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प्रत्याशियों की घोषणा में देरी से बढ़नेे लगी कार्यकर्ताओं की चिंता

प्रत्याशियों की घोषणा में देरी से बढ़नेे लगी कार्यकर्ताओं की चिंता
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भोपाल / शाजापुर/ स्वदेश वेब डेस्क। विधानसभा चुनाव 2018 के मतदान दिवस में अब महज एक माह का अल्प समय शेष है, लेकिन चुनावी दंगल में अपने सूरमाओं को उतारने के लिए प्रदेश की दोनों प्रमुख राजनैतिक पार्टियों भाजपा और कांग्रेस में टिकट को लेकर भारी घमासान मचा हुआ है। दोनों ही दलों ने अपने उम्मीदवारों को लेकर अपने पत्ते नहीं खोले हैं, इससे कार्यकर्ताअों की टेंशन बढ़ने लगी है।

जानकारी के अनुसार दावेदारों की दमदारी से जहां प्रदेश नेतृत्व किसी ठोस निर्णय पर पहुंचने के पहले अपने सारे चुनावी गणित ज्ञान भिड़ाने में लगा है, वहीं टिकट हासिल करने के लिए दोनों पार्टियों के प्रमुख चेहरे अपने आकाओं के साथ सारी ताकत झौंकने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ रहे हैं। कई उम्‍मीदवार टिकट पाने के लिए अपने समर्थकों के साथ राजधानी में डेरा जमाए हुए हैं, तो कई दिल्‍ली तक कूच कर गए हैं, यानी टिकट पाने की जुगाड़ में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी जा रही है। परिणाम स्वरूप चुनाव के पहले ही चुनावी घमासान की हर रोज बनती-बिगड़ती सुर्खियों ने शीत ऋतु के प्रारंभ में ही माहौल को जबरदस्त जनचर्चा की गर्माहट से भर दिया है।

विधानसभा चुनाव में फतह हासिल करने के लिए पिछली बार की तरह इस बार भी कमर कस चुकी भाजपा के मौजूदा हालात की यदि बात की जाए तो समर्पित कार्यकर्ता, संगठनात्मक एकता, सख्त अनुशासन और दृढ़इच्छाशक्ति वाले नेतृत्व के रूप में आमजनता के बीच अपनी पहचान बनाने वाली देश और प्रदेश के सबसे सशक्त राजनैतिक दल भारतीय जनता पार्टी शाजापुर जिले के विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी के उम्मीदवार की भूमिका निभाने वाले कुछ नए और कुछ पुराने चेहरों को हरी झंडी देने में चाहे पर्याप्त समय लगा रही है लेकिन संगठन की इस चयन व्यवस्था के लिए आमकार्यकर्ताओं की सोच पार्टी से थोड़ी अलग नजर आ रही है।

कार्यकर्ताओं का कहना है कि चुनाव में मात्र एक माह का अल्प समय शेष रह गया है और संगठन द्वारा प्रत्याशियों के नामों की घोषणा में देरी बरतने के कारण आगामी समय काफी परेशानियों भरा साबित हो सकता है। क्योंकि प्रत्याशी घोषणा के उपरान्त प्रचार के लिए मिलने वाला महज एक माह का अल्प समय ओर उस पर भी दीपावली जैसे बड़े त्यौंहार के आने से आम कार्यकताओं के लिए चुनावी प्रचार अभियान किसी इम्तिहान से कम साबित नहीं होगा।

प्रदेश संगठन के उपरी जोड़-तोड़ तथा चुनावी रणनीति तय करने का समय तो अब लगभग बीत चुका है अब तो प्रत्याशी घोषित करके पूर्वनियोजित रणनीति अनुसार विजय हासिल करने के प्रयास आवश्यक हैं। इसके साथ ही कार्यकतार्ओं का यह भी कहना है कि भाजपा संगठन के चुनावी प्रचार की रणनीति हमेशा से डोर-टू-डोर जीवंत सपंर्क वाली रही है, लेकिन देरी से उम्मीदवार के नाम की घोषणा की जाना जहां प्रत्याशी के लिए मुसीबत है वहीं पार्टी और कार्यकतार्ओं के लिए भी अनचाही चुनौती समझी जा रही है।

बहरहाल संभवत: एक सप्ताह के भीतर प्रत्याशियों के नामों की घोषणा करने के साथ प्रदेश संगठन की जिम्मेदारी तो एक तरह से पूरी हो जाएगी, लेकिन इसके बाद कम समय में ज्यादा मेहनत करते हुए असली अग्नि परीक्षा उम्मीदवार और कार्यकतार्ओं को ही देना पड़ेगी। जिसके लिए वे वर्तमान में चिंतित नजर आ रहे हैं।

कांग्रेस की हालत ओर भी चिंताजनक

कांग्रेस प्रदेश संगठन द्वारा टिकट बंटवारे के लिए अपनाई जा रही नीति के चलते शाजापुर विधानसभा में चुनावी माहौल बड़ा ही रोचक बनता नजर आ रहा है। पिछले 20 वर्षों से कांग्रेस का अभेद्य गढ़ बन चुकी शाजापुर विधानसभा को विगत चुनाव में भाजपा ने ढहाकर अपना विजयी ध्वज लहराया था, लेकिन इस चुनाव में दोबारा भाजपा से शाजापुर सीट छिनने के लिए पार्टी के दो बड़े नेता पूर्व मंत्री हुकुमसिंह कराड़ा तथा कांग्रेस जिलाध्यक्ष रामवीरसिंह सिकरवार आमने-सामने हो चुके हैं। दोनों के बीच इस बार चुनाव लडऩे को लेकर लंबे समय से जारी प्रतिस्पर्धा अब अपने अंतिम दोर में पहुंच चुकी है वहीं टिकिट के लिए इन 2 दावेदारों की दमखमभरी जंग ने प्रदेश संगठन को उम्मीदवार चयन के लिए भारी कशमकश में डाल दिया है। हाल यह है कि कार्यकर्ताओं के साथ ही शाजापुर के मतदाता भी उत्सुकता से इंतजार कर रहें हैं कि विधानसभा में हरस्तर पर काफी मजबूत भाजपा से मुकाबला करने के लिए कांग्रेस अपना कौन सा महारथी चुनावी मैदान में उतार रही है। शायद यही कारण है कि यहां के चौक-चौराहों पर प्रतिदिन कभी कराड़ा तो कभी सिकरवार के नामों के कयास लगाए जा रहे हैं।

नेता हुए नदारद तो चौराहों पर चमका प्रशासन

विधानसभा चुनाव की आदर्श आचार संहिता घोषित होने के पूर्व जहां शहर की सडक़ों, मोहल्लों, गलियों और चौक-चौराहों पर बधाई व शुभकामना संदेशों के साथ नेताओं की तस्वीरों से सजे-धजे फ्लेक्स और बैनर चमकते दिखाई देते थे वहीं आचार संहिता के अन्तर्गत शहर के अधिकांश सार्वजनिक स्थानों पर प्रशासन द्वारा निर्वाचन नियमों की जानकारी देने एवं मतदान की अपील करने वाले बैनर व पोस्टर लगाकर मतदाताओं को जागरूक किया जा रहा है। यही कारण है कि शहर की सार्वजनिक इमारतों व दिवारों पर इन दिनों नेता नदारद और प्रशासन चमकदार नजर आ रहा है।

Updated : 2018-10-29T21:32:04+05:30
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Swadesh Digital

स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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