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राजस्थान : बीजेपी की 'गौरव' व कांग्रेस के 'संकल्प' के बीच मारवाड़ में चुनावी शंखनाद

पश्चिमी राजस्थान के 32 विधानसभा क्षेत्रों में 1285 किमी घूमेगी मुख्यमंत्री की गौरव यात्रा

राजस्थान : बीजेपी की गौरव व कांग्रेस के संकल्प के बीच मारवाड़ में चुनावी शंखनाद
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पाली। कांग्रेस के गढ़ रहे मारवाड़ में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की राजस्थान गौरव यात्रा का आगाज हो चुका है। इस यात्रा का आगाज उस समय हुआ है जब मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने विकास के क्षेत्र में लगातार उपेक्षा के आरोप लगाये हैं| यात्रा दो चरणों में होगी और 1233 किलोमीटर की दूरी तय करेगी। यात्रा इस अंदाज में भी रोचक रहेगी, क्योंकि मारवाड़ के ये पांच जिले कांग्रेस के दिग्गज नेताओं के विधानसभा क्षेत्र भी रहे हैं। इसी बीच सांवलियाजी से कांग्रेस ने संकल्प रैली में भीड़ जुटाकर राजस्थान में हर पांच साल में बदलने वाली सरकार के ट्रेंड और भाजपा सरकार के प्रति एंटी इनकमबेंसी सरीखी चर्चाओं का बल दे दिया है। बीते विधानसभा चुनावों में भाजपा ने मारवाड़ के 5 जिलों के 33 विधानसभा क्षेत्रों में से 30 विधानसभा क्षेत्रों में जीत दर्ज की थी। इतनी बंपर जीत के बावजूद भी भाजपा इस गढ़ में घुसने से घबरा रही थी, क्योंकि पूरे पांच साल तक मारवाड़ में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत खासे सक्रिय रहे। लिहाजा, पार्टी ने यात्रा की तैयारियों के लिहाज से बीस दिन पहले ही मंडल से लेकर विधानसभा स्तर तक एक दर्जन से ज्यादा मंत्रियों को तैयारियों के लिए मैदान में उतार दिया। अब मंत्री गांव-गांव जाकर यात्रा में भीड़ जुटाने की कवायद कर रहे हैं और एंटी इनकमबेंसी की टोह लेने में लगे हुए हैं। भाजपा के सांसद अपने-अपने इलाकों में उप यात्रा निकाल रहे हैं। भाजपा के मंत्री जिलों में यह कहते घूम रहे हैं कि अगर किसी स्थान पर दो हजार से कम पब्लिक रही तो मैडम स्वागत करवाने के लिए रथ से नीचे नहीं उतरेंगी।

कांग्रेस के दिग्गज नेताओं का गढ़ रहा है मारवाड़ : आजादी के बाद हुए आम चुनावों में कई दशकों से मारवाड़ की राजनीति दिग्गज कांग्रेसी नेताओं के इर्द-गिर्द घूमती रही है। यहां कांग्रेस के नाथूराम मिर्धा, परसराम मदेरणा, खेतसिंह राठौड़, रामसिंह विश्नोई, रामनिवास मिर्धा और माधोसिंह दीवान सरीखे कई नाम हैं, जिन्होंने राजस्थान की राजनीति में लम्बे समय तक अपना दबदबा साबित किए रखा है। पाली जिले में भाजपा के सांसद और छह विधानसभा के विधायक हर ग्राम पंचायतों मे लोकार्पण समारोह में भाजपा सरकार के विकास कार्यों के कसीदे पढ़कर मतदाताओं को पीले चावल बांट मुख्यमंत्री को खुश करने के लिए गौरव यात्रा में अधिकाधिक भीड़ जुटाने की जुगत में लगे हैं। प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस के नेता भी जमीनी स्तर पर बैठकें एवं सभा कर भाजपा की नाकामियां गिना रहे हैं। कांग्रेस का पूरा फोकस मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे द्वारा सुराज संकल्प यात्रा के दौरान किए गए वादों की अधूरी क्रियान्विति पर है। कांग्रेस इन्हीं विफलताओं को जनता के समक्ष रख वोट बैंक बढ़ाने की जुगत में है। मुख्यमंत्री राजे की गौरव यात्रा का दूसरा दौर 24 अगस्त से पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के राजनीतिक गढ़ माने जाने वाले जोधपुर संभाग से शुरू हुआ है। यात्रा का दूसरा चरण 16 अगस्त से भरतपुर संभाग से शुरू होना था, जिसे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन और सात दिन के राष्ट्रीय शोक के मद्देनजर स्थगित कर दिया गया था। जोधपुर संभाग में इस यात्रा की पहली सभा रामदेवरा में थी, जो प्रदेश का प्रमुख धार्मिक स्थल है। पश्चिमी राजस्थान का कुंभ माने जाने वाले लोकदेवता बाबा रामदेव के धाम रामदेवरा में भाद्रपद माह के चलते भक्तों की भीड़ ने भले ही मुख्यमंत्री राजे के लिए संजीवनी बूंटी का काम किया हो, लेकिन राजपूत सरीखे कई वर्गों की नाराजगी गौरव यात्रा के सामने एक चुनौती ही रहेगी।

मोदी लहर में हुआ था गढ़ धराशाई : जोधपुर संभाग में कुल मिलाकर 33 विधानसभा सीटें आती हैं और पिछले विधानसभा चुनावों में बीजेपी का बोलबाला रहा था। मोदी लहर के चलते पश्चिमी राजस्थान से अधिकांश विधायक भाजपा के चुने गए। इसके बावजूद गृहनगर से लेकर बाड़मेर-जैसलमेर, जालोर-सिरोही व पाली की सियायत में पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने अपना वजूद बनाए रखा। यहां से दूर रहने के बावजूद उन्होंने इन जिलों की सियायत में अप्रत्यक्ष तौर पर दखल बनाए रखा। गहलोत के साथ प्रदेश और केन्द्रीय नेतृत्व भी राजस्थान की सियासत पर पूरा फोकस किए हुए हैं। नतीजतन, मुख्यमंत्री की गौरव यात्रा के खिलाफ अब कांग्रेस संकल्प रैली लेकर आई है। राजे की गौरव यात्रा का विरोध कर रही कांग्रेस ने 24 अगस्त से संकल्प रैलियों की शुरुआत कर दी है। पहली रैली उदयपुर संभाग के सांवलियाजी (चित्तौड़गढ़) में हुई| इसमें पार्टी अध्यक्ष सचिन पायलट के साथ-साथ प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे, राष्ट्रीय महासचिव अशोक गहलोत सहित सभी प्रमुख नेताओं ने शामिल होकर यह संदेश देने की कोशिश की है कि कांग्रेस एकजुट है। अब पार्टी संकल्प रैलियों के साथ स्वयं सहायता समूहों, महिलाओं और युवाओं के समूहों से अलग से परिचर्चा करने का मानस बना रही है। कांग्रेस की रैली अब 28 अगस्त को चूरू, पांच सितंबर को बाड़मेर, 10 सितंबर को करौली तथा 12 सितंबर को नागौर में होगी।

Updated : 2018-08-25T19:56:09+05:30
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Swadesh Digital

स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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