तेलंगाना में पिछले दिनों एक भयानक अपराध हुआ। अपराध मानवता को शर्मसार करने वाला था। अपराध यह था कि एक आदमी ने बेटे के लालच में अपनी गर्भवती बीवी और दो बच्चियों को मार डाला था। और उसने यह तब किया जब उसे यह पता चला कि उसकी बीवी के गर्भ मे पल रहा बच्चा लड़की है। यह पता लगते ही वह अपने आपे से बाहर हो गया और साथ ही उसने तीसरी बेटी से छुटकारे की योजना बनाते हुए तीनों की हत्या कर दी। उसने पहले अपनी बीवी का गर्भपात कराने का प्रयास किया, मगर जब वह नहीं मानी तो उसने एक खौफनाक कदम उठाया। वह उन तीनों को स्विमिंग पूल के पास लेकर गया और फिर उन्हें पानी में धक्का देकर मार डाला।
इस अपराध की रिपोर्टिंग भी हर तरफ हुई। मगर टाइम्स ऑफ इंडिया ने इस ओर विशेष ध्यान खींचा क्योंकि इसमें एक लाल साड़ी में मंगलसूत्र पहने हुए गर्भवती महिला की तस्वीर थी। जब इस अपराध के आरोपी की पहचान सामने आई तो कथित मुख्यधारा की मीडिया की कच्ची रिसर्च की भी बात सामने आई। अपराधी का नाम अज़हरुद्दीन था और मरने वाली का नाम फरहाना था। बेटियों का नाम उमेरा और आएशा था। महिला के पिता एसके अली ने अपने दामाद पर यह आरोप लगाया कि उसने उनकी बेटी और नवासियों को मार डाला है और इसे दुर्घटना का रूप देने का प्रयास किया। वह उन्हें गाँव के बाहर अपनी जमीन पर बने निजी आवास पर ले गया और फिर एक बच्ची की सालगिरह मनाई और उसके बाद उन्हें वहीं पर बने स्विमिंग पूल में धक्का दे कर मार डाला।
एसके अली का आरोप है कि उनके दामाद अज़हरुद्दीन ने पहले उनकी बेटी और नवासियों को वहाँ पर डुबोकर मार डाला और फिर गुरुवार की सुबह परिवार के सदस्यों को बताया। पुलिस के अनुसार जांच चल रही है और आरोपी फरार है। मगर लोगों को टाइम्स ऑफ इंडिया में इस रिपोर्ट पर लगी तस्वीर पर गुस्सा आया। लोगों ने प्रश्न किया कि जब यह एक मुस्लिम परिवार की घटना है तो फिर हिन्दू महिला का चित्र क्यों? यह नहीं हम कह रहे हैं कि हिंदुओं में ऐसी घटनाएं नहीं होतीं, परंतु जहां जिस समुदाय के आरोपी और पीड़ित हैं, वहाँ पर दूसरे समुदाय के धार्मिक प्रतीकों को क्यों दिखाना?
मगर यह ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। मुस्लिम बाबाओं के पकड़े जाने पर हिन्दू साधुओं का चित्र लगाना बहुत आम है और यह लगातार होता रहता है। हिन्दू प्रतीकों को बदनाम करने का यह षड्यन्त्र बहुत पुराना है। टाइम्स ऑफ इंडिया के जब इस कदम की आलोचना सोशल मीडिया पर हुई तो उन्होनें वह चित्र बदल दिया। परंतु जो भी हुआ, वह एक गंभीर प्रश्न उठाता है कि क्या जो भी लोग वेब पर समाचार बनाते हैं, क्या वे घटनाओं का अध्ययन सही से करके तस्वीर नहीं लगाते हैं या फिर यह सभी के दिमाग में रहता है कि हिन्दू प्रतीकों का जहां भी हो सके विकृतिकरण करना चाहिए? चूंकि हिन्दू धर्म सहिष्णु है और उसके लोग भी अधिक इस प्रकार की घटनाओं पर आपत्ति नहीं करते हैं, तो सब कुछ चल जाता है! इस तस्वीर को हालांकि हटा लिया गया है, परंतु प्रश्न अभी तक उपस्थित है!

लेखिका - सोनाली मिश्रा