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NOTA Impact in Bengal and Assam Elections

नोटा का प्रहार : पश्चिम बंगाल-असम में कई स्थापित दलों को पीछे छोड़ा

पश्चिम बंगाल, असम और दक्षिण भारत के राज्यों में NOTA ने कई स्थापित दलों को पीछे छोड़ दिया। जानिए क्यों बढ़ रहा है मतदाताओं का असंतोष।


नोटा का प्रहार  पश्चिम बंगाल-असम में कई स्थापित दलों को पीछे छोड़ा

राजदेव पांडेय, भोपाल

पश्चिम बंगाल, असम और तामिलनाडु के विधानसभा चुनाव में नोटा (नन ऑफ द एबव) ने दमदार उपस्थिति दर्ज कराई है। दो दशकों से अधिक समय तक वामपंथियों की राजनीति का गढ़ रहे पश्चिम बंगाल में नोटा के पक्ष में 4,94,932 मत पड़े हैं। यह राज्य में पड़े कुल वोटों का 0.78 फीसदी है। देखने में यह संख्या साधारण लग सकती है, लेकिन नोटा पर पड़े ये मत वहां कई स्थापित दलों से अधिक हैं। पांचों राज्यों में करीब 11 लाख वोट नोटा के समर्थन में पड़े हैं।

उदाहरण के लिए, पश्चिम बंगाल में कभी प्रमुख दल रहे सीपीआई को केवल 0.18 फीसदी और सीपीआई-एमएल (एल) को 0.07 फीसदी वोट मिले हैं। वहीं बीएसपी को 0.18 फीसदी और एआईएमआईएम को केवल 0.09 फीसदी वोट मिले। अन्य तीन दलों को भी नोटा से कम वोट मिले हैं। यदि इन सभी दलों के वोट जोड़ दिए जाएं, तब भी उनकी संख्या कमोबेश नोटा पर पड़े वोटों से कम ही रहेगी। वाम दलों में केवल सीपीएम को ही नोटा की तुलना में अधिक वोट मिले हैं। नोटा पर पड़े ये वोट स्थापित दलों पर बेहतर प्रत्याशी उतारने का दबाव बनाते दिख रहे हैं।

असम में वाम दलों को नोटा से कम मिले वोट

असम विधानसभा चुनाव में पड़े कुल वोटों में से नोटा पर 1.23 फीसदी यानी 2,67,191 मत पड़े हैं। नोटा पर पड़े ये मत सीपीआईएम, सीपीआई और सीपीआईएमएल सहित आठ दलों से तुलनात्मक रूप से अधिक हैं।इस राज्य में मतदाताओं ने कम्युनिस्ट दलों को लगभग पूरी तरह खारिज कर दिया है। यहां इन्हें मिले कुल वोट भी नोटा से कम हैं। सीपीआई, सीपीआईएम और सीपीआईएमएल (एल) जैसे दलों को क्रमशः 0.04, 0.47 और 0.13 फीसदी ही वोट हासिल हुए।

दक्षिण भारत में भी प्रभावी रहा NOTA

दक्षिण भारत के प्रमुख राज्य तामिलनाडु में स्थापित दलों के प्रत्याशियों से नाराज मतदाताओं की संख्या करीब दो लाख तक पहुंच गई है। यहां नोटा को 1,99,801 वोट मिले, जो कुल मतदान का 0.41 फीसदी है। प्रतिशत के हिसाब से यह आंकड़ा छोटा लग सकता है, लेकिन कई सीटों पर हार-जीत का अंतर इससे कम रहा है।केरल में नोटा पर 0.57 फीसदी यानी 1,23,067 वोट पड़े। यहां भी कई छोटे और स्थापित दलों से अधिक मत नोटा को मिले। वहीं पुडुचेरी में कुल मतदान का 0.77 फीसदी यानी 6,633 वोट नोटा के पक्ष में पड़े।

बंगाल में AIMIM को मतदाताओं ने नकारा

पश्चिम बंगाल में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) को केवल 0.14 फीसदी वोट मिले। इससे साफ संकेत मिलता है कि मुस्लिम मतदाताओं ने एआईएमआईएम को व्यापक समर्थन नहीं दिया। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, मुस्लिम मतों का बड़ा हिस्सा तृणमूल कांग्रेस के खाते में गया।

पांच राज्यों में NOTA के वोट

  • पश्चिम बंगाल- 4,94,932

  • असम- 2,67,191

  • तामिलनाडु- 1,99,801

  • केरलम- 1,23,067

  • पुडुचेरी- 6,633

पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में नोटा पर पड़े मतों की उपेक्षा नहीं की जा सकती। किसी भी प्रत्याशी से सहमत न होने की स्थिति में लाखों मतदाताओं ने नोटा का विकल्प चुना है। यह संकेत है कि मतदाता अब केवल मतदान ही नहीं, बल्कि राजनीतिक दलों के उम्मीदवार चयन पर भी अपनी राय दर्ज करा रहे हैं।


 

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