोखिम थोड़ा बढ़ जाता है। इसी वजह से टेक एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि इलेक्ट्रिक रैकेट का इस्तेमाल टीवी, मॉनिटर, लैपटॉप और फोन के बिल्कुल पास नहीं करना चाहिए।

सुरक्षित इस्तेमाल के लिए क्या करें?

फिलहाल, घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि सामान्य उपयोग में यह डिवाइस पूरी तरह खतरनाक नहीं माना जाता। लेकिन कुछ सावधानियां जरूरी हैं 

  • टीवी या मोबाइल स्क्रीन के बेहद पास रैकेट इस्तेमाल न करें
  • चार्जिंग पर लगे डिवाइस के पास स्पार्क न करें
  • बच्चों को इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स के आसपास इसका इस्तेमाल न करने दें
  • खराब या लोकल क्वालिटी रैकेट से बचें

ऐसे में छोटी-सी सावधानी आपके महंगे गैजेट्स को नुकसान से बचा सकती है। खासकर आज के समय में जब घर का लगभग हर डिवाइस स्मार्ट और संवेदनशील इलेक्ट्रॉनिक्स पर निर्भर है। 

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