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One-Sided Media Reporting on Divorce Cases Debate

पारिवारिक मामलों पर एकतरफा रिपोर्टिंग से परिवार की छवि को नुकसान

सोनाली मिश्रा


पारिवारिक मामलों पर एकतरफा रिपोर्टिंग से परिवार की छवि को नुकसान

वर्तमान समय में जहां पर तलाक सामान्य होते दिखाई दे रहे हैं, तो वहीं यह भी देखा गया है कि दो लोगों के बीच हुई इस कानूनी कार्यवाही में एक पक्ष को खलनायक बनाकर पेश किया जाता है। मीडिया में एक पक्ष को नायक और दूसरे को खलनायक बनाकर पेश किया जाता है। लोग बिना जाने समझे जज बन जाते हैं और सार्वजनिक रूप से परिवार की प्रतिष्ठा धूमिल होने लगती है। और यदि मामला लड़की का हो तो पुरुष पक्ष को अपने आप ही दोषी मान लिया जाता है। इसके चलते परिवार पर क्या प्रभाव पड़ रहा है, इस पर ध्यान नहीं जाता है। 

जैसा अभी हाल ही में मेरठ में एक लड़की के तलाक के मामले में हुआ। दो दिन पहले मीडिया से लेकर सोशल मीडिया तक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें एक रिटायर्ड जज ज्ञानेंद्र शर्मा अपनी बेटी के तलाक का जश्न मना रहे थे और यह बता रहे थे कि कैसे उनकी बेटी को आजादी मिली। वह एक प्रताड़ित जीवन जी रही थी, और जब उसे उस प्रताड़ना से आजादी मिली तो वे लोग जश्न मना रहे हैं। वे लोग एक जहरीले रिश्ते के समाप्त होने की खुशी मना रहे हैं। सोशल मीडिया पर लड़के वालों का पक्ष जाने बिना ही उन्हें कोसा जाने लगा। यह कहा जाने लगा कि पिता ऐसे ही होने चाहिए कि बेटी को हर हाल में अपना लें। वैसे पिता ऐसे ही होने चाहिए कि अपनी बेटी के साथ खड़े रहें। परंतु वे कैसे खड़े रहें यह महत्वपूर्ण है। 

एक बार फिर से हिन्दू परिवारों को कोसने के लिए लोग आगे आ गए और कहने लगे कि हिन्दू परिवार में अभी भी दहेज के लिए लड़की को प्रताड़ित किया जाता है। लड़के वालों ने दहेज लिया या नही, यह जानने का प्रयास भी नहीं किया गया। एक प्रकार से एकतरफा कहानी चलाई गई। एक परिवार के मसले को पूरी तरह से मसालेदार बनाकर सोशल मीडिया पर चलाया गया। परंतु क्या यही सच था? या सच की परत कुछ और थी? जब इस मामले को लेकर मीडिया ने उस लड़के के परिवार को खोजा और कुरेदा तो कहानी का दूसरा पक्ष सामने आया। और वह चौंकाने वाला था। 

जिस लड़के गौरव से प्रणिता की शादी हुई थी, वह सेना में है और उसके पिता श्याम किशोर भी सेना में रह चुके हैं और छोटा भाई भी सेना में ही है। दैनिक भास्कर के साथ बात करते हुए उन्होनें बताया कि “गौरव की शादी 2018 में रिटायर्ड जज ज्ञानेंद्र शर्मा की बेटी प्रणिता शर्मा से हुई थी। मगर शादी के बाद से ही प्रणिता के माता-पिता का अधिक हस्तक्षेप था। 1 साल बाद ही प्रणिता ने झगड़े शुरू कर दिए। उनके परिवार ने उसे भड़काकर विवाद बढ़ा दिया। उन्होनें बताया कि प्रणिता और उनके बेटे की शादी को 7 साल हो चुके थे। लेकिन वे अपने बेटे के साथ मुश्किल से 3-4 साल ही रहे। गौरव पर अलग अलग मामलों को लेकर मुकदमे दर्ज होने लगे और तीन मुकदमे दर्ज हुए जो इलाहाबाद, दिल्ली और बरेली में थे। इसके बावजूद गौरव ने समझौता कर लिया और प्रणिता के साथ रहने लगे।

मगर मामला बिगड़ा जब वर्ष 2025 में बेटा हुआ और जिसका नाम ओजस्वी अग्निहोत्री रखा गया। बेटे के होने के बाद ये लोग खुश थे, मगर प्रणिता के मायके वालों ने उसका मुंडन अपने आप करा दिया और दादादादी और पापा को बताया तक नहीं। 
उसके बाद मामला बिगड़ा और तलाक हो गया। ऐसे में यह प्रश्न उठता है कि क्या पारिवारिक मामलों का इस प्रकार सार्वजनिक प्रदर्शन किया जाना चाहिए? क्या मीडिया और सोशल मीडिया में सनसनी फैलाकर ही खबरें दिखाई जा सकती हैं? क्या पारिवारिक मामलों को लेकर रिपोर्टिंग संवेदनशील नहीं होनी चाहिए क्योंकि गलत तरीके से यदि प्रसिद्धि मिलेगी तो लोग इसी राह पर चलने के लिए प्रेरित होंगे और ऐसे मामलों में पुरुष का पक्ष जानना क्या आवश्यक नहीं होता है? ऐसी तमाम घटनाएं होती हैं, जिनके चलते युवाओं का परिवार और विवाह से मोहभंग हो रहा है और इनमे बहुत बड़ा योगदान मीडिया और सोशल मीडिया का भी है।

लेखिका- सोनाली मिश्रा

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