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Women Reservation Bill: PM Modi Targets Opposition

महिला आरक्षण विधेयकः विपक्ष मानसिकता बदले

महिला आरक्षण विधेयक पर पीएम मोदी ने विपक्ष को चेतावनी दी। 33% आरक्षण को लेकर राजनीति तेज, 2029 चुनावों से पहले इसका असर बढ़ने की संभावना।


महिला आरक्षण विधेयकः विपक्ष मानसिकता बदले

महिला आरक्षण विधेयक न पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष को दो टूक शब्दों में चेतावनी देकर एक तरह से आईना दिखाया है कि महिलाओं को आरक्षण देने में कोई ननुकुर नहीं होनी चाहिए। निश्चित रूप से प्रधानमंत्री की विपक्ष को यह नसीहत राह दिखाने वाली होनी चाहिए कि महिलाओं को आरक्षण पर अब तक बहुत राजनीति हो चुकी है, अब निर्णय करने का वक्त है। 

कांग्रेस सहित तमाम विपक्षी दल महिला आरक्षण पर अब तक नीयत साफ नहीं कर पाए हैं। विपक्ष की हीलाहवाली के चलते ही विधेयक इतने लम्बे समय से अधर में लटका रहा। प्रधानमंत्री ने विपक्ष की नीयत पर सवाल खड़ा करते हुए कड़े शब्दों में आगाह किया है कि जो लोग महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का विरोध करेंगे, उन्हें लंबे समय तक इसका राजनीतिक खामियाजा भुगतना पड़ेगा। यह चेतावनी कंवल संसदीय बहस का हिस्सा नहीं, बल्कि आने वाले चुनावों के लिए एक स्पष्ट संदेश भी है। प्रधानमंत्री ने जोर दिया कि महिला आरक्षण को राजनीतिक रंग देने के बजाय इसे लोकतंत्र को मजबूत करने के दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए। 

उन्होंने इसे 21वीं सदी का सबसे महत्वपूर्ण सुधार बताया है। प्रधानमंत्री ने ग्रामीण स्तर पर लाखों महिला प्रतिनिधियों का हवाला देते हुए कहा कि अब महिलाएं मुखर हो गई हैं और वे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हैं। उनका तर्क है कि अगर अब आरक्षण का विरोध हुआ, तो महिलाएं उन्हें माफ नहीं करेंगी। प्रधानमंत्री मोदी ने याद दिलाया कि जो लोग 25-30 साल पहले आरक्षण का विरोध कर रहे थे, आज उन्हें अपनी मानसिकता बदलने की जरूरत है। यह संकेत सीधे तौर पर उन विपक्षी दलों की ओर है जो इस विधेयक को चुनावी स्टंट बता रहे हैं। 

उन्हें यह भी समझ लेना चाहिए कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम का उद्देश्य 2029 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करना है। प्रधानमंत्री की इस चेतावनी को व्यापक सन्दर्भ में देखा जा रहा है। जहां एक तरफ सरकार इसे ऐतिहासिक कदम मान रही है, वहीं विपक्ष इसके कार्यान्वयन और समयसीमा (परिसीमन से जुड़ी होने) पर सवाल उठा रहा है। प्रधानमंत्री की इस चुनौती को अगर मास्टरस्ट्रोक कहा जाए तो इसमें अतिश्योक्ति नहीं होगी, क्योंकि वे इस विधेयक को एक 'चैंपियन' की तरह पेश कर रहे हैं, और प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप में राजनीतिक विमर्श भी बन रहा है कि जो दल सीधे तौर पर महिला आरक्षण का विरोध करेंगे वे दल 'महिला विरोधी' के रूप में चित्रित हो जाएंगे। 

यह स्पष्ट है कि महिला आरक्षण अब केवल एक विधेयक नहीं, बल्कि एक ऐसा राजनीतिक उपकरण बन गया है जो आने वाले समय में भारतीय राजनीति के केंद्र में रहेगा। उल्लेखनीय है कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम (2023) के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत (एक-तिहाई) सीटें आरक्षित करने का प्रावधान है। सितंबर 2023 में पारित यह कानून परिसीमन और जनगणना से जुड़ा है, जिसे अब 2026-2029 के बीच लागू करने के प्रयास चल रहे हैं ताकि 2029 के आम चुनाव में इसे अमल में लाया जा सके।

 

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