16 मई 2026 को शनि जयंती और शनिश्चरी अमावस्या का दुर्लभ संयोग बन रहा है। ग्वालियर के प्रसिद्ध शनिचरा मंदिर में लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।
अपर्णा विष्णु तिवारी
शनि देव को न्याय के देवता और कर्मफल दाता माना जाता है। वर्ष 2026 में शनि देव की कृपा पाने का एक ऐसा अवसर आ रहा है, जिसका इंतजार साधक वर्षों से करते हैं। 16 मई 2026 को ज्येष्ठ मास की अमावस्या है, जिसे शनि जयंती के रूप में मनाया जाएगा। इस बार की शनि जयंती इसलिए विशेष है क्योंकि यह शनिवार के दिन पड़ रही है, जिससे शनिश्चरी अमावस्या का दुर्लभ संयोग बन रहा है। मान्यता है कि शनि देव कर्मों के अनुसार फल देने वाले देवता हैं, इसलिए उन्हें न्यायाधीश भी कहा जाता है।
पंचांग गणना के अनुसार शनि जयंती का शनिवार के दिन पड़ना अत्यंत शुभ और दुर्लभ घटना मानी जाती है। ऐसा महासंयोग लगभग 13 वर्ष बाद बन रहा है। ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि शनिवार, अमावस्या और शनि जयंती का यह त्रिवेणी संगम भक्तों की बंद किस्मत के ताले खोलने की क्षमता रखता है।
ग्वालियर के समीप एंती गांव में विराजमान शनि देव का देशभर में विशेष महत्व है। मान्यता है कि भगवान हनुमान रावण की कैद से छुड़ाकर शनिदेव को यहीं लेकर आए थे। तभी से यहां शनि देव विराजमान हैं। यह भी बताया जाता है कि मंदिर में प्रतिष्ठित शनि देव की प्रतिमा आसमान से टूटकर गिरे एक उल्कापिंड से निर्मित है, जिससे यह स्थान अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि आज भी यहां शनिदेव अमर रूप में विराजमान हैं। शनि देव के चमत्कारों को देखते हुए ग्वालियर के सिंधिया राजघराने द्वारा इस मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया गया था।
रावण की कैद से हनुमान ने मुक्त करवाया
बताया जाता है कि जब भगवान महाबली हनुमान रावण की लंका जलाने वाले थे, तब उनकी दृष्टि उस स्थान पर पड़ी, जहां रावण ने अन्य देवताओं के साथ शनि देव को भी बंदी बनाकर रखा था। शनि देव ने हनुमानजी से रावण की कैद से मुक्त कराने का आग्रह किया। इसके बाद हनुमानजी ने शनि देव को रावण की कैद से छुड़वाया।
शनिश्चरी अमावस्या आज
रावण की कैद में रहने से शनि देव अत्यंत कमजोर हो गए थे। उन्होंने हनुमानजी से विनती की कि उन्हें किसी सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दें। इसके बाद हनुमानजी शनि देव को यहां स्थित पर्वत पर लेकर आए और उन्हें वहीं स्थापित कर दिया। मान्यता है कि शनि देव के प्रकोप से ही रावण की लंका जली और उसके कुल का भी विनाश हुआ।
जहां शनि देव गिरे, वहां आज भी है गड्ढा
पीठ के महंत शिवराम दास त्यागी महाराज के मुताबिक शनिचरा मंदिर के चमत्कार किसी से छिपे नहीं हैं। यहां लोगों की अपार आस्था है। शनि देव भक्तों की मनोकामनाएं भी पूरी करते हैं। बताया जाता है कि जब हनुमानजी शनि देव को रावण की कैद से छुड़ाकर यहां लाए थे, तब जिस स्थान पर शनि देव गिरे थे, वहां एक बड़ा गड्ढा हो गया था। यह गड्ढा आज भी यहां मौजूद है।
करवाया था मंदिर का जीर्णोद्धार
भगवान शनि देव इस चमत्कारिक स्थान पर त्रेतायुग में आकर विराजमान हुए थे। बताया जाता है कि यहां शनि देव के मंदिर का निर्माण राजा विक्रमादित्य ने करवाया था। इसके बाद शनि देव की महिमा और चमत्कारों से प्रभावित होकर ग्वालियर के तत्कालीन महाराजा दौलतराव सिंधिया ने मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया। वर्तमान में यह मंदिर मध्य प्रदेश सरकार के अधीन है, जिसका प्रबंधन मुरैना जिला प्रशासन द्वारा किया जाता है।
लगेगा विशाल मेला
महंत के मुताबिक शनि जयंती पर लगभग 10 लाख भक्तों के दर्शन करने की संभावना है। इसकी तैयारियां मंदिर में जोर-शोर से चल रही हैं। सभी श्रद्धालुओं के लिए लंगर की व्यवस्था भी कर ली गई है।