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UK Pastor Arrest Case Sparks Debate

ब्रिटेन में एक ईसाई पादरी की क्यों हुई गिरफ़्तारी?

ब्रिटेन के वाटफोर्ड में एक पादरी की गिरफ्तारी का वीडियो वायरल हुआ है। इस मामले में पुलिस कार्रवाई और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बहस छिड़ गई है।


ब्रिटेन में एक ईसाई पादरी की क्यों हुई गिरफ़्तारी

Special News |

सोनाली मिश्रा।

क्या हम कभी कल्पना कर सकते हैं कि ब्रिटेन में कोई पादरी केवल इसलिए गिरफ्तार हो सकता है कि वह सड़क पर बाइबिल पढ़ रहा हो और मुस्लिमों से ईसाई बनने की बात कर रहा हो? क्या यह हमारी कल्पना में आ सकता है कि कोई पादरी ब्रिटेन में इस्लाम की आलोचना करने पर जेल भेज दिया जाएगा? 

मगर ऐसा हुआ है! ऐसा यूके में वैटफोर्ड टाउन सेंटर में हुआ है। पादरी स्टीव माइले वैटफोर्ड के टाउन सेंटर के सामने खड़े होकर ईसाई पंथ का प्रचार कर रहे थे और इस्लाम की आलोचना कर रहे थे। वे एलजीबीटी जीवन शैली की भी आलोचना कर रहे थे। 

मगर तभी उन्हें चारों ओर से पुलिस ने घेर लिया और देखते ही देखते उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। उनपर पुलिस वालों ने यह आरोप लगाया कि उन्होनें एक बच्चे को परेशान किया है। मगर पादरी ने इसका विरोध किया और कहा कि उन्होनें ऐसा कुछ भी नहीं किया है। 
यह वायरल घटना 18 अप्रेल की है। सोशल मीडिया पर यह वीडियो चर्चा का विषय बनी हुई है। पादरी के अनुसार वह बाइबिल के अंश गा रहे थे और वहाँ से गुजरते हुए लोगों से पश्चाताप करने के लिए कह रहे थे। 

और यह भी चर्चा कर रहे थे कि आखिर इस्लाम का इतिहास कितना हिंसक रहा है, मगर उनके दिल में मुस्लिमों के लिए प्यार और संवेदना है और वे यह चाहते हैं कि मुस्लिमों को जीसस बचा लें। 

मगर ऐसा कहते ही उन्हें घेर लिया गया और देखते ही देखते पुलिस वाले उन्हें हिरासत में लेने के लिए आ गए। पादरी ने पूछा कि उनका अपराध क्या है? उन्होनें कहा कि उन्होनें कोई अपराध नहीं किया है। मगर उन्हें गिरफ्तार करते समय उन्हें गिरफ्तार करने वाले पुलिसवालों ने मजाक उड़ाते हुए कहा “जीसस के नाम पर कार में बैठें!” 

वहाँ पर मौजूद लोगों ने भी पुलिस की इस हरकत पर विरोध दर्ज किया और कहा कि पादरी ने ऐसा कुछ कहा ही नहीं था, जिसके कारण उन्हें गिरफ्तार करना पड़े। इस पर पुलिस वालों ने उन्हें भी साफ जबाव नहीं दिया। पादरी का कहना है कि उनके साथ पुलिस स्टेशन में भी गलत व्यवहार हुआ और उन्हें पुलिस के वाहन में भी दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा था। उन्हें हथकड़ी पहनाकर अपराधियों कई तरह ले जाया गया। 

उनका कहना है कि उन्हें दस से बारह घंटों तक बैठाया गया और उन्हें काफी समय तक बाथरूम भी नहीं जाने दिया गया और उनके परिवार को भी इस घटना के विषय में सूचित नहीं किया गया। 

इस घटना पर सोशल मीडिया पर लगातार चर्चा हो रही है। लोगों का कहना है कि इतनी जल्दी प्रतिक्रिया तो अपराधी को लेकर भी पुलिस की नहीं होती है, जितनी पादरी के मामले को लेकर हुई।

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