ईरानी फुटबॉल टीम ने आरोप लगाया कि गन सेलिब्रेशन विवाद के बाद उसे अमेरिका से तुरंत मेक्सिको लौटने को कहा गया। कोच और कप्तान ने फीफा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।
ईरानी फुटबॉल टीम और अमेरिका के बीच वर्ल्ड कप मुकाबले के बाद नया विवाद खड़ा हो गया है। टीम ने दावा किया है कि न्यूजीलैंड के खिलाफ मैच खत्म होते ही उसे अमेरिका छोड़कर मेक्सिको लौटने के लिए कहा गया। ईरान का कहना है कि इस फैसले से खिलाड़ियों की रिकवरी और तैयारी प्रभावित हुई।
मामला सिर्फ यात्रा व्यवस्था तक सीमित नहीं रहा। मिडफील्डर मोहम्मद मोहेबी के गोल के बाद किए गए गन सेलिब्रेशन ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी। कुछ दर्शकों ने इसे लेकर नाराजगी जताई और कार्रवाई की मांग की। ईरानी कोच आमिर घालेनोई ने फीफा और अमेरिकी अधिकारियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि टीम को मैच के बाद आराम करने का समय भी नहीं दिया गया। उनके मुताबिक योजना अगले दिन मेक्सिको स्थित बेस कैंप लौटने की थी, लेकिन अचानक तुरंत वापसी करनी पड़ी।
गन सेलिब्रेशन के बाद बढ़ा विवाद
लॉस एंजिल्स में मंगलवार सुबह ईरान और न्यूजीलैंड के बीच मुकाबला खेला गया। मैच 2-2 की बराबरी पर खत्म हुआ और ईरान के लिए मोहम्मद मोहेबी ने एक गोल किया। गोल के बाद उनका गन सेलिब्रेशन चर्चा का विषय बन गया। वीडियो वायरल होने के बाद कई फैंस ने इसकी आलोचना की। कुछ लोगों ने खिलाड़ी पर प्रतिबंध लगाने की मांग भी उठाई। इस घटना ने खेल के मैदान से बाहर राजनीतिक और सामाजिक बहस को भी हवा दे दी।
टीम ने यात्रा और व्यवस्था पर उठाए सवाल
ईरान के कोच आमिर घालेनोई ने कहा कि अचानक मेक्सिको लौटने के फैसले से खिलाड़ियों को परेशानी हुई। उन्होंने दावा किया कि खिलाड़ियों को आराम और रिकवरी का पर्याप्त समय नहीं मिला। कप्तान मेहदी तारेमी ने भी टीम की मुश्किलों का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि मेक्सिको से लॉस एंजिल्स पहुंचने में करीब पांच घंटे लगे। सुरक्षा जांच और अन्य प्रक्रियाओं के कारण टीम को अतिरिक्त परेशानियों का सामना करना पड़ा। तारेमी ने कहा कि टीम को फीफा से बेहतर सहयोग की उम्मीद थी। उनके अनुसार मौजूदा हालात में खिलाड़ियों के लिए हर चीज चुनौतीपूर्ण हो गई है।
स्टेडियम के बाहर भी दिखी अमेरिका-ईरान खींचतान
मैच के दौरान मैदान के बाहर राजनीतिक तनाव का असर भी नजर आया। अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव के बाद हालिया समझौते के बावजूद स्टेडियम के बाहर प्रदर्शन हुए। अमेरिकी प्रशंसकों ने झंडे लहराए और ईरानी सरकार के खिलाफ विरोध जताया। इससे साफ दिखा कि फुटबॉल मुकाबला केवल खेल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दोनों देशों के रिश्तों की छाया भी इस पर पड़ी।
वीजा विवाद ने पहले ही बढ़ा दी थी टीम की मुश्किलें
ईरानी टीम की परेशानी वर्ल्ड कप शुरू होने से पहले ही सामने आने लगी थी। ईरान फुटबॉल महासंघ के अनुसार अमेरिका ने कुछ अधिकारियों, सपोर्ट स्टाफ और मीडिया प्रतिनिधियों को वीजा नहीं दिया था। इससे टीम का सपोर्ट सिस्टम प्रभावित हुआ। इसके अलावा ईरानी महासंघ ने आरोप लगाया था कि वर्ल्ड कप के लिए आरक्षित टिकटों का हिस्सा वापस ले लिया गया। इससे उन ईरानी प्रशंसकों को नुकसान हुआ जिन्होंने यात्रा की तैयारी पहले ही कर ली थी।
बेल्जियम और मिस्र के खिलाफ बढ़ी चुनौती
न्यूजीलैंड के खिलाफ ड्रॉ के बाद ईरान के लिए आगे के मुकाबले और अहम हो गए हैं। टीम को अब ग्रुप स्टेज में बेल्जियम और मिस्र जैसी मजबूत टीमों का सामना करना है। मौजूदा विवाद और मैदान के बाहर की परेशानियों के बीच ईरानी खिलाड़ियों पर बेहतर प्रदर्शन का दबाव बढ़ गया है। टीम के लिए अब चुनौती सिर्फ अंक हासिल करने की नहीं बल्कि इन परिस्थितियों से उबरकर टूर्नामेंट में अपनी स्थिति मजबूत करने की भी है।