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अयोध्या मामले की सुनवाई संविधान बेंच को भेजा जाए या नहीं, फैसला सुरक्षित : सुप्रीम कोर्ट

अयोध्या मामले की सुनवाई संविधान बेंच को भेजा जाए या नहीं, फैसला सुरक्षित : सुप्रीम कोर्ट
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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या मामले की सुनवाई पांच जजों की संविधान बेंच को भेजा जाए कि नहीं इस पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। कोर्ट इस बात का फैसला करेगी कि मस्जिद को इस्लाम का अभिन्न हिस्सा न मानने वाले इस्माइल फारुकी फैसले को पुनर्विचार के लिए संविधान बेंच को भेजा जाए कि नहीं।

आज अयोध्या मसले पर सुनवाई काफी हंगामेदार रही। सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने कहा कि बाबरी मस्जिद को गिराने वाले हिन्दू तालिबान थे और कुछ वकील भी सुप्रीम कोर्ट में इसी तरह का व्यववहार करते हैं। इस पर हिन्दू पक्ष के वकीलों ने जोरदार आपत्ति जताई। तब चीफ जस्टिस ने कहा कि आप ऐसी भाषा का प्रयोग नहीं करें। तब धवन ने कहा कि वे कोर्ट के रुख से सहमत नहीं हैं। वे अपने रुख पर कायम हैं।

राजीव धवन ने कहा कि 1526 से जब 1992 में गिराया गया वहां मस्जिद था। क्या वहां मंदिर था। हिंदुओं को वहां पूजा का अधिकार दिया गया। धवन ने कहा कि संविधान की धारा 15 और 25 का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि पूरे संविधान में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की बात कही गई है।

पिछले 13 जुलाई को सुनवाई के दौरान यूपी शिया सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड ने मस्जिद को इस्लाम का अभिन्न हिस्सा न मानने वाले इस्माइल फारुकी ने फैसले को पुनर्विचार के लिए संविधान बेंच को भेजने का विरोध किया था। शिया वक़्फ बोर्ड के वकील ने कहा था कि अयोध्या की मस्जिद सुन्नी वक़्फ नहीं, बल्कि शिया वक़्फ संपत्ति है। मस्जिद का निर्माण मीर बकी ने कराया था जो कि शिया था।

शिया वक्फ बोर्ड की ओर से वकील एसएन सिंह ने कहा था कि हाईकोर्ट के आदेश से मुसलमानों को मिला एक तिहाई हिस्सा यूपी शिया सेन्ट्रल वक़्फ बोर्ड का है और वे शांति और भाईचारे को ध्यान में रखते हुए अपना एक तिहाई हिस्सा मंदिर के लिए हिन्दुओं को देते हैं।

राजीव धवन ने इस्माइल फारुखी केस के अंश को पुनर्विचार के लिए संविधान पीठ को भेजे जाने की मांग की थी। उन्होंने कहा कि मस्ज़िद भले ही गिरा दी गयी है, लेकिन इबादत का अधिकार बरकरार है। धवन ने कहा था कि जैसे बामियान बुद्ध की मूर्ति को तालिबान ने गिराया, वैसे ही बाबरी मस्ज़िद को हिंदू तालिबान ने गिराया। धवन ने कहा था कि जिन्होंने मस्जिद गिराई उन्हें इस पर अधिकार दावा करने से रोक देना चाहिए।

राजीव धवन ने कहा था कि यूपी सरकार या केंद्र किसी पक्ष के समर्थन में दलील नहीं रख सकते। दोनों अपने वैधानिक दायित्व से बंधे हैं। धवन ने कहा था कि शिया वक्फ बोर्ड का ये कहना कि वो मुस्लिमों का हिस्सा राम मंदिर के लिए देना चाहते हैं, ये एक बेतुकी बात है।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि यदि वह पाएगा कि फारूकी केस में मस्जिद को इस्लाम का अभिन्न हिस्सा नहीं मानने के कोई विस्तृत कारण नहीं दिए गए हैं तो मामला बड़ी बेंच को रेफर किया जा सकता है।

Updated : 2018-07-21T01:48:39+05:30
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Swadesh Digital

स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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