राजदेव पांडेय
भोपाल। पश्चिम बंगाल में भाजपा और उसकी पूववर्ती पार्टी के चुनावी संघर्ष में मतदाताओं की लामबंदी अचानक नहीं हुई। हर चुनाव में मतदाताओं ने इनके समर्थन में अलग-अलग रुझान दिखाया। 1951 के पहले विधानसभा चुनाव में पार्टी धमाकेदार दस्तक दी। नौ सीट जीतीं। इस चुनाव में जनसंघ को 5.58 प्रतिशत वोट मिले। इसके बाद उसे मतदाताओं का समर्थन पाने के लिए खूब संघर्ष किया,लेकिन बात नहीं बनी। हालांकि इस बार मतदाताओं ने रिकार्ड मतदान कर भाजपा को अपने राज्य की सत्ता की चाबी सौंप दी है। बता दें कि इस बार पश्चिम बंगाल में मतदाताओं ने भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में सबसे अधिक मतदान किया था।
भाजपा के पक्ष में कुछ यूं बढ़ा मतदाताओं का कारवां
पहले चुनाव के बाद वर्ष 1957 के विधानसभा चुनाव में 0.98 फीसदी, 1962 में 0.45, 1967 में 1.33 , 1969 में 0.89, 1971 में 0.82 , 1्र982 में 0.58, 1987 में 0.51, 1991 में 11.34, 1996 में 6.45 , 2001 में 5.19, 2006 में 1.93, 2011 में 4.06 ,2016 में 10.16 और 2021 में रिकार्ड 38.11 फीसदी वोट मिले। बात साफ है कि पिछले तीन चुनावों में भाजपा के पक्ष में मतदाताओं का रूझान लगातार बढ़ा. उससे पहले भाजपा के प्रति मतदाता जुड़ाव का प्रदर्शन नहीं कर सका था।
इस बार पश्चिम बंगाल में हुए अब तक के मतदानों में सबसे अधिक रिकार्ड तोड़ मतदान हुआ। मतदान का ब्यौरा कुछ इस प्रकार है
पश्चिमी बंगाल विधानसभा चुनाव


राजदेव पांडेय, स्वदेश भोपाल के स्थानीय संपादक हैं।